अखिलेश के " चहेतों" की हार से खुश हुए सपाई, जानिए सोशल मीडिया पर क्यों लिखा "नवरत्न स्वाहा"
लखनऊ, 15 अप्रैल: उत्तर प्रदेश विधान परिषद चुनाव में 36 सीटों पर परिणाम आ गया है। विधानसभा चुनाव के बाद, भाजपा ने विधान परिषद चुनाव में भी भारी जीत हासिल की है। इन चुनावों परिणाम के अनुसार भाजपा की 36 में से 33 सीटें भारतीय जनता पार्टी के हिस्से में आई हैं। वहीं दूसरी ओर अखिलेश यादव के किचन कैबिनेट से ताल्लुक रखने वाले सदस्य भी बुरी तरह से चुनाव हारे हैं। किचन कैबिनेट के इन सदस्यों को अखिलेश के नवरत्न की संज्ञा दी गई थी। स्थिति यह है कि सोशल मीडिया, व्हाट्सएप ग्रुप और ट्विटर पर ऐसी पोस्ट की बाढ़ आ गई है, जिसमें अखिलेश यादव के इन नवरत्नों की हार पर सपा के कार्यकर्ता खुश हैं।

बुरी तरह हारे अखिलेश यादव का 'नवरत्न'
विधान परिषद के इस चुनाव में कुछ चेहरों पर समाजवादी पार्टी की सबसे ज्यादा नजर थी। इनमें ठाकुर उदयवीर सिंह, सुनील सिंह साजन, संतोष यादव उर्फ सनी, एमएलसी वासुदेव यादव, राजेश यादव विशेष सलाहकारों में गिने जाते हैं। दरअसल, अखिलेश यादव के आसपास रहने वाले इन चेहरों को समाजवादी पार्टी के कार्यकर्ता अखिलेश यादव का 'नवरत्न' कहा जाता है. यह भी सच है कि ये चेहरे भी खुद को 'नवरत्न' मानते हैं। लेकिन इस चुनाव में इन नवरत्नों की हालत कुछ ऐसी हो गई कि उन्हें करारी हार का सामना करना पड़ा।

उदयवीर, सुनील साजन और संतोष यादव की बुरी हार
अखिलेश यादव के दाहिने हाथ कहे जाने वाले उदयवीर सिंह अखिलेश यादव के गढ़ में नामांकन नहीं कर पाए थे। पार्टी ने उन्हें मथुरा-एटा-मैनपुरी सीट से प्रत्याशी बनाया। अखिलेश यादव के विशेष सलाहकार माने जाने वाले लखनऊ-उन्नाव सीट से चुनाव लड़ने वाले सुनील सिंह साजन 3088 वोटों के भारी अंतर से चुनाव हार गए। साजन को सिर्फ 400 वोट मिले। संतोष यादव उर्फ सनी, उन्हें अखिलेश यादव के किचन कैबिनेट का हिस्सा माना जाता है। लेकिन विधान परिषद चुनाव में बस्ती-सिद्धार्थनगर सीट से संतोष यादव उर्फ सनी को महज 887 वोट मिले। जबकि यहां बीजेपी के सुभाष यदुवंश को 5176 वोट मिले। सनी 4289 मतों के भारी अंतर से चुनाव हार गए।

वासुदेव यादव, राजेश यादव और अरविंद गिरी भी हारे
समाजवादी पार्टी की सरकार में शिक्षा विभाग में अहम पदों पर रहे पूर्व एमएलसी वासुदेव यादव को प्रयागराज क्षेत्र से प्रत्याशी बनाया गया है। उनके हाथों को भी हार का सामना करना पड़ा। अरविंद गिरी समाजवादी युवजन सभा के प्रदेश अध्यक्ष हैं, बलिया सीट से मैदान में थे, उन्हें सिर्फ 278 वोट मिले थे। बाराबंकी सीट से समाजवादी पार्टी के राजेश कुमार यादव को केवल 527 वोट मिले। गोरखपुर अस्पताल मामले से सुर्खियों में आए कफील खान जिस जोश और दावे से यह दावा भी नहीं कर पाए कि वह देवरिया-कुशीनगर से दंगों में उतरे थे। आनंद भदौरिया ने एमएलसी का चुनाव नहीं लड़ा था। सीतापुर में अरुणेश कुमार को सिर्फ 61 वोट मिले।

'नवरत्न' की हार पर 'जश्न' क्यों?
विधानसभा चुनाव के वक्त कई कार्यकर्ताओं ने टिकट बंटवारे को लेकर अखिलेश यादव के इन 'करीबी दोस्तों' पर आरोप लगाए थे। फिर चुनाव में हार के बाद उनके प्रति नाराजगी और भी बढ़ गई। वहीं अब विधान परिषद चुनाव में इन खास लोगों की हार के बाद सोशल मीडिया पर समाजवादी पार्टी के कई लोगों के पोस्ट नतीजे आने के बाद से वायरल हो रहे हैं। विधान परिषद के सुनील साजन आदि के फोटो के साथ लिखा है कि, 'नवरत्न स्वाहा' एक और यूजर का पोस्ट था कि, अच्छा हुआ खास भी अब आम हो गया है।

सिर्फ दो उम्मीदवार छू पाए हजार का आंकड़ा
2016 के चुनाव में इन 36 में से 31 सीटों पर जीत हासिल करने वाली समाजवादी पार्टी इस बार ज्यादातर सीटों पर लड़ाई से बाहर रही। आंकड़े बताते हैं कि विधान परिषद के इस चुनाव में 36 में से 27 सीटों पर समाजवादी पार्टी के उम्मीदवारों की जमानत जब्त हो गई जबकि 20 सीटें ऐसी थीं जहां सपा को 30 फीसदी से भी कम वोट मिले। समाजवादी पार्टी के सिर्फ 2 उम्मीदवार ही 1 हजार वोटों का आंकड़ा छू सके। आश्चर्यजनक बात यह है कि 1 हजार वोट पाने वाले दोनों उम्मीदवार राजनीति में नए हैं और पहली बार चुनाव में उतरे हैं। इनमें से एक हैं डॉ. कफील खान और दूसरी हैं गायत्री प्रजापति की बहू शिल्पी प्रजापति। पार्टी के अन्य बड़े नेताओं को 500 वोट भी नहीं मिल सके।












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