ज्ञानवापी मस्जिद विवाद: AIMPLB की एंट्री,सरकार की 'चुप्पी' पर सवाल, मुसलमानों के हक में बड़े फैसले का ऐलान

लखनऊ, 18 मई: वाराणसी की ज्ञानवापी मस्जिद विवाद में ऑल इंडिया मुस्लिम बोर्ड भी कूद गया है और इस मामले इसने इंतजामिया मस्जिद कमिटी को हर तरह की कानूनी सहायता देना का ऐलान किया है। बोर्ड केंद्र और राज्य सरकार के अलावा कथित रूप से बाकी राजनीतिक दलों के इस मसले पर अपनाए गए रवैए से मायूस है। बोर्ड ने सरकारों से इस मसले पर अपना स्टैंड साफ करने को कहा है। बोर्ड ने मंगलवार देर रात आपात बैठक बुलाकर इस संबंध कई बड़े फैसले लिए हैं। बोर्ड का आरोप है कि देश में इस समय मुसलमानों के उपासना स्थलों को कथित तौर पर निशाना बनाया जा रहा है।

एआईएमपीएलबी ने बुलाई आपात बैठक

एआईएमपीएलबी ने बुलाई आपात बैठक

ज्ञानवापी मस्जिद को लेकर जारी विवाद में अब ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) ने भी दखल दे दी है। बोर्ड के मुताबिक देश में मुसलमानों के उपासना स्थलों को कथित तौर पर निशाना बनाया जा रहा है और इसलिए इसने केंद्र और राज्य सरकार से इसपर अपना स्टैंड साफ करने को कहा है। इसके अलावा बोर्ड ने इस मामले में कई अहम फैसले भी लिए हैं। बोर्ड के एग्जक्यूटिव मेंबर कासिम रसूल इलियास ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बुधवार को बताया है कि इस मसले पर मंगलवार देर रात को इसकी वर्किंग कमिटी की इंमरजेंसी वर्चुअल मीटिंग की गई, जिसमें आगे की रणनीति पर विचार हुआ।

मुसलमानों के धर्म स्थलों को टारगेट किया जा रहा है- एआईएमपीएलबी

मुसलमानों के धर्म स्थलों को टारगेट किया जा रहा है- एआईएमपीएलबी

ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा की शाही मस्जिद ईदगाह का जिक्र करते हुए इलियास ने कहा, 'मीटिंग में इस बात पर खेद जताया गया कि देश में मुस्लिमों के उपासना स्थलों को 'टारगेट' किया जा रहा है और 1991 के धार्मिक स्थल कानून, जो कि संसद से सबकी सहमति से लागू किया गया है, उसका खुल्लम-खुल्ला 'उल्लंघन' हो रहा है।' इलियास के मुताबिक बोर्ड ने सरकारों और राजनीतिक दलों से अपना स्टैंड साफ करने की मांग करते हुए कहा है कि, 'यह बहुत ही खेद की बात है कि केंद्र सरकार और राज्य सरकारें इसपर खामोश हैं। इनके अलावा सभी राजनीतिक दल जो खुद को सेक्युलर कहते हैं वह भी चुप्पी साधे हुए हैं।'

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    'असल इरादे को सामने लाएगा बोर्ड'

    'असल इरादे को सामने लाएगा बोर्ड'

    बोर्ड ने निचली अदालतों की ओर से लिए जाने वाले फैसलों के तरीकों पर भी खेद जताया है और इलियास के मुताबिक मुस्लिम संगठन का मानना है कि अदालतों को लोगों को निराश नहीं करना चाहिए, जिससे अंतिम न्याय को लेकर उनकी उम्मीदें टूट सकती हैं। उनके मुताबिक मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने मुसलमानों से शांति बनाए रखने, हौसला बनाए रखने और बेहतर तरीके से कानूनी जंग लड़ने की अपील की है। उन्होंने कहा, 'बोर्ड ने मस्जिदों को लेकर उठाए जा रहे सारे विवादों के पीछे के असल इरादे को लोगों के सामने लाने का फैसला किया है, जिससे उन्हें गुमराह न किया जा सके।'

    राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन करने का भी फैसला

    राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन करने का भी फैसला

    यही नहीं, ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने फैसला किया है कि वह इंतजामिया मस्जिद कमिटी को सभी तरह के कानूनी सहायता उपलब्ध करवाएगा और सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान अपने वकीलों की भी मदद देगा। इसके अलावा बोर्ड ने इस मामले पर जरूरी पड़ने पर राष्ट्रव्यापी प्रदर्शन शुरू करने का भी फैसला किया है, ताकि लोगों को उपासना स्थलों को लेकर पैदा किए जा रहे कथित 'असली इरादों' के प्रति अवगत करा सकें। बोर्ड का आरोप है कि 'सच्चाई ये है कि जो कुछ हो रहा है, वह देश की एकता और अखंडता को नुकसान पहुंचाने के लिए हो रहा है।'

    सिविल सोसाइटी से भी संपर्क करेगा बोर्ड

    सिविल सोसाइटी से भी संपर्क करेगा बोर्ड

    ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड देश में मुसलमानों का एक अगुवा संगठन है। यह एक गैर-सरकारी संस्था है, जिसका गठन 1973 में भारत में मुस्लिम पर्सनल लॉ की रक्षा और निरंतर प्रासंगिकता बनाए रखने और सबसे महत्वपूर्ण 1937 के मुस्लिम पर्सनल लॉ (शरियत) ऐप्लिकेशन ऐक्ट को लेकर उपयुक्त रणनीति अपनाना है। इलियास का कहना है कि बोर्ड ने यह भी तय किया है विभिन्न धार्मिक समुदायों, धार्मिक नेताओं, सिविल सोसाइटी और सामाजिक संगठनों से भी संपर्क किया जाएगा और उन्हें कथित सच्चाई बताई जाएगी, क्योंकि यह किसी एक समुदाय का नहीं, बल्कि पूरे देश का मसला है। (एआईएमपीएलबी से जुड़ी तस्वीर फाइल)

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