जानिए कैसे?, जीएसटी का शिकार हुआ रावण
बहराइच। कहने को तो धर्म का महंगाई से कोई लेना-देना नहीं है, लेकिन सरकार की ओर से लाए गए जीएसटी बिल का असर धार्मिक आयोजनों पर भी दिखाई पड़ रहा है। जीएसटी के कारण इस बार दशहरे में रावण के आकार में कुछ कमी देखने को मिल सकती है। रावण के पुतले के निर्माण में उपयोग होने वाली सामग्रियों के महंगे होने के कारण कुछ रामलीला कमेटियां और पुतला निर्माण करने वाले कारीगर रावण के आकार को घटा सकते हैं।

उधर, मुहर्रम की तैयारी को लेकर ताजिया के सामानों में टैक्स बढ़ने से आयोजक व कारोबारियों की जेब ढीली हो रही है। पिछले साल की अपेक्षा इस बार ताजिया निर्माण में भी वृद्धि हुई है। धार्मिक आयोजनों पर भी जीएसटी के चलते मंहगाई का असर दिख रहा है। बात करें अगर दशहरा पर्व की तो प्रतिवर्ष दशहरा पर्व पर रावण, मेघनाद, कुंभकर्ण आदि के पुतले का निर्माण होता है। लंका दहन के लिए कारीकर लंका का भी निर्माण करते हैं।
आदर्श रामलीला समिति की ओर से आयोजित रामलीला कार्यक्रम में रावण का पुतला बनाने में जुटे शहर के नाजिरपुरा निवासी पप्पू, चुन्नन और हीरालाल ने बताया कि पहले मजदूरी 250 रुपये थी। लेकिन अब 400 रुपये ले रहे हैं। इसके अलावा बांस और कागज के मूल्य भी बीते वर्ष की अपेक्षा सवा से डेढ़ गुना बढ़ोतरी हो गई है। पिछले वर्ष जो पुतला बीस हजार में तैयार होता था। उसे तैयार होने में 30 से 32 हजार की लागत आ रही है। उन्होंने कहा कि पैसा रामलीला समिति अदा कर रही है। लेकिन मंहगाई के चलते कुछ न कुछ असर पुतलों की कद-काठी में जरूर हो सकता है।
लगभग यही हाल ताजिए के निर्माण का है। शहर के कबाबची गली निवासी जुबेर परंपरागत तरीके से ताजिए का निर्माण करते हैं। इस वर्ष भी वह ताजिया बना रहे हैं। 150 रुपये से लेकर 15 हजार रुपये तक की ताजिया मुहैया हैं। जुबेर ने बताया कि डिमांड के आधार पर 15 हजार से अधिक मूल्य की ताजिया का निर्माण होता है। उन्होंने कहा कि जो ताजिया पिछले वर्ष 200 रुपये में तैयार हो जाती थी। उस पर इस वर्ष 250 से 300 रुपये खर्च हो रहे हैं। इसका कारण बांस, कागज, गोंद और सजावट की सामग्रियों के मूल्य में वृद्धि है।












Click it and Unblock the Notifications