Ghaziabad Sisters Death Case: मौत से पहले तीनों बहनों ने क्या किया? पड़ोसी ने बताया खौफनाक सच, रूह कांप जाएगी
Ghaziabad Sisters Death Case: गाजियाबाद में तीन नाबालिग बहनों की एक साथ हुई दर्दनाक मौत ने पूरे देश को झकझोर कर रख दिया है। इस हृदयविदारक घटना के चश्मदीद गवाह और सबसे पहले पुलिस को सूचना देने वाले अरुण कुमार ने उस रात का आंखों देखा हाल साझा किया , जिसने इस मामले को और भी रहस्यमय और गंभीर बना दिया है।
अरुण कुमार ने पूरी घटना को अपने आंखों से देखा था। विस्तार से जानिए अरुण कुमार ने घटना के बारे में क्या-क्या बताया...

Neighbor Eyewitness Account: एक के बाद एक तीनों बहनें नीचे गिरीं
दरअसल, 4 फरवरी की देर रात करीब 2 बजे भारत सिटी के B1 टावर में रहने वाली 16 साल की निशिका, 14 साल की प्राची और 12 साल की पाखी ने फ्लैट नंबर 907 की बालकनी से एक साथ छलांग लगा दी।उनके पड़ोसी अरुण कुमार बताते हैं कि उन्हें पहले ऐसा लगा कि एक लड़की रेलिंग से नीचे उतरने की कोशिश कर रही है, लेकिन फिर वह दोबारा रेलिंग पर बैठ गई। तभी दूसरी बच्ची आई और उससे लिपट गई। इसके बाद तीसरी बच्ची दोनों को अपनी ओर खींचने लगी, लेकिन उसी पल तीनों एक साथ नीचे गिर गईं।
अरुण कुमार ने बताया, मैं तुरंत दौड़ा। सबसे पहले एंबुलेंस को कॉल किया, फिर पुलिस को सूचना दी और सोसायटी के गार्ड्स को बुलाया। उस समय मुझे बिल्कुल भी अंदाजा नहीं था कि गिरने वाली तीनों नाबालिग बहनें हैं। पूरा दृश्य मुझे पति-पत्नी और एक बच्चे जैसा ही लगा। वे पेशे से बिजनेसमैन हैं और उन्होंने पुलिस को वही जानकारी दी है, जो उन्होंने अपनी आंखों से देखी।
Ghaziabad Sisters Death Last Moments: फ्लैट के अंदर का मंजर देख पुलिस भी रह गई दंग
घटना के बाद जब पुलिस फ्लैट के अंदर पहुंची, तो वहां का दृश्य किसी क्राइम सीन से कम नहीं था। कमरे के फर्श पर परिवार की तस्वीरें बिखरी पड़ी थीं, मानो जानबूझकर उन्हें जमीन पर फेंका गया हो। पुलिस को मौके से एक सुसाइड नोट भी मिला और दीवार पर अंग्रेजी में लिखे कुछ शब्द भी पाए गए-"I AM REALLY VERY ALONE,MY LIFE IS VERY VERY ALONE, I AM VERY VERY ALONE" इन शब्दों ने इस पूरे मामले को और भी भयावह बना दिया।
डायरी में छिपा है मौत का असली सच?
पुलिस को कमरे से एक डायरी भी बरामद हुई है, जिसे इस केस की सबसे अहम कड़ी माना जा रहा है। डायरी में बच्चियों ने लिखा है कि उसमें दर्ज हर बात सच है और उसे जरूर पढ़ा जाए। फिलहाल यह डायरी पुलिस के कब्जे में है। जांच अधिकारियों का मानना है कि तीनों बच्चियों की मौत से जुड़ा असली सच इन्हीं पन्नों में छिपा हो सकता है। हालांकि, डायरी में क्या लिखा है, इस पर पुलिस ने अभी तक चुप्पी साध रखी है।
परिवार में उलझी मौत की कहानी?
इस केस का पारिवारिक पहलू भी कम चौंकाने वाला नहीं है। बच्चियों के पिता ने दो शादियां की थीं। पहली शादी के कई सालों तक बच्चे नहीं हुए, जिसके बाद उन्होंने अपनी पत्नी की छोटी बहन यानी साली से दूसरी शादी कर ली। दूसरी शादी के बाद तीन बच्चे हुए, जबकि इसी दौरान पहली पत्नी से भी दो बच्चे पैदा हो गए।
इस तरह घर में दो पत्नियां और पांच बच्चे एक साथ रह रहे थे। जिन तीन बहनों ने जान दी, उनमें से दो दूसरी पत्नी की बेटियां थीं, जबकि एक पहली पत्नी की बेटी थी। बाहर से यह परिवार पूरी तरह सामान्य दिखाई देता था, लेकिन घर के भीतर क्या चल रहा था, इसका अंदाजा किसी को नहीं था।
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि तीनों बच्चियां पिछले करीब दो साल से स्कूल नहीं जा रही थीं। बताया जा रहा है कि पढ़ाई में कमजोर होने के कारण उन्हें घर पर ही रखा गया था। पड़ोसियों के अनुसार, बच्चियां बेहद शांत स्वभाव की थीं, ज्यादा बाहर नहीं निकलती थीं और किसी को यह महसूस नहीं हुआ कि वे किसी गंभीर मानसिक दबाव से गुजर रही हैं।
50 टास्क और आखिरी दिन का शक
पुलिस की शुरुआती जांच में यह आशंका भी जताई जा रही है कि तीनों बच्चियां किसी टास्क आधारित गतिविधि या मानसिक प्रक्रिया से जुड़ी हो सकती थीं। जांच अधिकारियों के अनुसार, कुल 50 टास्क होने की जानकारी मिली है और जिस दिन यह घटना हुई, वही आखिरी टास्क का दिन बताया जा रहा है। हालांकि अभी यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह कोई संगठित ऑनलाइन गेम था या सोशल मीडिया और कंटेंट के जरिए बना कोई मानसिक दबाव।
बीच वाली बहन थी 'लीडर'?
जांच में पुलिस को शक है कि तीनों बहनों में से बीच वाली बच्ची इस पूरे घटनाक्रम में लीडर की भूमिका निभा रही थी। वही तय करती थी कि क्या करना है, कब करना है और कैसे करना है। बाकी दोनों बहनें उसी के निर्देशों पर चलती थीं। तीनों बहनें हर काम साथ करती थीं-उठना, बैठना, खाना और समय बिताना। जांचकर्ताओं का मानना है कि यह सामूहिकता भी किसी मानसिक प्रक्रिया का हिस्सा हो सकती है।
फिलहाल पुलिस हर पहलू से जांच में जुटी है। सबसे बड़ा सवाल यही बना हुआ है कि जिन बच्चियों के पास परिवार, घर और लोग थे, वे खुद को इतना अकेला क्यों महसूस कर रही थीं। इस सवाल का जवाब शायद जांच के आगे बढ़ने के साथ सामने आए।
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