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UP: कौन है ये 'लेडी सिंघम', जिसकी वर्दी पर लगा रिश्वत का दाग! एंटी करप्शन के जाल में फंसी एनकाउंटर वाली दारोगा

Ghaziabad News: कल तक जिसकी बहादुरी के किस्से पुलिस महकमे की शान बढ़ा रहे थे, आज वही चेहरा सलाखों के पीछे है। हम बात कर रहे हैं गाजियाबाद पुलिस की 'स्टार' महिला दारोगा भुवनेश्वरी सिंह की, जिन्हें कुछ समय पहले बदमाश को एनकाउंटर में ढेर करने और उसे कंधे पर उठाकर अस्पताल ले जाने के लिए 'लेडी सिंघम' का खिताब मिला था।

दारोगा मैडम अब भ्रष्टाचार के दलदल में फंसी पाई गई हैं। मेरठ एंटी करप्शन टीम ने मंगलवार को एक बड़ी कार्रवाई करते हुए भुवनेश्वरी को 45 हजार रुपये की रिश्वत लेते रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। आइए विस्तार से जानते हैं कैसे एक 'सम्मानित' अफसर भ्रष्टाचार की दलदल में फंसकर अर्श से फर्श पर आ गिरी।

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सम्मान से रिश्वतखोरी तक का सफर

23 सितंबर को सिहानी गेट क्षेत्र में हुए एक एनकाउंटर ने पूरे प्रदेश का ध्यान खींचा था। यह गाजियाबाद कमिश्नरेट का पहला ऐसा एनकाउंटर था जिसे महिला पुलिसकर्मियों की टीम ने अंजाम दिया था। इस टीम की मुख्य सदस्य भुवनेश्वरी सिंह थीं। उस दौरान एक घायल बदमाश को अपने कंधे पर लादकर ले जाते हुए उनकी फोटो खूब वायरल हुई थी।

इस बहादुरी के लिए पुलिस कमिश्नर जे. रविंद्र गौड ने उन्हें सम्मानित भी किया था। लेकिन किसे पता था कि बहादुरी का यह तमगा रिश्वत की कालिख से धुल जाएगा।

दहेज केस में राहत के बदले 'सौदा'

दरअसल, यह पूरा मामला साहिबाबाद महिला रिपोर्टिंग चौकी का है। भुवनेश्वरी सिंह प्रभारी के तौर पर तैनात थीं। मामला एक दहेज उत्पीड़न की विवेचना से जुड़ा था। वृंदावन गार्डन निवासी रामपाल सैनी के बेटे गौरव पर उसकी पत्नी ने केस दर्ज कराया था। आरोप है कि इस केस की जांच कर रही दारोगा भुवनेश्वरी ने रामपाल के परिवार के अन्य सदस्यों के नाम केस में न जोड़ने और उन्हें राहत दिलाने के बदले एक लाख रुपये की भारी-भरकम रिश्वत मांगी।

पीड़ित के गिड़गिड़ाने पर सौदा 50 हजार रुपये में तय हुआ। आखिरकार, मंगलवार को जब पीड़ित 45 हजार रुपये लेकर चौकी पहुंचा, तो दारोगा ने रकम लेकर अपनी मेज की दराज में रख ली। इसी दौरान पहले से जाल बिछाकर बैठी मेरठ एंटी करप्शन टीम ने धावा बोल दिया और रिश्वत की रकम बरामद कर भुवनेश्वरी को रंगे हाथ पकड़ लिया लिया।

कानपुर में भी लग चुके हैं आरोप

जांच में यह चौंकाने वाला तथ्य भी सामने आया है कि भ्रष्टाचार से भुवनेश्वरी का नाता पुराना है। सूत्रों के मुताबिक, साल 2022 में जब वह कानपुर में तैनात थीं, तब एक सेक्स रैकेट के मामले में पकड़े गए व्यापारियों से 15 लाख रुपये मांगने के आरोप में उन्हें 50 हजार की रिश्वत के साथ गिरफ्तार किया गया था। पुराने दागों के बावजूद वह फिर से फील्ड पोस्टिंग पाने में कामयाब रहीं और अब एक बार फिर रिश्वत कांड ने उनके करियर पर बड़ा सवालिया निशान लगा दिया है।

साहिबाबाद थाने में FIR

रिपोर्ट्स के मुताबिक, एसीपी साहिबाबाद श्वेता यादव ने पुष्टि की है कि आरोपी महिला दारोगा के खिलाफ साहिबाबाद थाने में भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम के तहत रिपोर्ट दर्ज कर ली गई है। इस गिरफ्तारी के बाद गाजियाबाद पुलिस महकमे में हड़कंप मचा हुआ है। जिस अधिकारी को पुलिस की छवि सुधारने के लिए 'आइकन' की तरह पेश किया गया था, उसके इस कृत्य ने विभाग को भारी शर्मिंदगी झेलने पर मजबूर कर दिया है।

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