यूपी में डेढ़ महीने से खाली हैं एमएलसी की चार सीटें, जातियों का संतुलन साधने में अटकी है भाजपा
लखनऊ, 20 अगस्त: उत्तर प्रदेश में पांच जुलाई को ही विधान परिषद सदस्य (MLC) की चार सीटें खाली हुईं थीं लेकिन डेढ़ महीने से उपर बीत जाने के बाद भी भारतीय जनता पार्टी (BJP) चार नाम नहीं तय कर पायी है। बताया जा रहा है कि एमएलसी सीटों को लेकर भाजपा का आलाकमान जातीय संतुलन साधने में अटका हुआ है। विधानसभा चुनाव सात महीने दूर है और पार्टी ओबीसी, ब्राह्मण और अनुसूचित जाति और जनजाति का समीकरण साधने में अटकी हुई है। पार्टी के सूत्रों के मुताबिक सारा मामला जातीय संतुलन साधने पर ही अटका है वहीं जो नामों का पैनल भेजा गया है उसपर सभी नेताओं की सहमति नहीं बन पा रही है।

भाजपा के सूत्रों ने बताया कि एमएलसी सीटों को लेकर जातिय संतुलन का पेच फंसा हुआ है। इन चारों सीटों का हालांकि मनोनय राज्यपाल को करना है लेकिन उन्हें अभी भी सरकार की तरफ से नाम भेजे जाने का इंतजार है। भाजपा के सूत्रों के मुताबिक इसी अंदरुनी खींचतान के बीच गुरुवार को दिल्ली में यूपी और केंद्र के शीर्ष नेताओं के बीच बैठक हुई थी। इस बैठक में निषाद पार्टी के चेयरमैन संजय निषाद को भी बुलाया गया था। ऐसा माना जा रहा है कि पार्टी ने निषाद को तोहफा देने का मन बना लिया है।
जातीय संतुलन साधने में अटका आलाकमान
उत्तर प्रदेश में एमएलसी की सीटों को लेकर भाजपा के अंदरखाने काफी जोर आजमाइश चल रही है। ओबीसी, अपर कास्ट और अनुसूचित जाति के नामों को लेकर पेंच फंसा हुआ है। पार्टी के एक सूत्र ने बताया कि सीटों पर दावेदारी को लेकर स्थिति एक अनार सौ बीमार वाली है। सीटें केवल चार है और दावेदार कई हैं जो लखनऊ से लेकर दिल्ली का चक्कर पिछले एक महीने से लगा रहे हैं। दावेदारों में कुछ नाम ऐसे भी हैं जो धनबल के बल पर सदन में पहुंचना चाहते हैं। नामों का संशय इस कदर बना हुआ है कि कोई भी अपने आपको सेफ जोन में नहीं पा रहा है।

पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी को लेकर भी संशय में शीर्ष नेतृत्व
दरअसल एमएलसी की रेस में जो नाम आगे हैं उनमें जितिन प्रसाद, पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी का नाम शामिल हैं। हालांकि इन दो नामों को लेकर यह भी पेंच फंसा है कि चार सीटों में ही दो ब्राह्मण चेहरों को जगह देना उचित होगा या किसी एक का समायोजन कर दूसरी सीट पर दूसरी जातियों को साधा जाए। दोनों चहरे यूपी की राजनीति के लिए बड़े हैं। लक्ष्मीकांत वाजपेयी जहां बीजेपी के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष रह चुके हैं और 2014 के लोकसभा चुनाव के दौरान उन्होंने पार्टी को यूपी में तब संजीवनी देने का काम किया था जब यूपी में पार्टी सत्ता से बाहर थी। दुर्भाग्य से भाजपा की लहर में भी वह 2017 में चुनाव हार गए। बताया जा रहा है कि ब्राह्मण चेहरे के तौर पर वाजपेयी संघ की पहली पसंद हैं। इससे पार्टी और संघ पश्चिमी यूपी में एक संदेश भी देना चाहती है।

जितिन प्रसाद को भी इगनोर नहीं कर सकती बीजेपी
वहीं दूसरी ओर कांग्रेस से भाजपा में शामिल हुए जितिन प्रसाद भी पूर्व केंद्रीय मंत्री रह चुके हैं और यूपी की राजनीति के लिए बड़ा नाम है। भाजपा में शामिल होने के बाद से ही लगातार इस बात की अटकलें लगायी जा रही हैं कि उन्हें एमएलसी बनाकर सरकार में मंत्री बनाया जा सकता है लेकिन अभी तक उनको बीजेपी की तरफ से इनाम नहीं मिला है। भाजपा के सूत्र बताते हैं कि पार्टी इस बात को समझती है कि जितिन प्रसाद भी विधानसभा चुनाव के लिहाज से सही साबित हो सकते हैं। उनके कद का ही असर था कि पिछले दिनों लखनऊ के बीजेपी कार्यालय में जब नड्डा मंत्रियों और सांसदों की बैठक ले रहे थे तब जितिन प्रसाद को भी इस बैठक में बुलाया गया था जबकि वह इसमें आने के लिए अपेक्षित नहीं थे। स्वयं नड्डा ने भी जितिन से यूपी का फीडबैक लिया था।
अपने आपको टिकट की रेस में होने का दावा करने वाले पार्टी के एक सदस्य ने कहा,
'' संघ की समन्यव बैठक में भी एमएलसी के नामों पर चर्चा हुई थी। लेकिन सहमति नहीं बन पाई थी। सारा मामला जातिय संतुलन पर ही अटका है लेकिन कुछ दावेदार ऐसे भी हैं जो अकूत पैसा खर्च करना चाहते हैं। अब देखना है कि पार्टी क्या फैसला लेती है। पार्टी में लगभग दो दशक से काम कर रहा हूं लेकिन सीटों को लेकर इस तरह का अंदरुनी घमासान कभी देखने को नहीं मिला।''
सीएम योगी के पसंद पर भी बात अटकी
दरअसल हाल ही में मोदी मंत्रिमंडल में कैबिनेट के विस्तार के समय यूपी के सात मंत्रियों को जगह दी गई थी। अंदरखाने ऐसी चर्चा है कि विस्तार के समय सीएम योगी अपनी पसंद के अनुसार यूपी के कुछ लोगों को मंत्री बनाना चाहते थे लेकिन तब केंद्रीय नेतृत्व ने उनकी बात नहीं मानी थी और विस्तार में केवल मोदी की ही चली। योगी चाहकर भी मंत्रिमंडल में अपने लोगों को शामिल नहीं करा पाए। लेकिन इस बार एमएलसी की सीटों में कुछ नामों को लेकर उन्होंने आपत्ति जाहिर की है जिसपर शीर्ष नेतृत्व ही फैसला लेगा।
हालांकि प्रदेश प्रवक्ता हरीश श्रीवास्तव ने कहा कि एमएलसी के नामों का चयन शीर्ष नेतृत्व का विषय है। इसको लेकर कुछ भी कहना सही नहीं होगा। नेतृत्व को जैसा उचित लगेगा वैसा कदम उठाएगा।












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