पुर्जी पर लिखकर लगवाते थे नौकरी, विधायक रहे दद्दा आज भी हैं याद

अहरौरा-राबर्टसगंज से विधायक रहे विद्यानिवास मिश्र उर्फ दद्दा को आज भी लोग याद करते हैं। वो पुर्जी लिखकर काबिल लोगों की नौकरियां लगवाते थे।

मिर्जापुर। आज के दौर में जहां नौकरी के लिए परेशान होना पड़ता है। नौकरी के लिए काबिलियत होने के बाद भी डोनेशन देना पड़ता है। साथ ही सोर्स लगाना पड़ता है, सो अलग। पर एक जमाना था जब काबिल व्यक्ति को नौकरी सिर्फ विधायक विद्याभूषण मिश्र उर्फ ग्रामवासी दद्दा के चुटके से मिल जाया करती थी।

काबिल लोगों को लगवाते थे नौकरी

काबिल लोगों को लगवाते थे नौकरी

विद्याभूषण मिश्र उर्फ ग्रामवासी दद्दा मिर्जापुर जिले के पहले 1952 में अहरौरा-राबर्टसगंज से विधायक होने के साथ स्वतंत्रता सेनानी भी थे। जो घूमते-फिरते लोगों से काबिलियत जानकर झोले से कागज निकाल कर चुटका थमाकर नौकरी लगावा देते थे।

तब और अब का फर्क

तब और अब का फर्क

उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव में जहां लाखों रुपये पार्टियां मेनिफेस्टो जारी करने में लगा दे रही हैं। चुनाव प्रचार में करोड़ों खर्च कर लोगों से विकास, रोजगार आदि के वादे कर रही है। ऐसे में राजनीति के उन दिग्‍गजों को नहीं भुलाया जा सकता जो कम पैसे में, यहां तक की चंदा लगाकर सादगी से चुनाव लड़ते थे। विकास का काम भी करते थे। उन राजनीति के पुरोधाओं के कराये गये विकास कार्य आज धरोहर बन गये है।

मुफलिसी में जी रहा ग्रामवासी दद्दा का परिवार

मुफलिसी में जी रहा ग्रामवासी दद्दा का परिवार

अब एमपी व एमएलए बनने के बाद नेता करोड़ों को संपति अर्जित कर लेते है। एक तरह से विधायक, सांसद बनने वाले नेताओं का परिवार संपन्न हो जाता है, भले ही जनता व समाज पिछड़ा रह जाये। लेकिन विधायक रहे ग्रामवासी दद्दा का परिवार आज भी मुफलिसी के दौर में जी रहा है। नगर के इमरती रोड स्थित मकान में उनकी प्रिंटिंग मशीन तब भी चलती थी, अब भी उनका पोते उसे चला रहा है।

पुराने लोगों के जेहन में आज भी ताजा हैं उनके किस्से

पुराने लोगों के जेहन में आज भी ताजा हैं उनके किस्से

ग्रामवासी दद्दा के विधायकी के कार्यकाल के किस्से आज भी पुराने लोगों को याद हैं। साहित्यकार व वरिष्ठ नागरिकों ने बताया कि कि ग्रामवासी दद्दा ने यदि कागज पर चुटका लिखकर दे दिया तो समझो नौकरी पक्की हो गयी। वे झोला में कागजों का ढेर लेकर पूरे क्षेत्र में भ्रमण करते थे। इस दौरान किसी से मिलने पर ग्रामवासी दद्दा पूछते थे कि कितना पढ़े हो। जवाब मिलने पर पूछते थे कि नौकरी करोगे। जवाब हां में मिलने पर कागज का चुटका निकालकर विभाग का नाम लिखकर दस्तखत कर देते थे। वहां जाने पर उसको नौकरी पर रख लिया जाता था।

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