Firozabad में बैंक लॉकर से करोड़ों का सोना कैसे गायब? BOI ब्रांच मैनेजर समेत 3 पर FIR, पूछताछ में क्या उगला?
Firozabad Bank Locker Gold Fraud: उत्तर प्रदेश के फिरोजाबाद जिले से बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल खड़े करने वाला एक बड़ा मामला सामने आया है। बैंक ऑफ इंडिया की भरौल शाखा के लॉकर से ग्राहकों द्वारा गोल्ड लोन के बदले गिरवी रखा गया सोना रहस्यमय तरीके से गायब हो गया। बैंक अधिकारियों की शिकायत पर पुलिस ने तत्कालीन शाखा प्रबंधक समेत तीन कर्मचारियों के खिलाफ मामला दर्ज कर जांच शुरू कर दी है।
प्रारंभिक जांच में पता चला है कि लॉकर से सोने के कुल 96 पैकेट गायब हैं। हालांकि, अभी तक गायब सोने का सटीक वजन और कीमत सार्वजनिक नहीं की गई है, लेकिन बैंक अधिकारियों को आशंका है कि इसकी कीमत करोड़ों रुपये में हो सकती है।

कर्मचारी के अचानक गायब होने से पैदा हुआ शक
पुलिस के अनुसार, मामले का खुलासा तब हुआ जब शाखा में लॉकर संचालन से जुड़े कर्मचारी दिलीप कुमार अचानक बिना सूचना के अनुपस्थित हो गए। दिलीप कुमार बैंक में चाबी के कस्टोडियन की भूमिका निभा रहे थे और लॉकर से जुड़े महत्वपूर्ण कार्यों की जिम्मेदारी उनके पास थी।
बताया जा रहा है कि 27 मई के बाद से वह लगातार गैरहाजिर रहे और बैंक अधिकारियों से भी उनका कोई संपर्क नहीं हो पाया। कई बार संपर्क करने के बावजूद जब कोई जवाब नहीं मिला तो शाखा प्रशासन को संदेह हुआ। इसके बाद पूरे मामले की जानकारी बैंक ऑफ इंडिया के आगरा क्षेत्रीय कार्यालय को भेजी गई।
क्षेत्रीय कार्यालय की टीम ने की जांच
मामले की गंभीरता को देखते हुए बैंक के क्षेत्रीय कार्यालय ने जांच के लिए एक विशेष टीम गठित की। 15 जून को वरिष्ठ सुरक्षा प्रबंधक अंकित और घिरोर शाखा के वरिष्ठ प्रबंधक (सुरक्षा) सुशील कुमार को भरौल शाखा भेजा गया।
अधिकारियों ने सबसे पहले लॉकर की स्थिति का निरीक्षण किया। चूंकि संबंधित कर्मचारी अनुपस्थित था, इसलिए बैंक को डुप्लीकेट चाबी का इंतजाम करना पड़ा। पूरी प्रक्रिया को कानूनी रूप से पारदर्शी बनाने के लिए बैंक के पैनल अधिवक्ता शिव कुमार शर्मा को भी मौके पर बुलाया गया।
वीडियो रिकॉर्डिंग के बीच खोला गया लॉकर
बैंक अधिकारियों ने लॉकर खोलने की पूरी प्रक्रिया की वीडियो रिकॉर्डिंग कराई ताकि भविष्य में किसी प्रकार का विवाद न हो। पैनल वकील और बैंक अधिकारियों की मौजूदगी में जब लॉकर खोला गया तो सभी हैरान रह गए।
जांच में पाया गया कि गोल्ड लोन से जुड़े 96 पैकेट लॉकर से गायब थे। ये वही पैकेट थे जिन्हें ग्राहकों ने बैंक से ऋण लेने के बदले सुरक्षा के तौर पर जमा कराया था। सोने के इतने बड़े स्तर पर गायब होने की जानकारी मिलते ही बैंक प्रशासन में हड़कंप मच गया और तत्काल पुलिस को सूचित किया गया।
तीन बैंक कर्मचारियों के खिलाफ दर्ज हुई FIR
मामले में बैंक ऑफ इंडिया के आगरा क्षेत्रीय कार्यालय के चीफ मैनेजर आदित्य प्रताप सिंह ने अरांव थाने में औपचारिक शिकायत दर्ज कराई। शिकायत के आधार पर पुलिस ने तीन बैंक कर्मचारियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की है। इनमें भरौल शाखा के तत्कालीन शाखा प्रबंधक संदीप यादव, स्टाफ ऑफिसर एवं चाबी कस्टोडियन दिलीप कुमार तथा क्रेडिट ऑफिसर/स्टाफ ऑफिसर नरेश कुमार शामिल हैं। पुलिस ने तीनों के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (BNS) की धारा 316(5) के तहत मामला दर्ज किया है, जो आपराधिक विश्वासघात से संबंधित है।
करोड़ों रुपये के नुकसान की आशंका
एफआईआर में गायब सोने का कुल वजन और अनुमानित बाजार मूल्य दर्ज नहीं किया गया है। हालांकि बैंक अधिकारियों का मानना है कि 96 पैकेटों में रखा गया सोना बड़ी मात्रा में हो सकता है और उसकी कीमत करोड़ों रुपये तक पहुंच सकती है।
विशेषज्ञों का कहना है कि गोल्ड लोन में आमतौर पर ग्राहकों द्वारा जमा कराए गए आभूषण और सोना बैंक की सुरक्षित अभिरक्षा में रखा जाता है। ऐसे में इतनी बड़ी संख्या में पैकेटों का गायब होना बैंकिंग सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करता है।
कई टीमों को जांच में लगाया गया
फिरोजाबाद पुलिस ने मामले को गंभीर आर्थिक अपराध मानते हुए जांच शुरू कर दी है। पुलिस अधिकारियों के मुताबिक आरोपियों की तलाश के लिए कई टीमें गठित की गई हैं।
स्थानीय पुलिस के साथ-साथ सर्विलांस यूनिट को भी जांच में शामिल किया गया है। संदिग्धों के मोबाइल फोन, बैंकिंग गतिविधियों और हाल की लोकेशन की जांच की जा रही है।
पुलिस टीमों ने आरोपियों के संभावित ठिकानों पर छापेमारी भी शुरू कर दी है। जांच एजेंसियां यह पता लगाने की कोशिश कर रही हैं कि सोना कब और कैसे लॉकर से बाहर निकाला गया तथा क्या इस मामले में अन्य लोग भी शामिल हैं।
बैंकिंग सुरक्षा पर उठे सवाल
यह घटना ऐसे समय सामने आई है जब बैंकों में ग्राहकों की जमा संपत्तियों की सुरक्षा को लेकर लगातार भरोसा जताया जाता है। गोल्ड लोन के तहत ग्राहक अपने कीमती आभूषण और सोना बैंक के भरोसे जमा कराते हैं।
ऐसे में करोड़ों रुपये मूल्य के सोने का कथित रूप से गायब हो जाना बैंकिंग सुरक्षा तंत्र और आंतरिक निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि शुरुआती स्तर पर निगरानी मजबूत होती तो इतनी बड़ी अनियमितता समय रहते पकड़ में आ सकती थी।
जांच के बाद सामने आएगी पूरी सच्चाई
फिलहाल पुलिस और बैंक प्रशासन दोनों मामले की गहन जांच में जुटे हैं। अधिकारियों का कहना है कि जांच पूरी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि सोना किस परिस्थिति में गायब हुआ, इसमें किन लोगों की भूमिका रही और ग्राहकों को हुए संभावित नुकसान की वास्तविक मात्रा क्या है।
पुलिस का दावा है कि आरोपियों का जल्द पता लगाकर गायब सोने की बरामदगी का प्रयास किया जा रहा है। वहीं बैंक प्रशासन भी मामले की आंतरिक जांच कर रहा है ताकि किसी भी स्तर पर हुई लापरवाही या साजिश की पूरी तस्वीर सामने लाई जा सके।












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