फर्जी अफसर बनकर DM को धमकाया, फेल बेटे को कराया पास, अरेस्ट

पड़ताल में पता चला की पकड़ा गया सीबीआई एसपी बिजली विभाग में तृतीय श्रेणी कर्मचारी है। उसने जिले के मुखिया डीएम से लेकर तमाम अधिकारियों को धमकाना और खेल खेलना शुरू कर दिया था।

इलाहाबाद। फैजाबाद में फर्जी महिला दारोगा की गिरफ्तारी के बाद एक और फर्जी अधिकारी पकड़ा गया है लेकिन इस बार कोई आम अधिकारी नहीं पकड़ा गया। बल्कि खुद को सीबीआई का एसपी बताने वाला फ्रॉड पकड़ा गया है। पड़ताल में पता चला की पकड़ा गया सीबीआई एसपी बिजली विभाग में तृतीय श्रेणी कर्मचारी है । उसने जिले के मुखिया डीएम से लेकर तमाम अधिकारियों को धमकाना और खेल खेलना शुरू कर दिया था।

फर्जी CBI अफसर बनकर DM को धमकाता था बिजली विभाग का कर्मचारी

ऐसे बना शातिर
पुलिस के अनुसार इलाहाबाद के रसूलाबाद की ईडब्लूएस कालोनी में रहने वाला सुभाष चंद्र श्रीवास्तव अधिशासी अभियंता पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड कार्यालय में लिपिक पद पर कार्यरत है। वैसे तो उसका मूल घर जौनपुर के मुगरा बादशाहपुर लौह गांव में है लेकिन अब वह यहीं रहता है। कुछ साल पहले सुभाष का बेटा एपीजे अब्दुल कलाम टेक्निकल विश्वविद्यालय में फेल हो गया। बेटे को पास कराने के लिये उसने वाइस चांसलर और परीक्षा नियंत्रक को फोन किया और खुद को सीबीआई एसपी बताकर फेल बेटे को पास कराने लिया। यहीं से उसका शातिर दिमाग काम करने लगा। उसने सोचा कि इस तरह तो वह बहुत काम करा सकता है। फिर क्या था वह आये दिन अपने काम फर्जी तरीके से बनाने लगा। बीच में उसने खुद को विद्युत विभाग का उप महाप्रबंधक बताकर विभाग में भी अपने लिये सुविधाएं पैदा कर ली और अपनी मनमानी करने लगा।

कर बैठा गलती
सुभाष को यह पूरा विश्वास था कि इलाहाबाद पुलिस प्रशासन सीबीआई के संपर्क में नहीं रहती और इसी गलतफहमी में वह गलती करने बैठा। सुभाष ने नजूल की भूमि को फ्री होल्ड कराने के लिए इस बार शहर के मुखिया यानी डीएम को ही फोन लगा दिया। 29 अगस्त की शाम पहली कॉल उसने डीएम के सीयूजी मोबाइल नंबर पर की। डीएम के अर्दली जगपाल ने फोन रिसीव किया तो सुभाष ने बताया कि वह पीके श्रीवास्तव, सीबीआई लखनऊ का एसपी बोल रहा है। सकपकाये अर्दली ने पूरी बात सुनी पर व्यस्तता के कारण वह डीएम से बात नहीं करा सका। डीएम को भी अर्दली ने यह बात बतायी। अगले दिन कैंप कार्यालय के लैंड लाइन व उसके बाद डीएम के सीयूजी नंबर पर फिर से सुभाष ने फोन किया और फोन उठाने वाले फटकार लगाते हुये कहा कि डीएम को बोलो की बात करे ।

जांच में फंसा
डीएम ने लखनऊ सीबीआई दफ्तर फोन कराया तो पता चला कि वहां कोई पीके श्रीवास्तव नहीं है। मामले की जानकारी एसटीएफ को दी गई । डीएम के अर्दली ने फोन नंबर और पीके के खिलाफ कर्नलगंज थाने में मुकदमा दर्ज कराया। एसटीएफ ने इलाहाबाद में गोपनीय जांच शुरू कर दी। सुभाष के मोबाइल और लोकेशन ट्रेस हुई । तो इलाहाबाद के सृजन नर्सिंगहोम के पास उसे एसटीएफ ने उसे गिरफ्तार कर लिया।

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