मऊ से जीते सभी BJP विधायकों कि प्रोफाइल में है दम, मंत्री बनने का देख रहे हैं ख्वाब
मऊ की घोसी सीट से पूर्व राजस्व मंत्री फागू चौहान, मुहम्मदाबाद गोहना सीट से श्रीराम सोनकर और मधुबन सीट से पूर्व सांसद दारा सिंह चौहान भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर एक दूसरे को ही कड़ी टक्कर दे रहे हैं।
मऊ। उत्तर प्रदेश में भाजपा को पूर्ण बहुमत मिलने के बाद अब सरकार में मुख्यमंत्री और मंत्री बनने के लिए विधायक जोर आजमाइश कर रहे हैं। वहीं उत्तर प्रदेश के मऊ जिले की बात करें तो यहां पर चार में से तीन सीट भाजपा की झोली में आई। एक सीट पर बाहुबली मुख्तार अंसारी ने जीत दर्ज की। मऊ की घोसी सीट से पूर्व राजस्व मंत्री फागू चौहान, मुहम्मदाबाद गोहना सुरक्षित सीट से श्रीराम सोनकर और मधुबन सीट से पूर्व सांसद दारा सिंह चौहान भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर अब मंत्री बनने की रेस में शामिल हो गए हैं।


मधुबन सीट से 26 हजार के भारी अंतर से जीतकर विधायक बने दारा सिंह चौहान कई बार राज्य सभा के सदस्य रह चुकें हैं। एक बार बसपा के टिकट पर घोसी लोकसभा सीट से संसद पहुंचे और बसपा के संसदीय दल के नेता भी रहे। इसके अलावा वर्तमान में भाजपा पिछड़ा वर्ग मोर्चा के राष्ट्रीय अध्यक्ष भी हैं। वहीं मुहम्म्दाबाद गोहना सुरक्षित सीट से विधायक बने श्रीराम सोनकर और घोसी से विधायक बने फागू चौहान भी पहले कि सरकारों में मंत्री रह चुकें हैं। दोनों का कार्यकाल काफी अच्छा और बेदाग रहा है। विधानसभा चुनाव में भाजपा ने पिछड़ी जाति से भी जमकर वोट हासिल किए हैं। इसको देखते हुए जिले के तीनों विधायक मंत्री की रेस में शामिल हैं।
दारा सिंह चौहान ने कहा कि मंत्री कौन बनेगा इसको शीर्ष नेतृत्व तय करेंगा। शीर्ष नेतृत्व कब, किसको, कहा और किस रूप में उपयोग में लाना है ये निर्णय उसका है। हालांकि मैं वर्ष 1996 से 2006 तक लगातार राज्यसभा सदस्य रहा हूं। इसके बाद साल 2009 में घोसी लोकसभा से चुनाव जीतकर बसपा की तरफ से सदन में संसदीय दल का नेता रहा हूं।

इसी क्रम में मुहम्मदाबाद गोहना सुरक्षित सीट से विजयी श्रीराम सोनकर ने कहा कि वो साल 1997 में भाजपा की सरकार और कल्याण सिंह के मंत्रीमंडल का हिस्सा रहे हैं। उन्हें राष्ट्रीय एकीकरण व कल्चरल मंत्रालय मिला था। उन्होंने कहा कि उनका कार्यकाल स्वर्णिम के साथ बेदाग रहा। साथ ही उनकी दावेदारी खटिक कोटे से है। उन्होंने कहा कि जब संघर्षों में उनका समाज रहता है तो मंत्री बनने के दौरान क्यों पीछे रहेंगा।

घोसी विधानसभा से विजयी फागू चौहान ने कहा कि किसकी इच्छा नहीं होती कि वो मंत्री बने। लेकिन सब चाहने पर तो नहीं होता है। फागू चौहान 1997 में कल्याण सिंह के मंत्रीमंडल के बाद वर्ष 2002 में बसपा और भाजपा के सहयोग से बनी सरकार में भी मंत्री रहे हैं। इसके बाद साल 2007 के बसपा की सरकार में राजस्व मंत्री का मंत्रालय बेदाग रहते हुए संभाल चुके हैं।












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