नसीम के इश्क में पिंकी बनी आयशा, 2 साल बाद खौफनाक अंजाम
पिंकी और नसीम ने कोर्ट मैरिज की थी। शादी के तुरंत बाद दोनों विशाखापत्तनम चले गए। वहां जाकर पिंकी ने इस्लाम धर्म अपना लिया और अपना नाम बदलकर आयशा रख लिया।
मुजफ्फरनगर। अलग-अलग धर्म में शादी करने का अंजाम इतना खौफनाक होगा, नसीम और पिंकी ने ये कभी सपने में भी नहीं सोचा होगा। अपने लाडले का जन्मदिन मनाने की खुशी पिंकी के लिए सुहाग खोने के मातम में बदल गईं। घटना मुजफ्फरनगर के गांव भोखरहेड़ी की है, जहां हत्यारों ने नसीम को बेरहमी से पीटने के बाद उसकी गोली मारकर हत्या कर दी।

अलग धर्म में शादी का खौफनाक अंजाम
नसीम खान और पिंकी कुमारी की मुलाकात स्कूल के दिनों में हुई थी। उम्र के साथ-साथ प्यार आगे बढ़ा और दोनों ने शादी करने का फैसला कर लिया। घरवालों ने जब दोनों की शादी कराने से इंकार कर दिया तो नसीम और पिंकी ने उनकी मर्जी के खिलाफ जाकर शादी कर ली। घरवालों से जान का खतरा हुआ तो मुजफ्फरनगर से जाकर दोनों विशाखापत्तनम में बस गए। विशाखापत्तनम में ही पिछले साल 17 जुलाई को पिंकी ने एक बेटे को जन्म दिया, जिसका नाम दोनों ने अब्दुल्ला रखा।

ईद मनाने गांव लौटे थे पति-पत्नी
पिछले महीने ईद पर नसीम और पिंकी यह सोचकर अपने गांव लौटे कि त्योहार अपने घर पर ही मनाएंगे। बीते सोमवार को बेटे अब्दुल्ला का जन्मदिन था। नसीम दोपहर में अपने बेटे का बर्थडे केक लेने बाजार के लिए निकला और फिर कभी लौटकर वापस नहीं आया। केक लेकर लौटते वक्त रास्ते में उसे लाठियों से पीटा गया और उसके बाद गोली मारकर उसकी हत्या कर दी गई।

पिंकी के घरवाले थे शादी के खिलाफ
पिंकी ने बताया, 'हम दोनों पड़ोसी थे और स्कूल में साथ-साथ पढ़ते थे। कुछ साल पहले मेरे घरवालों को हम दोनों के बारे में पता चला तो उन्होंने मुझे कमरे में बंद कर दिया और मेरे भाई ने मेरी पिटाई की। मेरे घरवाले किसी और से मेरी शादी करवाना चाहते थे।' 2015 में जब पिंकी की उम्र 18 साल हो गई तो उसने घर छोड़कर नसीम के साथ अपना संसार बसा लिया।

नाम बदलकर पिंकी बनी आयशा
पिंकी और नसीम ने कोर्ट मैरिज की थी। शादी के तुरंत बाद दोनों विशाखापत्तनम चले गए। वहां जाकर पिंकी ने इस्लाम धर्म अपना लिया और अपना नाम बदलकर आयशा रख लिया। दो साल तक दोनों विशाखापत्तनम में ही रहे। पिंकी ने बताया, 'शुरुआत में मेरे माता-पिता और भाई को मेरे ससुराल वाले धमकी देते थे। गांव के दूसरे लोगों के जरिए वो अलग-अलग तरीके से धमकी भिजवाते थे। धमकियों के कारण ही हमने सभी त्योहार अपने घर से दूर मनाए।'

बेटे के जन्मदिन पर ही लौटना था वापस
जैसे-जैसे समय गुजरा, धमकियां आनी बंद हो गईं। मियां-बीवी ने फैसला किया कि इस बार ईद अपने गांव जाकर ही मनाएंगे। दोनों ईद से एक दिन पहले 25 जून को मुजफ्फरनगर लौट आए। ईद मनाकर कुछ दिन बाद ही दोनों को वापस विशाखापत्तनम लौटना था, लेकिन फिर तय हुआ कि बेटे अब्दुल्ला का पहला जन्मदिन भी वो अपने गांव में ही मनाएंगे। जन्मदिन मनाकर उसी दिन दोनों वापस विशाखापत्तनम जाना चाहते थे।

पहले लाठियों से किया हमला
14 वर्षीय चचेरे भाई नजर मोहम्मद ने बताया कि सोमवार को हमले के वक्त वो नसीम के साथ ही था। दोनों मोटरसाइकिल से बेटे के जन्मदिन के लिए केक लेने गए थे। इसी दौरान दोपहर करीब 1 बजे ईंख के खेतों में छिपे एक युवक ने नसीम पर लाठी से हमला किया। इसके बाद तीन और लोग वहां आ गए और नसीम की बाइक को रोकने के लिए उसके आगे एक साइकिल गिरा दी।

गोली मारकर ली नसीम की जान
नजर मोहम्मद ने बताया कि पहले उन लोगों ने नसीम को लाठियों से पीटा। इसके बाद जैसे ही शोर मचा और लोग उसे बचाने के लिए दौड़े, उन लोगों ने नसीम पर गोलियां चला दी। एक गोली नसीम के पेट में लगी और एक सिर में। भीड़ नजदीक आते देख हमलावर मौके से भाग गए। नजर मोहम्मद ने जब नसीम के पास जाकर देखा तो उसकी मौत हो चुकी थी।

फोन पर कहा, तुम्हें भी मार दूंगा
पिंकी ने बताया कि सोमवार को जैसे ही उसे उसके पति की मौत की खबर मिली, उसने अपने भाई को फोन किया। पिंकी के मुताबिक, 'मैंने अपने भाई से पूछा कि उसने मेरे पति की जान क्यों ली? मेरे पति की आखिर क्या गलती थी। मैं अपना घर छोड़कर उसके साथ भागी थी। मैंने उससे पूछा कि मेरे पति की हत्या करते हुए उसने मेरे एक साल के बेटे के बारे में भी नहीं सोचा। उसने मुझे धमकी दी कि वो मुझे और मेरे बेटे को भी मार देगा। मैं उन्हें जेल की सलाखों के पीछे देखना चाहती हूं।' घटना के बाद से ही पिंकी के मायके में घर पर ताला लगा हुआ है।

पुलिस ने दर्ज किया मामला
नसीम के परिजनों की शिकायत पर पुलिस ने पिंकी के पिता राजेश, भाई प्रदीप, चचेरे भाई सोनू और एक अन्य रिश्तेदार नीटू के खिलाफ आईपीसी की धारा 302, 147, 148, 159 और 506 के तहत मामला दर्ज कर लिया है। मुजफ्फरनगर के एसपी अजय कुमार सहदेव ने बताया कि चारों आरोपियों के खिलाफ केस दर्ज कर लिया गया। आरोपी फिलहाल फरार हैं, लेकिन जल्द ही उन्हें गिरफ्तार कर लिया जाएगा।'

कैसा है मुजफ्फरनगर का ये गांव
भोखरहेड़ी के लोगों ने बताया कि इस गांव में पहले कभी इस तरह की घटना नहीं घटी। गांव के जिस पुलिस थाने में घटना की एफआईआर दर्ज हुई है, उसके दाईं तरफ एक मंदिर है और बाईं तरफ एक मस्जिद। गांव में रहने वाले अतीक खान ने बताया कि 2013 में जब मुजफ्फरनगर में दंगे हुए और करीब 50 लोग इन दंगों की भेंट चढ़ गए, तब भी इस गांव में किसी तरह का कोई तनाव का माहौल देखने को नहीं मिला।












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