कम अंतर से हारी हुई सीटों पर हर दल अपना रहे अलग-अलग रणनीति, जानिए किसका क्या है गेम प्लान
लखनऊ, 18 जनवरी: उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनाव की तैयारियों में हर दल जुटा हुआ है। इस सियासी समर में सभी राजनीतिक दल ऐसी सीटों पर फोकस कर रहे हैं जहां काम अंतर से हार मिली हो। सभी पार्टियों की अपनी अपनी तैयारिया हैं तो अपने अपने दावे भी हैं। लेकिन एक बात तो तय है की समाजवादी पार्टी, बीएसपी और बीजेपी तीनो ही पार्टियां काम अंतर से हारी हुई सीटों पर पूरी तरह से फोकस कर रही हैं। बीजेपी तो 2020 से ही अपने इस मिशन में जुटी हुई है। सभी दलों को लग रहा है कि जिस भी पार्टी ने कम अंतर वाली सीटों पर अपनी गणित पुख्ता कर ली उसका प्रदर्शन निश्चित तौर पर बेहतर रहेगा।

कम अंतर से जीती सीटों पर बीएसपी किबखास तैयारी
विधानसभा चुनाव में धौलाना सीट पर बीएसपी उम्मीदवार ने पिछली बार बीजेपी को पटखनी दी थिबलेकिन वोटों का अंतर 5 हजार वोटों से कम था। इसी तरह मांट से बीएसपी ने आरएलडी को हराया था। आरक्षित सीट सिधौली पर भी बीएसपी ने सपा को हराया था। वहीं चिल्लू पार में मामूली अंतर से बीजेपी उम्मीदवार बीएसपी से हार गई थी। बीएसपी इस तरह की सीटों पर खास तैयारी कर रही है। पूरी टीम कों कहा गया है कि इन सीटों पर अतिरिक्त मेहनत करने की आवश्यकता है। माया ने सुरक्षित सीटों की जिमीदारी सतीश मिश्रा को दी है।
समाजवादी पार्टी ने बदले अपने समीकरण
उतार प्रदेश में समाजवादी पार्टी जिन 16 सीटों पर 5 हजार से कम अंतर से हारी थी वहां इस बार संगठन की सक्रियता से बूथ प्रबंधन कर चौकस तैयारी में लगी हुई है। गठबंधन की वजह से करीब आधा दर्जन सीटों पर उम्मीदवार भी बदल दिए गए हैं। सपा के प्रदेश प्रदेश अध्यक्ष नरेश उत्तम पटेल कहते हैं कि , इस बार कोई भी सित नहीं हारेंगे। तिवारी पुख्ता है। सपा के साथ गठबंधन में शामिल सभी दलों के कार्यकर्ता अपने स्तर पर लगे हुए हैं। जातीय समीकरण भी बिलकुल सपा के पक्ष में है।
सुरक्षित सीटों पर 2020 से ही जुटी है बीजेपी
उत्तर प्रदेश में दूसरी पार्टियों की अपेक्षा बीजेपी 2020 से उन 84 सीटों पर फोकस कर रही थी जहां वह हरी थी। इसी रणनीति में उन सीटों को भी शामिल किया गया था जहां हार का अंतर 5 हजार से कम था। इस तरह कि सीटों पर सांसदों, आयोग और बोर्ड के चेयरमैन को प्रभारी की जिम्मेदारी दी गई है। प्रभारियों को भी जातीय समीकरण के हिसाब से ही सेट किया गया है। सरकार और संगठन की रिपोर्ट के आधार पर पार्टी ने वहां काम करना शुरू कर दिया था। रणनीति के तहत ही 2020 से केशव मौर्य और स्वतंत्र देव के कार्यक्रम लगाए जा रहे थे।
पार्टी के प्रदेश महामंत्री गोविंद नारायण शुक्ला बताते हैं कि, चुनाव प्रचार में पार्टी ने इस तरह की सीटों पर ज्यादा फोकस किया है। इन सीटों पर जातीय समीकरण के हिसाब से ही नेताओं को घर घर संपर्क और प्रचार की जिम्मेदारी दी गई है। खासतौर पर इन सीटों पर लाभार्थियों से संपर्क बाध्य जा रहा है।












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