मां का ऑपरेशन कराने सरकारी अस्पताल पहुंचा मजदूर बेटा, डॉक्टर बोला-पहले जेब गरम करो, VIDEO VIRAL
कानपुर। योगी सरकार में भी अधिकारियों द्वारा रिश्वत लेने का सिलसिला कम होने का नाम नहीं ले रहा है। अस्पताल हो या कोई सरकारी दफ्तर बिना रिश्वत के कोई काम नहीं होता। ऐसा ही एक मामला कानपुर के जिला अस्पताल यूएचएम में देखने को मिला जहां एक सर्जन ने मरीज के ऑपरेशन के लिए तीमारदार से घूस की मांग की। ऐसा ना करने पर इलाज करने से साफ इंकार कर दिया। डॉक्टर द्वारा रिश्वत मांगने का वीडियो वायरल हो रहा है। इस वीडियो में सरकारी डॉक्टर साफ कहते दिखाई पड़ रहे हैं कि बिना खर्चा दिए सरकारी अस्पताल में भी इलाज नहीं होता है।

मां की पित्त की थैली का कराना था ऑपरेशन
सरकार चाहे किसी पार्टी की हो, कुछ सरकारी डॉक्टर अपने तौर-तरीके बदलने को तैयार नहीं है। यह वीडियो इस बात का सबूत है कि सरकारी अस्पताल में भले ही पर्चा एक रूपये में बन जाता हो लेकिन मुकम्मल इलाज कराना हो तो डॉक्टर की जेब गर्म करनी पड़ती है। हंसपुरम का रहने वाला शिव प्रताप सिंह अपनी मां के इलाज के लिए कई दिनों से भटक रहा था। पेशे से मजदूरी करने वाले बेटे के पास इतना पैसा नहीं था कि वो मां का इलाज किसी अच्छे से नर्सिंग होम में करा सके। इसलिए उसने जिला अस्पताल की राह पकड़ी। यहां एक रूपये में उसका पर्चा तो बन गया लेकिन सर्जन डॉ बी के सिंह ने साफ कह दिया कि पित्त की थैली का आपरेशन है, उसे डाक्टर को तो पैसे देने पड़ेंगे।

सरकारी डॉक्टर मांग रहा था आठ हजार रुपये घूस
डॉक्टर ने शिव को जो पैसे बताए, उसे सुनकर उसके पैरों तले जमीन खिसक गई। सरकारी डॉक्टर को आपरेशन करने के बदले में मरीज से आठ हजार रूपये चाहिये थे।। शिव प्रताप ने कानपुर से योगी मंत्रिमण्डल में कैबिनेट मंत्री सतीश महाना को सारा हाल कह सुनाया तो उन्होंने सीएमओ से सिफारिश की। लेकिन डॉक्टर साहब की दबंगई में कोई कमी नहीं आई। उन्होंने फिर भी कहा कि अगर बेटा कमाता नहीं है तो मां का इलाज कराना उसके बूते से बाहर है। सरकारी अस्पताल होने के बावजूद डॉक्टर ने शिव को उल्टे पैर वापस करके कहा कि पहले आठ हजार का इंतजाम करके आओ फिर मां के इलाज के बारे में सोचना।

घूस मांगने का बनाया VIDEO
हालांकि शिव प्रताप ने जिला अस्पताल की कलई खोलने के लिए डॉक्टर से हुई बातचीत का वीडियो बना लिया है, लेकिन बुधवार को राष्टपति रामनाथ कोविन्द का कानपुर दौरा होने के कारण प्रशासन और चिकित्सा विभाग के तमाम अधिकारियों के पास इस वीडियो को देखने का समय नहीं है।












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