इन्वेस्टमेंट के नाम पर डॉक्टर दंपति से 64 लाख की ठगी, लखनऊ में IFS अफसर निहारिका और उनके पति के खिलाफ केस दर्ज
Lucknow Doctor Fraud: राजधानी लखनऊ में महिला डॉक्टर और उनके पति के लाखों की ठगी का हैरान कर देने वाला मामला सामने आया है। पीड़ित दंपति ने आईएफएस अधिकारी निहारिका सिंह पर इन्वेस्टमेंट के नाम पर लाखों रुपए का फ्रॉड करने के आरोप में पुलिस में एफआईआर दर्ज करवाई है। इसी के साथ आईएफएस निहारिकाके पति अजीत गुप्ता को भी आरोपी बनाया गया है।
डॉक्टर ने दावा किया कि दंपति ने हाई रिटर्न का वादा करके उन्हें अपनी कंपनी में निवेश करने के लिए राजी किया। पुलिस के अनुसार भारतीय विदेश सेवा (आईएफएस) अधिकारी और उनके पति के खिलाफ कथित तौर पर निवेश के बहाने 64 लाख रुपए से अधिक की ठगी का केस दर्ज कराया गया है।

एसएचओ राजेश कुमार त्रिपाठी ने न्यूज एजेंसी पीटीआई को बताया कि अदालत के आदेश पर गुरुवार को गोमती नगर थाने में इस मामले में प्राथमिकी दर्ज की गई। डॉ. मृदुला अग्रवाल ने शिकायत में आईएफएस निहारिका सिंह, उनके पति अजीत गुप्ता और लखनऊ में उनकी सहयोगी कंपनियों के खिलाफ 64,63,250 रुपए की धोखाधड़ी का आरोप लगाया है।
एक पुलिस अधिकारी ने कहा कि आईएफएस अधिकारी वर्तमान में इंडोनेशिया में तैनात हैं। 2 से 29 फरवरी, 2020 के बीच हुए अपराध के लिए आईपीसी की धारा 406 (आपराधिक विश्वासघात) और 420 (धोखाधड़ी) के तहत एफआईआर दर्ज की गई है।
गोमती नगर निवासी डॉक्टर से ठगी
एफआईआर के अनुसार जिन लोगों पर मामला दर्ज किया गया है, उनमें अजीत गुप्ता, उनकी पत्नी निहारिका सिंह, अनी बुलियन ट्रेडर्स और आई विजन इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड शामिल हैं। गोमती नगर निवासी 54 वर्षीय डॉ. अग्रवाल ने अपनी शिकायत में कहा कि वह 2016 में दंपत्ति से तब परिचित हुईं, जब वे अपनी बेटी को उनके क्लिनिक में इलाज के लिए लाए थे।
51 लाख रुपए का निवेश
उनका दावा है कि उन्होंने उन्हें अपनी कंपनी - अनी बुलियन ट्रेडर्स में निवेश करने के लिए राजी किया और उन्हें अन्य निवेश विकल्पों की तुलना में बेहतर रिटर्न का आश्वासन दिया। अग्रवाल ने आरोप लगाया कि उनके दावों पर विश्वास करते हुए अगस्त 2016 में कई चेक के माध्यम से अनी बुलियन ट्रेडर्स में कुल 51 लाख रुपए का निवेश किया।
उन्होंने कहा कि स्टाम्प पेपर पर एक समझौते पर हस्ताक्षर किए गए थे और निवेश के प्रमाण के रूप में उन्हें पोस्ट-डेटेड चेक जारी किए गए थे। डॉ. अग्रवाल ने अपनी शिकायत में कहा, "शुरू में निवेश लाभदायक था और मुझे अगस्त 2018 तक बिना किसी रुकावट के अपना रिटर्न मिलता रहा। हालांकि, फरवरी 2019 के बाद मुझे बताया गया कि मेरे निवेश को दूसरी कंपनी आई विजन इंडिया क्रेडिट कोऑपरेटिव सोसाइटी में ट्रांसफर कर दिया गया है और मेरा पैसा वहां सुरक्षित है।"
कई लोगों को अपने जाल में फंसाया
जनवरी 2020 तक भुगतान प्राप्त करने के बावजूद डॉक्टर ने बताया कि फरवरी 2020 के बाद सभी भुगतान बंद हो गए। जब उन्होंने कंपनी से संपर्क किया, तो कर्मचारियों ने उन्हें बताया कि अजीत गुप्ता और अन्य पुलिस हिरासत में हैं। बताया जा रहा है कि आरोपियों ने इन दो कंपनियों व कुछ अन्य कंपनियां बनाकर निवेश के नाम पर प्रदेश में कई लोगों को भी अपना शिकार बनाया है।












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