यूपी के NH-56 पर बन रहे फोरलेन में 200 करोड़ के घोटाले की आशंका
सुल्तानपुर। उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर में बन रहे फोरलेन नेशनल हाईवे-56 के मुआवजे में घोटाले का मामला सामने आया है। सुल्तानपुर के जिलाधिकारी की शुरूआती जांच में इस मामले का खुलासा हुआ है। करीब 200 करोड़ रुपए से ज्यादा के घोटाले की आशंका जताई जा रही है।

सुल्तानपुर में एनएच-56 पर बन रहे फोरलेन की लंबाई तकरीबन 65 किलोमीटर है, जिसमे कुल 75 गांव प्रभावित हो रहे है। इन प्रभावित गांव के करीब 10 हज़ार काश्तकारों को 1233 करोड़ रुपए मुआवजे के तौर पर दिए जाने हैं। अब तक 1137 करोड़ रुपयों का मुआवजा वितरित किया जा चुका है।
डीएम विवेक कुमार के अनुसार कुछ दिनों पहले कुछ काश्तकार आर्बिटेशन का मामला उनके पास लेकर आये थे। काश्तकारों का कहना था कि उसी गांव के कुछ लोगों को जिस हिसाब से मुआवजा दिया गया उस हिसाब से उन्हें नहीं मिल रहा है। जिस पर डीएम ने स्वयं पत्रावलियों का परिक्षण कराया। शुरुआती जांच में पता चला कि अधिकारियों और कर्मचारियों की मिलीभगत से उन काश्तकारों को जरुरत से ज्यादा मुआवजा दे दिया गया है।
डीएम ने बताया कि फोरलेन मुवावजे में वितरण को लेकर 4 श्रेणी निर्धारित की गई थी। जिसमे नेशनल हाइवे, स्टेट हाइवे, प्रांतीय मार्ग और चकमार्ग के हिसाब से मुआवजे का वितरण किया जाना था। लेकिन भ्रष्टाचार में लिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों ने मुआवजा वितरण में ऐसी धांधली की कि जांच के दौरान डीएम भी दंग रह गए।
जिले में एनएच 56 पर कुल 5 बाईपास बनने थे, जिसमे 75 में से 38 गांव प्रभावित हो रहे थे। इन 38 गांव पर न ही कोई नेशनल हाइवे है और न ही स्टेट हाइवे। बावजूद इसके इन 38 गांव के करीब 6 हज़ार काश्तकारों को करीब 200 करोड़ से ज्यादा का भुगतान कर दिया गया। डीएम ने बताया कि इसकी पूरी जिम्मेदारी सक्षम अधिकारी की थी जिन्हें स्थलीय निरीक्षण कर तहसील से गाटा सख्या मिलाकर तब मुआवजे की घोषणा करनी चाहिए थी। फिलहाल जिलाधिकारी ने उन ज्यादा लिए हुए करीब 6 हजार काश्तकारों से 200 करोड़ रुपयों के रिकवरी की बात कहीं है। साथ ही साथ डीएम ने मामले में दोषी पाये जाने वाले अधिकारियो-कर्मचारियों के खिलाफ कठोर के निर्देश दिए हैं।












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