शिवपाल की पार्टी के बीजेपी में विलय होने के सवाल पर क्या बोले यूपी के डिप्टी सीएम
कानपुर। क्या शिवपाल की पार्टी का बीजेपी में विलय हो सकता है? क्या शिवपाल बीजेपी के साथ मिलकर लोकसभा चुनाव लड़ सकते हैं? महागठबंधन के जवाब में बीजेपी के किन दलों के साथ समझौता कर सकती है? इन सभी सवालों के जवाब यूपी के डिप्टी सीएम केशव मौर्या ने दिए। वह कानपुर में पत्रकारों से बात कर रहे थे। लोकसभा चुनाव की दहलीज पर खड़ी केंद्र सरकार एक बार फिर एक्शन मोड में है। केंद्र की सियासत में दिल्ली की राजगद्दी तक पहुंचने में यूपी की अहम भूमिका है। यही कारण है कि पीएम नरेंद्र मोदी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह का यूपी पर खास फोकस है। केंद्र की मंशा भांप यूपी की योगी सरकार और उसके मंत्री पूरे दमखम के साथ सड़कों पर उतर आए हैं।

यूपी के डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य 2 दिन से कानपुर में डेरा डाले हुए हैं। संगठन की नब्ज टटोलने के बाद जनप्रतिनिधियों और प्रशासनिक अफसरों से अलग-अलग मुलाकात कर कानपुर शहर का हाल हवाल लिया। बतौर कानपुर के प्रभारी मंत्री मौर्या ने अधूरे पड़े विकास कार्यों को जल्द से जल्द पूरा करने के अफसरों को सख्त निर्देश दिए जिससे कि आम जनता में सरकार की बेहतर छवि बने।
खासकर उन प्रोजेक्ट पर विशेष तरजीह दी जा रही है जो लंबे समय से लटके पड़े हैं। आज डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य पूरे दलबल के साथ कैंट स्थित निर्माणाधीन गोला घाट पुल का निरीक्षण करने पहुंचे। कछुआ गति से बन रहे इस पुल को लेकर मौर्य ने अफसरों से तमाम सवाल जवाब किए और कैंटोनमेंट बोर्ड की वजह से लगे अड़ंगे को जल्द से जल्द दूर करने के डीएम को निर्देश दिए। इसी तरह सीओडी पुल की एक लाइन अभी तक चालू ना होने पर कड़ी नाराजगी जताई और सेतु निगम के अफसरों को इसे जल्द से जल्द चालू कराने के निर्देश दिए।
मीडिया से रूबरू होते हुए डिप्टी सीएम केशव प्रसाद मौर्य ने कहा कि केंद्र की मोदी सरकार हो या प्रदेश की योगी सरकार जनता की अपेक्षाओं को पूरा करने का काम कर रही है। समाजवादी पार्टी से किनारा कर सेकुलर मोर्चा बनाने वाले शिवपाल सिंह यादव से गठजोड़ की संभावनाओं से इनकार किया और कहा कि एनडीए गठबंधन काफी मजबूत है। कानून व्यवस्था के सवाल पर बोले की सख्त रूख अख्तियार किया जा रहा है। उन्होंने कहा है कि किसी को भी बख्शा नहीं जाएगा।
पेट्रो पदार्थों की कीमतों में बेतहाशा वृद्धि के मुद्दे पर बोले की अंतर्राष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में आई अचानक उछाल के चलते पेट्रो पदार्थों के दाम बढ़े हुए हैं और इसी कारण डॉलर के मुकाबले रुपया काफी कमजोर हुआ है, जिससे निपटने के हर संभव प्रयास केंद्र सरकार कर रही है।












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