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यूपी: दलित नेता चंद्रशेखर क्या ले रहे हैं मायावती की जगह? इशारे कर रहे हैं ये संकेत

सहारनपुर। 2014 के चुनावों के बाद जिन राज्यों में चुनाव हो रहे हैं वहां कुछ नए नेताओं का उदय हो रहा है। इस कड़ी में वेस्ट यूपी का एक युवा दलित नेता चंद्रशेखर इन दिनों उभार पर है। दलित समाज के युवाओं के बीच उसकी एक खास पैठ बन रही है। यह उसकी स्वीकार्यता ही है कि लंबे समय से दलितों की हितैषी रहीं मायावती दलित युवाओं के बीच चंद्रशेखर की तुलना में पीछे सरकती जा रही हैं।

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छीना जाने लगा मायावती का हर स्थान

छीना जाने लगा मायावती का हर स्थान

एक समय था जब बसपा सुप्रीमों मायावती का जादू दलितों के सिर चढ़कर बोलता था। दलितों के यहां होने वाले किसी भी तरह के कार्यक्रम में बाबा साहब अम्बेडकर के साथ-साथ मायावती का फोटो भी दिखाई देती थी। एक समय वह भी आया था, जब वैवाहिक और अन्य मांगलिक कार्यक्रमों के निमंत्रण पत्रों पर भी मायावती का फोटो दिखाई देने लगी थी। लेकिन अब वक्त बदल रहा है। धीरे-धीरे शादी के कार्डों से मायावती का फोटो गायब होता जा रहा है और उनकी जगह को चंद्रशेखर ने लिया है।

चंद्रशेखर ने जीता दलितों का दिल

चंद्रशेखर ने जीता दलितों का दिल

दलित परिवारों में हाल ही में संपन्न हुए शादी कार्डों में भी इस युवक ने स्थान ले लिया है। इन शादी कार्डों का अवलोकन करने के बाद चौंकाने वाली तस्वीर सामने आई। यूपी में एक समय दलितों के यहां शादी कार्डों पर बाबा साहब अम्बेडकर के साथ-साथ बसपा संस्थापक कांशीराम और उनके साथ बसपा सुप्रीमों मायावती का फोटो भी प्रकाशित कराया जाता था। उस समय तर्क दिया जाता था कि दलितों के हितों की लड़ाई लड़ने वाली आयरन लेडी मायावती का फोटो यदि शादी कार्ड पर प्रकाशित करा दिया गया है तो कोई गलत बात नहीं है। लेकिन पिछले कुछ दिनों से मायावती दलितों के यहां होने वाले मांगलिक कार्यक्रमों के निमंत्रण पत्रों से गायब सी होती जा रही हैं। चंद्रशेखर पिछले कुछ समय से दलितों के हितों की लड़ाई लड़ रहा है।

दलित नेता के रूप में पहली पसंद

दलित नेता के रूप में पहली पसंद

यह युवक भीम आर्मी एकता मिशन का संस्थापक है। चंद्रशेखर अभी पिछले दिनों ही जेल से रिहा हुए हैं। क्योंकि मई 2017 में सहारनपुर में हुए जातीय संघर्ष के बाद चंद्रशेखर पर जातीय दंगा भड़काने का आरोप लगा था। चंद्रशेखर पर रासुका के तहत कार्रवाई की गई है, लेकिन इसके बावजूद चंद्रशेखर वेस्ट यूपी के दलितों की पहली पसंद बनता जा रहा है। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि दलितों के यहां संपन्न होने वाले वैवाहिक कार्यक्रमों के निमंत्रण पत्र पर चंद्रशेखर की फोटो ने अपनी जगह बना ली है।

होने लगी है महात्मा बुद्ध और बाबा साहब से तुलना

होने लगी है महात्मा बुद्ध और बाबा साहब से तुलना

हाल ही में 18 जून 2018 को ग्राम देवला निवासी सुरेश गौतम की शादी संपन्न हुई। सुरेश गौतम ने अपनी शादी के कार्ड को नया रूप देते हुए कार्ड में एक स्थान पर डॉक्टर अंबेडकर की तस्वीर वाला एक कैलेंडर छपवाया। इस कैलेंडर पर एक ओर जहां महात्मा गौतम बुद्ध व डॉक्टर अंबेडकर नजर आ रहे हैं, तो दूसरी ओर संत रविदास के नीचे चंद्रशेखर का फोटो छपवाया गया है। इस कैलेंडर में बसपा सुप्रीमों कहीं पर भी नजर नहीं आ रही हैं। एक अन्य शादी का कार्ड इलाहाबाद का है। इस कार्ड में नवयुगल को फूले, अंबेडकर, पेरियार, ललई की विरासत बताया गया है। इससे एक बात तो साफ हो रही है कि भीम आर्मी का संस्थापक चंद्रशेखर दलितों के दिलों में अपनी जगह बना रहा है।

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