UPPSC भर्ती: सीबीआई जांच के आदेश के बाद छात्रों ने मनाया जश्न

सीएम योगी आदित्यनाथ ने यूपीपीसीएस भर्तियों में सीबीआई जांच के आदेश दिए हैं जिसके बाद छात्र जश्न मना रहे हैं।

इलाहाबाद। जिस आंदोलन को मुकाम पर पहुंचाने के लिये छात्रों ने 44 बार लाठी चार्ज का सामना किया। 3 बार आंदोलन दमन के लिये छात्रों पर गोलियां चलाई गई। दर्जनों छात्रों को कई बार जेल भेजा गया लेकिन छात्र न झुके और न ही रुके। अपनी धुन में रमे आंदोलनकारियों को आखिरकार जीत के शंखनाद का मौका मिल गया। पिछले कई वर्षों से आयोग की भर्तियों की जांच के लिये मोर्चा खोले प्रतियोगी छात्रों की बड़ी जीत हुई है।

लंबे समय से चल रहा था आंदोलन

लंबे समय से चल रहा था आंदोलन

अखिलेश सरकार के कार्यकाल में हुई भर्तियों की सीबीआई जांच की मांग को लेकर लंबे समय से चल रहा आंदोलन योगी सरकार के एक आदेश से परिपूर्ण हुआ। उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में अखिलेश सरकार के दौरान हुई भर्ती की जांच सीबीआई से कराने के आदेश के साथ इलाहाबाद में जश्न शुरू हो गया। इलाहाबाद विश्वविद्यालय छात्रसंघ पर प्रतियोगी छात्रों ने अबीर-गुलाल से होली खेलकर विजय जुलूस निकाला।

सिविल लाइंस के सुभाष चौराहे से लोक सेवा आयोग चौराहे तक भी विजय जुलूस निकाला और एक-दूसरे को मिठाई खिलाकर बधाई दी गई। छात्रों ने सीएम योगी को धन्यवाद ज्ञापन भी भेजा। हलांकि छात्र जब कलक्ट्रेट पहुंचे और खुशी में नारेबाजी कर ज्ञापन सौंपना चाहा तो आधे घंटे तक कोई भी अफसर छात्रों से ज्ञापन लेने नहीं पहुंचा। इस पर छात्र भड़क गए और हंगामा शुरू कर दिया। मामले बढ़ने पर एडीएम ने मौके पर पहुंचकर छात्रों से ज्ञापन लिया, जिसमें सीबीआई जांच की घोषणा के लिए मुख्यमंत्री के प्रति आभार जताया गया था।

मामले ने खूब पकड़ा तूल

मामले ने खूब पकड़ा तूल

आयोग की भर्ती में धांधली को लेकर इतनी बार सियासत हुई कि हर भर्ती प्रक्रिया लगभग हाईकोर्ट पहुंची और उस पर रोक लगी। इलाहाबाद से लेकर लखनऊ तक छात्रों ने प्रदर्शन किया और इनके प्रदर्शन को बर्बरता पूर्वक दबाया जाता रहा। लोकसभा चुनाव के दौरान भी लोकसेवा आयोग की भर्ती भाजपा का मुद्दा बना था। बाद में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विधानसभा चुनाव प्रचार के दौरान जांच के लिये हुंकार भरी थी। वाराणसी की एक जनसभा में तो उन्होंने सुहासनी बाजपेयी मामले को उठाया था और तत्कालीन सपा सरकार पर सीधा हमला बोला था। अभी हाल ही में एक जन सूचना की जानकारी मीडिया में सुर्खियां बनी कि हाईकोर्ट में चल रहे मामले से जुड़े कागज यानी उत्तर पुस्तिका जला दी गई है । इस पर खूब हो हल्ला हुआ और आयोग पर सीधे सवाल उठे थे।

अगर इस जांच के पीछे की वजह देखी जाये तो खुद ही भाजपा का चुनावी मुद्दा था जिसे विधानसभा चुनाव के दौरान कम से कम इलाहाबाद में तो व्यापक पैमाने पर भुनाया ही गया था। फिर मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने इस ममले महत्वपूर्ण भूमिका निभाई और उनकी आंतरिक रिपोर्ट व सीएम से जांच को लेकर अपनी राय में धांधली की पुष्टि की थी। लगातार सिद्धार्थ नाथ से छात्र पहुंच बनाये हुये थे और मूवमेंट पर दोनों ओर से सूचना का आदान प्रदान चल रहा था। यही वजह थी की आरटीआई से कई राज अचानक से सामने आये और ठोस सबूत के बिनाह पर जांच का आदेश हो गया।

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    Oneindia ने सबसे पहले दी थी CBI जांच पर खबर

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    सूबे में भाजपा का जैसा ही कमल खिला था। Oneindia ने अपनी स्पेशल स्टोरी में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग की सीबीआई जांच कराने की खबर पाठकों को दी थी। जबकि उस खबर की पुष्टि करती दूसरी खबर भी दी थी कि आयोग की भर्ती का रिकॉर्ड तलब हो चुका है। कभी भी सीबीआई जांच के आदेश हो सकते हैं। दरअसल सीएम पद पर योगी आदित्यनाथ कि घोषणा के बाद जब एक्शन शुरू हुआ तो आयोग के अध्यक्ष को योगी आदित्यनाथ ने तलब भी किया। हलांकि तत्काल कार्रवाई के बजाय समय इसलिए लिया गया ताकि यह बदले की कार्रवाई न मानी जाये। तब योगी सरकार ने अपनी आंतरिक जांच के बाद सीबीआई जांच के संकेत दिये थे और आखिरकार अब आयोग की भर्तियों में धांदली की जांच सीबीआई करेगी।

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