150 सपाइयों के खिलाफ केस फिर खुला, आजम के दबाव में हुआ था बंद!
रामपुर। पिछले विधानसभा चुनाव के दौरान पूर्व कांग्रेस सांसद बेगम नूर बानो उनके पुत्र एवं पूर्व मंत्री नवेद मियां व अन्य कांग्रेसियों के काफिले पर आजम समर्थकों द्वारा किये गये जानलेवा हमले में लगी फाइनल रिपोर्ट की विवेचना वीडियो फुटेज के आधार पर अदालत के आदेश पर दोबारा की जायेगी। अब आजम खां के निजी पीआरओ और तत्कालीन डीसीडीएफ चेयरमैन सहित करीब डेढ़ सौ सपा समर्थकों की गर्दन फंसती नजर आ रही है।

पिछले लोकसभा चुनाव 2014 में प्रचार के दौरान तत्कालीन मंत्री और सपा के कददावर नेता आजम खां के समर्थकों पर आरोप लगा कि उन्होंने पूर्व सांसद बेगम नूर बानो उनके पुत्र एंव पूर्व मंत्री नवेद मियां और उनके बेटे हमजा मियां व अन्य कांग्रेसियों को घेर कर जानलेवा हमला किया था। इसके खिलाफ कांग्रेसियों ने करीब डेढ़ सौ सपा समर्थकों के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। बताया जाता है कि तत्कालीन सपा सरकार में पुलिस ने आजम खां के रसूख के चलते जांच पर फाइनल रिपोर्ट लगाकर बंद कर दी थी जबकि हमलावर समर्थकों की ओर से मुकदमा बकायदा बदस्तूर जारी रहा।
इसके खिलाफ कांग्रेस नेता एंव कारोबारी फैसल खां लाला ने राजभवन, राश्ट्रपति और डीजीपी व अन्यों से शिकायत की लेकिन आरोप है कि पुलिस ने कानून का मजाक उड़ाते हुए तत्कालीन नगर विकास मंत्री आजम खां को खुश करने के लिए उल्टे कांग्रेसियों को जेल में ठूंसकर थर्ड डिग्री की यातनायें दीं। इसके खिलाफ अदालत पहुंचे फैसल लाला की सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट रामपुर ने उपलब्ध वीडियो फुटेज और साक्ष्यों के आधार पर फाइनल रिपोर्ट को निरस्त करते हुए करीब डेढ़ सौ सपा समर्थकों के खिलाफ दोबारा जांच के आदेश दिये हैं, जिसमें आजम खां के निजी प्रवक्ता फसाहत खां शानू, तत्कालीन डीसीडीएफ चेयरमैन मास्टर जाफर सहित कई नामचीन सपा नेता शामिल हैं।












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