पिता साली के साथ भाग गया था, मां को सांप ने काट लिया, बच्चों का रो-रोकर बुरा हाल

छोटे-छोटे बच्चों के पास इतने पैसे कहां से होते कि वो अपनी मां के लिए अंतिम संस्कार की सामग्री जुटा पाते।

शाहजहांपुर। यूपी के शाहजहांपुर में सांप के काटने से महिला की मौत हो गई। महिला खेतों में मजदूरी करके अपने पांच छोटे-छोटे बच्चों का पेट पालती थी। महिला का पति पांच साल पहले साली को लेकर फरार हो गया। इन छोटे-छोटे पांच मासूम बच्चों को पहले तो पिता ने दगा दिया और अब मां का भी साया उठ गया है। ये बच्चे अभी इतने छोटे हैं कि ये मजदूरी करके अपना पेट भी नहीं पाल सकते हैं। अब इन बच्चों को मदद की दरकार है।

अब कौन खिलाएगा रोटी?, ये भी तो अभी बच्चे हैं

अब कौन खिलाएगा रोटी?, ये भी तो अभी बच्चे हैं

देखना होगा कि इन बच्चों की सरकार मदद करती है या नहीं। देश में ऐसी संस्थाएं भी हैं और ऐसे लोग जो मदद करने के लिए आगे रहते हैं। क्या इन बच्चों पर भी ऐसे लोगों की इनायत-ए-करम होगी? इन बच्चों के आगे अभी शिक्षा से ज्यादा जरूरी दो जून की रोटी है। फिलहाल अभी महिला के अंतिम संस्कार के लिए छोटे बच्चों को हाथ फैलाकर चंदा इकट्ठा करना पड़ा है।

दरअलस मां से चिपककर रो रहे इन छोटे-छोटे बच्चों को देखकर हर किसी की आंखे नम है। क्योंकि सांप के काटने से महिला की मौत हो चुकी है और पांच साल पहले पिता अपनी साली को लेकर भाग चुका है। दरअसल मामला थाना जलालाबाद के उबरिया मंदिर के पास का है। मंदिर के पास करीब चालीस साल की महिला राम देवी अपने पांच छोटे-छोटे बच्चों के साथ रहती थी। सबसे छोटी बेटी लक्ष्मी की उम्र पांच साल है तो सबसे बड़े बेटे संतोष की उम्र 15 साल है।

मां ने भी तो नहीं बताया कि उसे सांप ने काटा है...

मां ने भी तो नहीं बताया कि उसे सांप ने काटा है...

बीते रविवार की शाम महिला जिस झोपड़ी में रहती है उसमें एक दीवार उठा रही थी ताकि झोपड़ी के अंदर का कुछ दिखाई न दें। महिला के पास कुछ पुरानी ईंटें रखी थी जिसको वो हटाकर दीवार उठा रही थी। जैसे ही महिला ने ईंट हटाई छिपे बैठे सांप ने महिला को डस लिया। बच्चों ने बताया कि जब मां को सांप ने काटा था तब उसने बताया था कि किसी कीड़े ने काट लिया है। उसके बाद वो डॉक्टर के पास दिखाने गई। दवा लेकर जब महिला घर लौटी तो वो बेहोश हो गई। उसके बाद बच्चों ने रोना शुरू किया तो आसपास के रहने वाले लोग आए। जिसके बाद 108 नंबर पर फोन किया गया। एंबुलेंस से महिला को जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया। जहां डॉक्टर ने महिला को मृत घोषित कर दिया। उसके बाद महिला के शव को उसके घर भेज दिया गया।

पिता की मजदूरी तो इन बच्चों का पेट भरती नहीं, ऐसे ही तो भविष्य खो जाता है

पिता की मजदूरी तो इन बच्चों का पेट भरती नहीं, ऐसे ही तो भविष्य खो जाता है

राम देवी ही खेतों में मजदूरी करके अपने बच्चों का पेट पालती थी। इन बच्चों का दुनिया में वही एक सहारा थी क्योंकि पिता तो पहले ही साली को लेकर भाग गया था। रात बीत जाने पर महिला के अंतिम संस्कार की बात आई। लेकिन छोटे-छोटे बच्चों के पास इतने पैसे कहां से होते कि वो अपनी मां के लिए अंतिम संस्कार की सामग्री जुटा पाते। लेकिन इस दौरान जब घर के आसपास के लोग महिला के घर पहुंचे तो वहां अंतिम संस्कार की कोई तैयारी नहीं थी। उसके बाद एक ऐसा नजारा देखने को मिला जिससे लोगों की आंखे नम हो गई। इस नजारे को देखकर ऐसा लगा कि गरीब होना पाप है। क्योंकि नीचे महिला का शव रखा था एक तरफ उसके बच्चे खड़े थे। ये छोटे-छोटे मासूम बच्चे अपनी मां की चिता के लिए चंदा मांगकर पैसे इकट्ठा कर रहे हैं। हालांकि इस दौरान लोगों ने मानवता दिखाई। महिला के अंतिम संस्कार के लिए सभी ने चंदा दिया तब जाकर महिला के अंतिम संस्कार की तैयारी हो सकी।

ये बच्चे आपस में ही एक-दूसरे को चुप करा रहे हैं

ये बच्चे आपस में ही एक-दूसरे को चुप करा रहे हैं

सवाल है कि लोगों ने चंदा देकर महिला का अंतिम संस्कार तो करा दिया। लेकिन इन बच्चों को रोटी कहा से मिलेगी। क्योंकि ये बच्चे न तो कहीं मजदूरी कर सकते हैं तो अब शिक्षा भी इन बच्चों से काफी दूर हो चुकी है। पिता छोड़कर चला गया, मां की मौत हो गई। पांच बच्चे बेसहारा अनाथ हो गए। मां के शव के पास रोते बिलखते बच्चे किसी को भी रुला सकते हैं। ये बच्चे आपस में ही एक-दूसरे को चुप करा रहे थे। जरूरत है तो ऐसे परिवार और अनाथ बच्चों को सहारा देने की। देखना होगा इस खबर को देखने के बाद क्या बच्चों के आगे से रोटी का संकट दूर हो पाएगा।

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