चंद्रशेखर आजाद को NSA के तहत 16 महीने तक जेल में कर दिया गया था कैद, जानिए कैसे बनाई 'भीम आर्मी'
जानें भीम आर्मी का नेता कैसे बना 'रावण'
भीम आर्मी के अध्यक्ष और दलितों के नेता चंद्रशेखर आजाद पर बुधवार को यूपी के सहारनपुर में बदमाशों ने अंधाधुंध गोलियां बरसाते हुए जानलेवा हमला किया। अज्ञात हमलावरों द्वारा बरसायी गई गोलियां चंद्रशेखर की पीठ से लगते हुए निकल गई। ये हमला उन पर तब हुआ जब वो अपनी फॉर्ज्युनर कार पर सवार थे। उन पर ये हमला कार पर सवार हमलावरों ने किया। चंद्रशेखर को पीठ में छर्रा लगा है जिसके बाद उन्हें अस्पताल में भर्ती करवाया गया है।

चंद्रशेखर पर हुए हमले के बाद यूपी की सियासत गरमा चुकी है। विपक्ष चंद्रशेखर पर हुए हमले को लेकर केंद्र सरकार पर निशाना साध रहा है। आइए जानते हैं जिस चंद्रशेखर पर हुए हमले के बाद जमकर बवाल मचा हुआ है, उन्होंने इतने कम समय में राजनीति में कैसे हासिल किया ये मुकाम?
दलितों के नेता चंद्रशेखर आजाद
भीम आर्मी प्रमुख चंद्रशेखर दलित युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। तेजतर्रार चंद्रशेखर आजाद रावण के नाम से भी जाना जाता है। गले में नीला गमछा बांधकर सरकार के खिलाफ तीखे तेवर रखने वाले चंद्रशेखर आजाद वो दलित नेता हैं जो मायावती के बाद सबसे बड़े बहुजन नेता के रूप में पहचान बनाकर राजनीति में स्थापित हो चुके हैं।
साहरनपुर के रिटायर्ड प्रिंसिपल का बेटा चंद्रशेखर आजाद
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के इस बेटे चंद्रशेखर आजाद के दलित समाज में बढ़ते वर्चस्व से बसपा सुप्रीमों मायावती भी अपनी पार्टी के लिए अंदर ही अंदर खतरा महसूस करती हैं। दिसंबर 1986 में सहारनपुर जिले के छुतमलपुर कस्बे में गोवर्धन दास और कमलेश देवी के घर में जन्में चंद्रशेखर खुद को दलितों का अगुआ मानते हैं। इनके पिता रिटार्यर्ड प्रिंसिपल थे।
मोदी योगी के कट्टर आलोचक जेल की भी काट चुके है सजा
यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी सरकार के विरोधी और कटु आलोचक चंद्रशेखर आजाद अपने इसी क्रातिकारी और बगावती तेवर के कारण कई महीनों तक जेल की सजा काट चुके हैं। यहां तक कि तिहाड़ जेल की भी सजा काट चुके हैं।
NSA के तहत 16 महीने तक जेल में कर दिया गया था कैद
उत्तर प्रदेश के सहारनपुर में 2017 में जातीय हिंसा के बाद राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम के तहत चंद्रशेखर के खिलाफ मामला दर्ज कर जेल भेजा गया था। ये वो आंदोलन था जिसमें एक की मौत हो गई थी और कई घायल हो गए थे। 2017 को एनएसए के तहत चंद्रशेखर को जेल में डाला गया था। 15 दिनों की जेल के बाद उन्हें जेल से रिहाई मिली थी। इलाहाबाद उच्च न्यायालय ने चंद्शेखर को ये कहते हुए रिहा किया था कि हिंसा में गिरफ्तारियां राजनीति से प्रेरित थीं, लेकिन यूपी की सरकार ने उन्हें लगातार जेल में रखा।
तिहाड़ जेल में सीएएस के विरोध में काट चुके हें तिहाड़ जेल की सजा
वहीं इसके बाद दिल्ली पुलिस ने दिल्ली में जामा मस्जिद पर जंतर मंतर पर सीएएए के खिलाफ आंदोलन किया था, तो उन्हें तिहाड़ जेल में डाल दिया गया था। जब रिहा होकर आए तो उनके हजारों समर्थकों ने उनका स्वागत फूल-माला से किया था।इसके अलावा तुगलकाबाद में श्री गुरु रविदास गुरुघर के विध्वंस के विरोध में अरेस्ट किया था। हाथरस सामूहिक बलात्कार मामले के विरोध में उन्हें 500 भीम आर्मी के सदस्यों के साथ अरेस्ट किया था।
हाथरस केस इनकी बदौलत बना राष्ट्रीय मुद्दा
चंद्रशेखर आजाद दलितों के उत्पीड़न के खिलाफ अब तक कई बार आंदोलन करते रहे हैं। यूपी ही नहीं बिहार तक में दलित उत्पीड़न की भनक पड़ते ही चंद्रशेखर वहां अपनी भीम आर्मी संग पहुंच जाते हैं। यूपी के हाथरस गैंगरेप का मुद्दा जिसमें एक 19 वर्षीय महिला की सामूहिक बलात्कार के बाद मौत हो गई थी, वो मामला चंद्रशेखर के आंदोलन के कारण राष्ट्रीय मुद्दा बना था।
भीम आर्मी की शुरूआत कर कहलाए रावण
2014 में सतीश कुमार और विनय रतन सिंह के साथ भीम आर्मी की स्थापना की, चंद्रशेखर की आर्मी भारत में शिक्षा के माध्यम से दलितों की मुक्ति के लिए काम करता है। वो खुद को रावण कहलाना पसंद करते हैं।भीम आर्मी के संस्थापक चंद्रशेखर आजाद रावण ने बिहार विधानसभा चुनाव 2020 लड़ने के लिए अन्य क्षेत्रीय राजनीतिक दलों के साथ योनना बनाई थी। वहीं इसके पहले 2019 लोकसभा चुनाव में वाराणसी से पीएम मोदी के खिलाफ चुनाव लड़ने की योजना बनाई थी लेकिन सपा और बसपा गठबंधन को समर्थन देने के कारण अपना नाम वापस ले लिया था।
2017 में ये द ग्रेट चमार बोर्ड लगाकर हुए थे पॉपुलर
2017 में चंद्रशेखर सबसे पहले लाइमलाइट में तब आए जब उन्होंने दलितों के उत्थान के लिए अपनी भीम आर्मी लगा दी।चंद्रशेखर ने दलित कन्याओं की शादी और दलित युवकों की स्टडी के लिए धन जुटाया था। , बड़ा नाम बन चुके थे. उन्होंने दलितों के उत्थान के लिए अपनी आर्मी लगा दी. दलित लड़कियों की शादी से लेकर उनकी पढ़ाई तक के लिए वह फंड जुटाने लगे। उन्होंने बोर्ड लगाया, 'द ग्रेट चमार'।
अपनी जाति तुम इतना गर्व करो
अंबेडकर के विचारों को मानने वाले चंद्रशेख ने तब कहा था अपनी जाति तुम इतना गर्व करो कि लोग तुम्हारी पहचान को स्वीकारें और उन्हें तुम पर गर्व हो। इसके साथ ही ही चंद्रशेखर का मानना है कि तुम खुद को ऊंचा मानो और अन्याय के खिलाफ लड़ो।












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