फूलपुर उपचुनाव : 22 प्रत्याशी मैदान में, पढ़िए कौन बिगाड़ रहा किसका खेल
इलाहाबाद। उत्तर प्रदेश की फूलपुर लोकसभा सीट पर उपचुनाव में 22 प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं और सभी को चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया गया है। कुल 30 दावेदारों ने आवेदन किया था जिसमें से 6 नामांकन पत्र खारिज हो गए थे, जबकि 2 लोगों ने नामांकन पत्र वापस ले लिया था। मैदान में उतरे 22 प्रत्याशियों में 10 छोटे दलों के प्रत्याशी और 9 निर्दल प्रत्याशी भी शामिल हैं। यह छोटे दल और निर्दल प्रत्याशी पूरे चुनाव के दौरान न सिर्फ वोट कटवा साबित होंगे बल्कि किसी बूथ पर बड़ी पार्टी का खेल बिगाड़ेंगे तो किसी का खेल बना भी देंगे। फिलहाल फूलपुर की चुनावी लड़ाई में भाजपा से कौशलेंद्र पटेल, सपा से नागेंद्र सिंह पटेल, कांग्रेस से मनीष मिश्रा और निर्दलीय बाहुबली अतीक अहमद दिख रहे हैं। फूलपुर के इतिहास पर नजर दौड़ायें तो यह साफ हो जाता है कि निर्दल और छोटे दल के प्रत्याशी जीत तो नहीं पाते हैं लेकिन मजबूत कैंडिडेट के वोटों में ऐसी कटौती करते हैं कि चुनावी परिणाम ही पलट जाता है।

2009 में पलटा था परिणाम
सन 2009 के लोकसभा चुनाव में फूलपुर लोकसभा का चुनाव बेहद दिलचस्प हुआ था । उस चुनाव में सपा और बसपा आमने-सामने थी और मुख्य टक्कर इनके प्रत्याशियों के बीच थी। सपा से धर्मराज पटेल व बसपा से कपिल मुनि करवरिया प्रत्याशी थे। कुर्मी बाहुल्य इलाका होने के कारण धनराज पटेल समीकरणों में आगे चल रहे थे और चुनाव की मतगणना के दौरान कुछ ऐसे बूथ आए जहां पर धर्मराज पटेल निर्दलीय प्रत्याशियों के मतों के आगे बौने साबित हुए। हलांकि उन बूथों पर बसपा के दलित समीकरण वाले वोट काम कर गए और कपिल मुनि करवरिया ने बढ़त बनाई। 2009 के लोकसभा चुनाव में छोटे दल व निर्दलीय प्रत्याशियों ने 60 हजार से अधिक वोट बांट लिए। नतीजा यह रहा कि जब परिणाम घोषित हुआ तो 14578 वोटों से बसपा के कपिल मुनि करवरिया जीत गए। जीत की घोषणा के बाद री काउंटिंग की मांग हुई लेकिन उससे भी कोई ज्यादा प्रभाव नहीं पड़ा और निर्दलियों ने जो खेल बिगाड़ा था वह बसपा के लिए खेल बनाने वाला साबित हुआ ।

मोदी लहर में भी निर्दलियों का दम
2014 में एक बार फिर से जब लोकसभा चुनाव का बिगुल बजा तो फूलपुर लोकसभा सीट पर एक बार फिर से सपा और बसपा की लड़ाई मानी जा रही थी, लेकिन मोदी लहर के बाद अचानक से भाजपा को संजीवनी मिल गई और हर तरफ मोदी-मोदी के नारों के साथ फूलपुर में भी हर हर मोदी, घर घर मोदी के नारे गूंजने लगे। हलांकि इस चुनाव में अपेक्षा से ठीक विपरीत परिणाम आया था और केशव प्रसाद मौर्य रिकॉर्ड बहुमत के साथ जीत कर सांसद बने, लेकिन इस चुनाव में भी छोटे दल व निर्दलियों ने 50000 से ज्यादा वोट हथिया लिए थे। अगर इस चुनाव में भी नजदीकी हार जीत हुई होती तो निश्चित तौर पर 2014 के चुनाव में भी वोट कटवा प्रत्याशी बड़े दलों पर खेल को बनाने बिगाड़ने में अहम भूमिका निभाते।

इस बार पहले ही पलट गया समीकरण
फूलपुर लोकसभा सीट के चुनाव में ऐसा पहली बार होगा जब मतदान से पहले ही किसी निर्दल प्रत्याशी ने राजनैतिक दलों का समीकरण ही बदल दिया हो। दरअसल इस बार किसी दल से टिकट न मिलने पर निर्दलीय प्रत्याशी के तौर पर पूर्व सांसद फूलपुर बाहुबली अतीक अहमद चुनाव मैदान में आ गए। अतीक अहमद बड़ी पार्टियों के वोट बैंक में सेंध लगायेंगे, लेकिन यह साफ है कि भाजपा को अतीक के लड़ने से कोई नुकसान होता नहीं दिख रहा है क्योंकि भाजपा का वोट बैंक अतीक के वोट बैंक से ठीक विपरीत है लेकिन कांग्रेस और सपा का वोट बैंक कहीं न कहीं वह अधिक प्रभावित करेंगे और उनका वोट प्रतिशत कम कर भाजपा का खेल बना देंगे। मौजूदा समय की संभावनाओं पर अगर नजर दौड़ाएं तो अकेले अतीक अहमद ही निर्दल प्रत्याशियों में से ऐसे खिलाड़ी हैं जो सूबे की राजनीति में धुरंधर पार्टी बनकर उभरी सपा का खेल बिगाड़ रहे हैं और कांग्रेस को भी लड़ाई से बाहर कर रहे हैं। चूंकि भाजपा इस सीट पर पिछले चुनाव में एकतरफा हावी रही थी ऐसे में इस बार भी उसकी ताकत को कमतर नहीं आंका जा रहा है। हलांकि बाहरी प्रत्याशी को लेकर कुछ सवाल जवाब जरूर शुरू हुए थे लेकिन शीर्ष नेतृत्व के हस्तक्षेप के बाद स्थिति ठीक हो चुकी है।

दो ईवीएम से होगा चुनाव
जैसा कि पहले ही यह तय हो गया था कि इस बार फूलपुर लोकसभा के उपचुनाव में 15 से ज्यादा प्रत्याशी चुनाव लड़ेंगे और ठीक उसी धुरी पर अब 22 प्रत्याशियों को चुनाव चिन्ह आवंटित कर दिया गया है। 15 से ज्यादा प्रत्याशी अब मैदान में है तो एक ही ईवीएम से चुनाव कराना संभव नहीं है । ऐसे में दो ईवीएम से चुनाव होगा। एक ईवीएम में 15 उम्मीदवारों के नाम और एक नोटा का बटन होगा जबकि दूसरे वाले ईवीएम में 7 चुनाव चिन्ह ( बैलेट यूनिट दर्शाने) वाले बटन के साथ एक नोटा भी होगा।

किसे कौन सा चिन्ह मिला
भाजपा प्रत्याशी कौशलेंद्र सिंह पटेल को कमल का फूल।
सपा प्रत्याशी नागेंद्र सिंह पटेल को साइकिल ।
कांग्रेस प्रत्याशी मनीष मिश्रा को हाथ का पंजा।
बहुजन मुक्ति पार्टी कन्हैया लाल को चारपाई। अंबेडकर युग पार्टी के कमला प्रसाद को डबल रोटी। राष्ट्रीय बंधुत्व पार्टी के गणेश जी त्रिपाठी को गैस का चूल्हा ।
नेशन डेमोक्रेटिक पीपुल्स फ्रंट के प्रत्याशी डीडी गुप्ता को प्रेशर कुकर ।
परिवर्तन समाज पार्टी के रईस अहमद खान को ऑटो रिक्शा ।
लोहिया संयुक्त समाजवादी पार्टी के रमेश कुमार को ट्रैक्टर चलाता किसान ।
प्रगतिशील समाज पार्टी के वरुण देव पाल को हेलमेट।
भारतीय कामगार पार्टी के शमशेर बहादुर पटेल को कप और प्लेट ।
भारतीय संगम पार्टी कि सुधा पटेल को बल्ला। भारतीय किसान सेना लोकतांत्रिक से सुरेश चंद्र उपाध्याय को डीजल पंप ।
निर्दलियों में
बाहुबली अतीक अहमद को टेलीविजन
अशोक कुमार को बैटरी टॉर्च
डॉ नीरज को गैस सिलेंडर
डॉ रमेश प्रकाश वर्मा को बाल्टी
राजेंद्र प्रसाद को ट्रक
राजेश यादव को टेलीफोन
राम मनोहर सिंह को छड़ी
सर्वेश को एयर कंडीशनर
हसन एकलाख को कांच का गिलास चुनाव चिन्ह आवंटित किया गया है












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