यूपी चुनाव से पहले रैली न कर पाने पर बसपा सुप्रीमो मायावती का छलका 'दर्द'
लखनऊ, 2 जनवरी: बसपा प्रमुख मायावती ने उत्तर प्रदेश में चुनाव तारीखों के ऐलान से पहले रैलियां न कर पाने के लिए फंड की कमी का रोना रोया है। उन्होंने विरोधी दलों पर पलटवार करते हुए दलील दी है कि अगर उनकी पार्टी चुनावों से पहले ही रैलियों पर फंड उड़ा देगी, तो फिर चुनाव कैसे लड़ेगी। उन्होंने विशेष तौर पर सत्ताधारी बीजेपी पर पलटवार करते हुए कहा है कि चुनावों से पहले सरकारी खर्चों पर शिलान्यास और उद्घाटन करवाए जाते हैं और लगे हाथ चुनावी रैली भी हो जाती है। दरअसल, हाल ही में गृहमंत्री अमित शाह ने उनपर रैली में नहीं निकलने को लेकर चुटकी ली थी, बीएसपी सुप्रीमो ने उनपर भी पलटवार किया है।

यूपी में चुनाव से पहले की रैलियों में पीछे है बसपा
उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव की घोषणा किसी भी वक्त हो सकती है। यही वजह है कि भाजपा, सपा और यहां तक कि कांग्रेस इससे पहले ही प्रचार अभियान में उतर चुकी है। सबसे ज्यादा खामोशी पूर्व मुख्यमंत्री मायावती और उनकी बहुजन समाज पार्टी में दिख रही है। थोड़े-बहुत सक्रिय दिखाई भी पड़ते हैं तो पार्टी महासचिव सतीश चंद्र मिश्रा ही नजर आते हैं, जो थोड़े-बहुत सम्मेलन करने में लगे हुए हैं। खुद मायावती ने अभी तक चुनाव अभियान में कोई दमदार एंट्री नहीं मारी है। पार्टी सूत्रों की मानें तो पूर्व सीएम चुनाव आयोग की ओर से तारीखों की औपचारिक घोषणा के बाद ही रैलियों की शुरुआत करेंगी। बीएसपी की रैलियों से अबतक दूरी बनाए रखने को लेकर प्रदेश की राजधानी में खूब खबरें पक रही हैं। लेकिन, बीएसपी चीफ का अपना ही सियासी दर्द है।

'...तो हमारे पास चुनाव के लिए फंड नहीं बचेंगे'
शनिवार को बहुजन समाज पार्टी की अध्यक्ष ने रैली की शुरुआत नहीं कर पाने के बारे में कहा है कि न तो उनकी पार्टी के पास सत्ताधारी दल जितना मोटा फंड है और ना ही उन्हें उद्योगपतियों का समर्थन हासिल है, जो रैलियों के लिए फंड उपलब्ध करवा सकें। उन्होंने गृहमंत्री अमित शाह के उस तंज पर भी पलटवार किया है, जिन्होंने हाल ही में उनसे कहा था कि वे भयभीत न हों और चुनाव प्रचार के लिए बाहर आएं। मायावती ने कहा है, 'यदि मैं दूसरी पार्टियों की नकल करती और कई रैलियां आयोजित करती, तो मेरी पार्टी के सदस्यों के पास चुनाव नजदीक आने पर प्रचार के लिए जरूरी फंड नहीं बचेंगे। हमारी पार्टी दूसरों की नकल करने में विश्वास नहीं रखती। हम अपनी पार्टी के सदस्यों की वित्तीय स्थिति के अनुसार काम करते हैं।'

'हमारी अमीर उद्योगपतियों की पार्टी नहीं है'
बीएसपी चीफ ने रैली नहीं कर पाने के लिए न सिर्फ फंड की कमी का दर्द बयां किया, बल्कि लगे हाथों भाजपा समेत बाकी विरोधियों को भी लपेटने की कोशिश की। उन्होंने कहा, 'हमारी अमीर उद्योगपतियों की पार्टी नहीं है। यह एक आंदोलन है। यदि हम दूसरों की नकल करेंगे, तो चुनावों के दौरान हमें भुगतना पड़ेगा।' उनका कहना है कि उनकी पार्टी के काम करने का तरीका अलग है और वह इसे नहीं बदलेंगी। बसपा के संस्थापक कांशी राम की पूण्यतिथि पर आयोजित एक 'अनौपचारिक रैली' को संबोधित करने के बाद बीएसपी सुप्रीमो सिर्फ प्रेस कांफ्रेंस में ही नजर आई हैं।

गृहमंत्री अमित शाह की चुटकी पर पलटवार
उन्होंने चुनावों से पहले रैलियों को लेकर भाजपा के साथ-साथ कांग्रेस को भी आड़े हाथों लिया है। उन्होंने आरोप लगाया है कि इन पार्टियों की सरकारें चुनावों से पहले सरकारी खर्चों पर उद्घाटन और आधारशिला जैसे कार्यक्रम आयोजित करवाती हैं, जो चुनावी रैलियों में बदल जाती हैं। बसपा प्रमुख ने कहा है, 'जब बीजेपी,कांग्रेस और बाकी पार्टियां केंद्र या राज्यों में सत्ता में आती हैं, तो वे चुनावों से दो-ढाई महीने पहले वादे पूरे करने शुरू कर देते हैं। वो घोषणाएं करते हैं, उद्घाटन करते हैं और सरकारी फंड का इस्तेमाल कर आधारशिला रखते हैं, न कि अपनी पार्टी के फंड से..... ' उनका दावा है कि अगर ये पार्टियां सत्ता में नहीं होतीं तो चुनावों की घोषणा से पहले इतनी सारी रैलियां नहीं कर पातीं, क्योंकि तब उन्हें अपना फंड लगाना पड़ता। गृहमंत्री शाह की चुटकी पर उन्होंने पलटवार करते हुए कहा कि, 'सरकारी खजानों में पड़े गरीबों के पैसे से ही बीजेपी नेताओं की गर्मी है। '
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