UP में फिर चौंकाएगी भाजपा , जानिए नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए किन पांच नामों की सबसे ज्यादा चर्चा
लखनऊ, 14 अप्रैल: उत्तर प्रदेश में लगातार दूसरी बार सत्ता हासिल करने के बाद भाजपा में अब नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। मौजूदा प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह को योगी कैबिनेट में शामिल किया गया है। ऐसे में आने वाले एक हफ्ते के अंदर नए प्रदेश अध्यक्ष का एलान हो सकता है। यूपी में भाजपा के नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम सबको चौंका सकता है। स्वतंत्र देव सिंह के योगी कैबिनेट में शामिल होने के बाद इस पद के लिए कई नामों पर चर्चा चल रही है। हालांकि, भाजपा सूत्रों की मानें तो नया प्रदेश अध्यक्ष सबकी सोच से अलग हो सकता है। पिछले कई फैसलों को देखकर ये दावा काफी हद तक सही भी लगता है। हर बार की तरह इस बार भी बीजेपी में कोई नया चेहरा सामने आकर सबको चौंका सकता है।

क्या कहता है बीजेपी में पिछले छह सालों का ट्रैक रिकॉर्ड
2016 : यूपी में विधानसभा चुनाव से एक साल पहले यूपी भाजपा में काफी हलचल थी। केंद्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का चेहरा तो था, लेकिन प्रदेश में जातिगत समीकरण साधने के लिए किसी नए चेहरे की जरूरत थी। लक्ष्मीकांत वाजपेयी प्रदेश अध्यक्ष हुआ करते थे। उस वक्त कई बड़े नेताओं के नामों को लेकर कयास लगाए जा रहे थे, लेकिन भाजपा ने इसके उलट नया चेहरा मैदान में उतार दिया। फूलपुर से सांसद केशव प्रसाद मौर्य को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया गया। केशव के नाम में भाजपा को दो फायदा दिखा। पहला ये कि उन्होंने हिंदुत्व के लिए काफी काम किया था और दूसरा वह पिछड़ा वर्ग से आते हैं।
2017 में केशव मौर्य को सौंपी कमान : विधानसभा चुनाव जीतने के बाद केशव प्रसाद मौर्य को डिप्टी सीएम बना दिया गया। एक बार फिर से भाजपा प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी खाली हो गई। तब कयास लगाए जाने लगे कि एक बार फिर से कोई ओबीसी या दलित चेहरा भाजपा यूपी की कमान संभाल सकता है। लेकिन फिर भाजपा ने सबको हैरान कर दिया। ब्राह्मण सांसद महेंद्र नाथ पांडेय को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। इसका फायदा भाजपा को लोकसभा चुनाव में हुआ। पार्टी ने यूपी से सबसे ज्यादा सीटें जीत लीं।
2019 में महेंद्र नाथ पांडेय बने प्रदेश अध्यक्ष : लोकसभा चुनाव में भाजपा की ऐतिहासिक जीत के बाद महेंद्र नाथ पांडेय को पार्टी ने केंद्र सरकार में मंत्री पद का इनाम दिया। इधर, यूपी में फिर से प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी खाली हो गई। एक बार फिर से कयास लगाए जाने लगे कि इस बार कोई दलित चेहरा यूपी की कमान संभालेगा। कई नामों की चर्चा भी उठी, लेकिन भाजपा ने सबको दरकिनार कर दिया। ओबीसी वर्ग से आने वाले स्वतंत्र देव सिंह को प्रदेश अध्यक्ष बना दिया। तब स्वतंत्र देव योगी कैबिनेट में परिवहन मंत्री हुआ करते थे।
2022 में हो रही नए प्रदेश अध्यक्ष की तलाश : यूपी चुनाव जीतने के बाद स्वतंत्र देव सिंह को योगी कैबिनेट में फिर से मंत्री बना दिया गया है। अब एक बार फिर से नए प्रदेश अध्यक्ष को लेकर चर्चाएं शुरू हो गई हैं। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता कहते हैं, 'इस बार भी नए प्रदेश अध्यक्ष का नाम सबको हैरान कर देगा। जो कयास लगाए जा रहे हैं, उसके उलट होगा।'
इन नामों की चर्चा सबसे ज्यादा?
दिनेश शर्मा : प्रदेश अध्यक्ष के लिए योगी की पहली कैबिनेट में डिप्टी सीएम रहे डॉ. दिनेश शर्मा के नाम की चर्चा सबसे आगे है। कहा जा रहा है कि इस बार चुनाव हारने के बाद भी केशव प्रसाद मौर्य को डिप्टी सीएम बना दिया गया। ऐसे में ये तय है कि डॉ. दिनेश शर्मा भी बड़ी भूमिका में होंगे।
श्रीकांत शर्मा : योगी की पहली कैबिनेट में उर्जा मंत्री रहे श्रीकांत शर्मा को इस बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। माना जा रहा है कि श्रीकांत शर्मा को प्रदेश अध्यक्ष बनाया जा सकता है। श्रीकांत ब्राह्मण वर्ग से आते हैं और युवा चेहरा हैं। उर्जा मंत्रालय संभालते हुए उन्होंने काफी अच्छा काम भी किया।
अशोक कटारिया : योगी कैबिनेट में परिवहन मंत्री रहे अशोक कटारिया को भी इस बार मंत्रिमंडल में जगह नहीं मिली। अशोक पश्चिमी यूपी में गुर्जर वर्ग के बड़े नेता हैं। ये भी कहा जा रहा है कि पश्चिमी यूपी में वोटर्स की नाराजगी दूर करने के लिए अशोक को यूपी की कमान सौंपी जा सकती है।
प्रो. राम शंकर कठेरिया : समाजवादी पार्टी के गढ़ इटावा से भाजपा के दलित सांसद प्रो. राम शंकर कठेरिया को भाजपा यूपी की कमान मिल सकती है। प्रो. राम शंकर यूपी में भाजपा के बड़े दलित नेता हैं।
विनोद सोनकर : भाजपा के राष्ट्रीय अनुसूचित जाति मोर्चा के अध्यक्ष और कौशांबी से सांसद विनोद सोनकर का नाम भी नए प्रदेश अध्यक्ष के लिए चल रहा है। विनोद सोनकर राष्ट्रीय मंत्री भी हैं।
दलित वर्ग के इन नामों की भी चर्चा
पार्टी के तमाम दलित नेताओं के प्रभाव का आंकलन कर उनके नाम पर मंथन शुरू कर दिया गया है। यूपी भाजपा अध्यक्ष पद के लिए आलाकमान की नजर मोहनलालगंज से सांसद और केंद्र सरकार में मंत्री कौशल किशोर, मिश्रिख से सांसद अशोक रावत, मछलीशहर से सांसद भोलानाथ सरोज, जालौन से सांसद भानु प्रताप सिंह वर्मा, हरदोई से जय प्रकाश, बुलंदशहर के सांसद भोला सिंह पर भी है।

मोदी और शाह के साथ यूपी की लीडरशिप ने की थी मुलाकात
यूपी में दोबारा सरकार बनने के बाद एक बार फिर यूपी की कमान योगी आदित्यनाथ को सौंपी गई। दूसरी बार सीएम बनने के बाद योगी के मंत्रिमंडल में प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्रदेव सिंह को भी जगह दी गई जिसके बाद यूपी का प्रदेश अध्यक्ष का पद एक बार फिर खाली हो गया। हालांकि स्वतंत्रदेव अभी प्रदेश अध्यक्ष बने हुए हैं लेकिन जल्द ही यूपी बीजेपी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल सकता है। सूत्रों की माने तो योगी ने हाल ही में जब केशव मौर्या और ब्रजेश पाठक के साथ पीएम मोदी और अमित शाह से मुलाकात की थी तब प्रदेश अध्यक्ष के नामों पर भी चर्चा हुई थी। ऐसी अटकलें लगाई जा रही हैं कि जल्द ही बीजेपी को नया प्रदेश अध्यक्ष मिल सकता है।












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