UP में 14 करोड़ मतदाताओं का वोट सहेजने की कवायद, 5 लाख पन्ना प्रमुखों के जरिए घर-घर पहुंचेगी BJP

लखनऊ, 20 सितंबर: भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनावों में पार्टी को चुनावी रूप से अधिक प्रभावी बनाने के लिए पन्ना प्रमुखों की भूमिका और बढ़ाने का फैसला किया है। भाजपा के पदाधिकारियों की माने तो इस लक्ष्य को प्राप्त करने के लिए, भाजपा अपने 1.63 करोड़ बूथों में पन्ना प्रमुखों को महत्वपूर्ण विधानसभा चुनावों से पहले मजबूत करने का लक्ष्य बना रही है, जिसमें वे मतदाताओं में से पन्ना प्रमुखों को चुनकर एक विशेष बूथ पर संवाद करेंगे। इसके तहत हर बूथ पर 100 नए लोगों को जोड़ने का टास्क बूथ कमेटियों को पकड़ाया गया है। इसके लिए अक्टूबर के दूसरा सप्ताह में पन्ना प्रमुखों के कार्यक्रम भी आयोजित किए जाएंगे।

बीजेपी

अक्टूबर के दूसरे सप्ताह में तीन दिवसीय पन्ना प्रमुख सम्मेलन आयोजित करने का निर्णय लिया गया है। सम्मेलन का आयोजन पूरे उत्तर प्रदेश में किया जाएगा। दरअसल सबसे पहले गुजरात विधानसभा चुनाव में पार्टी ने केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह को नारायणपुरा इलाके का पन्ना प्रमुख बनाया था. जबकि पन्ना प्रमुख को एक मोहल्ले से चुना जाना है, यह जरूरी नहीं था कि उन्हें 30 घरों का मतदाता होना चाहिए, जिसके लिए उन्हें प्रभारी बनाया गया है। एक बूथ पर 10 से 15 प्रमुख हैं। सूत्र बताते हैं कि इस बार पार्टी अधिक सूक्ष्म प्रबंधन की राय रखती है और पन्ना प्रमुख के रूप में प्रति सूची एक मतदाता है।

भाजपा के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी कहते हैं कि,

''पहली बार पूर्व मुख्यमंत्री कल्याण सिंह ने अपने समय में चुनाव के दौरान पन्ना प्रमुखों नियुक्ति शुरू की थी। दरअसल उस समय गुजरात से एक नया कान्सेप्ट आया था और उपर से भी कहा गया था कि हर बूथ स्तर पर पन्ना प्रमुखों को नियुक्त किए जाएं। इस मैनेजमेंट की गणित को कल्याण सिंह ने भी समझ लिया था और इसको भांपते हुए उन्होंने अपने समय में भी इसको पूरी तरह से लागू करने का प्रयास किया था।''

60 से अधिक मतदाताओं के प्रमुख को पन्ना प्रमुख का नाम दिया गया
भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा, "हमने तय किया है कि इस चुनाव में, हमारे पन्ना प्रमुखों को भी मतदाता सूची से मतदाता बनना होगा। 60 से अधिक मतदाताओं में एक प्रमुख होगा। प्रमुख मतदाताओं के साथ संवाद और समन्वय करेंगे।" मतदाताओं के बीच अपने समर्थन को मजबूत करने के लिए पार्टी द्वारा आंतरिक व्यवस्था को मजबूत करने के लिए, पार्टी ने फैसला किया है कि पन्ना प्रमुखों को उस समूह के मतदाताओं में से एक होना चाहिए, जिसका उन्हें प्रभार दिया गया है।

स्वतंत्र देव सिंह

वाटरों को बाहर लाने की जिम्मेदारी पन्ना प्रमुखों को पकड़ाई गई

देश भर के चुनावों में पूर्व भाजपा अध्यक्ष अमित शाह द्वारा इसे लागू किया गया था, ताकि यह सुनिश्चित किया जा सके कि इसके समर्थक बाहर आएं और मतदान करें। यह हाल ही में भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा द्वारा शुरू किए गए 'बूथ विजय अभियान' शुरू किया गया है। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव अगले साल की शुरुआत में होने हैं। 2017 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने 312 विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। पार्टी ने 403 सदस्यीय विधानसभा के चुनाव में 39.67 प्रतिशत वोट शेयर हासिल किया। समाजवादी पार्टी (सपा) को 47 सीटें, बसपा ने 19 सीटें जीतीं, जबकि कांग्रेस केवल सात सीटों पर जीत हासिल कर सकी थी

क्या है पन्ना प्रमुखों का गणित, ऐसे समझिए
दरअसल उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में 14.05 करोड़ से अधिक मतदाता हैं और इन मतदाताओं के लिए यूपी में 1.65 लाख पोलिंग बूथ होते हैं। इन बूथों पर 800-1200 मतदाता वोट डालने के लिए पंजीकृत होते हैं। करीब1200 मतदाताओं के नाम 15-20 पन्नों पर दर्ज होते हैं और हर पन्ने पर 50-60 मतदाताओं का नाम होता है। भाजपा के एक पदाधिकारी ने बताया कि 1 पन्ना प्रमुख पर 2 पन्ने यानि 100-150 मतदाताओं के वोट की जिम्मेदारी होती है और पन्ना प्रमुख अपने हिस्से के वोटरों को सहेजने का काम करता है।

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