UP BJP के नए बॉस को लेकर चल रहा मंथन, जानिए मिशन 2024 को लेकर ब्राह्मण फेस क्यों होगा अहम
लखनऊ, 30 अप्रैल: उत्तर प्रदेश में भारी बहुमत से हुए विधानसभा चुनाव में जीत के बाद भारतीय जनता पार्टी ने राज्य में सरकार बना ली है और योगी कैबिनेट का भी गठन हो गया है। लेकिन पार्टी ने अभी तक मुखिया के नाम पर मुहर नहीं लगा पाई है। राज्य में संगठन के वर्तमान प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह अब योगी मंत्रिमंडल में शामिल हो गए हैं और एक व्यक्ति एक पद के नियम के तहत, उन्हें राज्य संगठन की कमान से हटना पड़ेगा। चर्चा है कि पार्टी प्रदेश अध्यक्ष के रूप में एक ब्राह्मण नेता को कमान सौंपना चाहती है। चर्चा है कि भाजपा संगठन की कमान एक ब्राह्मण नेता को सौंप सकती है। लोकसभा चुनाव में पार्टी को इसका फायदा मिलता है। बीजेपी के सूत्रों की माने तो पिछले दोनों लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने ब्राह्मण फेस पर ही दांव लगाया था और उसे चुनावों में शानदार जीत मिली थी।

पार्टी में ब्राह्मण नेताओं की लंबी कतार लेकिन कप्तान कौन होगा
पार्टी में ब्राह्मण नेताओं की लंबी कतार है और पार्टी के लिए इनमें से किसी एक को चुनना मुश्किल काम है. क्योंकि ब्राह्मणों के साथ-साथ पार्टी को क्षेत्रीय समीकरण भी बनाने हैं। बताया जा रहा है कि पिछली भाजपा सरकार में उपमुख्यमंत्री रह चुके दिनेश शर्मा का नाम भी प्रदेश में संगठन प्रमुख की दौड़ में चल रहा है। इसके अलावा बीजेपी के सांसद सतीश गौतम के नाम पर भी मंथन चल रहा है। सतीश गौतम के साथ ही सुब्रत पाठक भी इस रेस में शामिल हैं।
बीजेपी में इन नामों पर भी हो रही चर्चा
इससे प्रदेश महासचिव गोपाल नारायण शुक्ला, बस्ती सांसद हरीश द्विवेदी और पूर्व ऊर्जा मंत्री श्रीकांत शर्मा समेत कई नाम शामिल हैं। दरअसल बीजेपी प्रदेश अध्यक्ष की कुर्सी पर एक ब्राह्मण नेता को नियुक्त कर ब्राह्मणों को यह संदेश देना चाहती है कि पार्टी में उनका पूरा सम्मान है। बीजेपी की नजर 2024 में होने वाले लोकसभा चुनाव पर है और वह किसी भी कीमत पर ब्राह्मण बिरादरी को परेशान नहीं करना चाहती।

राज्य में ब्राह्मणों की आबादी 10 फीसदी से ज्यादा
राज्य में कुल जनसंख्या में ब्राह्मणों की संख्या 10 प्रतिशत से अधिक है और वे किसी भी पार्टी की जीत और हार में बहुत महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। बीजेपी के प्रति ब्राह्मणों की नाराजगी को लेकर विपक्षी दलों ने राज्य की योगी सरकार पर हमला बोला था। लेकिन चुनावों में ब्राह्मणों ने बीजेपी पर भरोसा जताया है। जिससे पार्टी ने राज्य में एक बार फिर सत्ता पर कब्जा जमा लिया है। बीजेपी की रिपोर्ट के मुताबिक राज्य में हुए विधानसभा चुनाव में पार्टी को ब्राह्मण समुदाय के 89 फीसदी वोट मिले हैं।
ब्राह्मण विरोधी का टैग हटाना चाहती है बीजेपी
प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार की पिछली सरकार पर ब्राह्मण समाज की उपेक्षा करने का आरोप लगा था। विपक्षी दलों ने कई ऐसे मुद्दे भी उठाए, जिन्हें लेकर सूबे की तत्कालीन योगी आदित्यनाथ सरकार बैकफुट पर थी। इसलिए इस बार पार्टी सुचारु रूप से चल रही है। पार्टी ने योगी कैबिनेट में ब्रजेश पाठक को डिप्टी सीएम बनाकर उनका कद बढ़ाया है। जबकि पिछली सरकार में वह कैबिनेट मंत्री थे। बीजेपी अब फिर से राज्य संगठन की कमान ब्राह्मण वर्ग के किसी व्यक्ति को ब्राह्मणों को लुभाने के लिए सौंप सकती है।












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