BJP का मुस्लिम कनेक्ट: 2024 से पहले यूपी में PM मोदी के "मन की बात' की 1 लाख उर्दू प्रतियां बाटेगी बीजेपी
बीजेपी मुसलमानों को साधने के लिए अब कई जतन कर रही है। हिन्दूवादी पार्टी होने का तमगा अपने उपर से हटाने की छटपटाहट बीजेपी के अंदर दिख रही हे। इसलिए अब वह मुस्लिम समाज के बीच मोदी के भाषण की प्रतियां बांटेगी।

Bhartiya Janta Party: उत्तर प्रदेश में निकाय चुनाव को सेमीफाइनल मांगकर चुनावी तैयारियों में जुटी का मेन टारगेट 2024 में होने वाला आम चुनाव है। इस लिहाज से बीजेपी अब हिन्दी पट्टी में मुस्लिम कनेक्ट की कवायद में जुटी हुई है। एक तरफ बीजेपी का सबका साथ सबका विकास का नारा है तो दूसरी ओर अब बीजेपी यूपी में पीएम मोदी के मन बी बात की एक लाख उर्दू प्रतियां इस समुदाय में बांटने का काम करेगी। बीजेपी की इस रणनीति के केंद्र में खासतौर से वो 14 लोकसभा सीटें हैं जो बीजेपी पिछली बार हार गई थी।
मुस्लिम समुदाय में बांटी जाएंगी एक लाख प्रतियां
बीजेपी के एक पदाधिकारी ने बताया कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के 'मन की बात' को मुस्लिम समुदाय के हर तबके तक ले जाने के लिए भाजपा 150 पन्नों की किताब की एक लाख प्रतियां छाप रही है, जिसे रमजान के दौरान एक "भव्य समारोह" में बांटा जाएगा। 'वज़ीर-ए-आज़म जनाब नरेंद्र मोदी के मन की बात उर्दू के साथ' 2022 में रेडियो पर प्रसारित हुए प्रधानमंत्री के भाषणों की 12 कड़ियों का संकलन है।
बीजेपी के अल्पसंख्यक मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष कुंवर बासित अली कहते हैं कि,
पीएम मोदी के मन की बात के जरिए पार्टी सरकार की प्राथमिकता को मुस्लिम समुदाय तक पहुंचाना चाहती है। इस किताब का फोकस यूपी की उन 14 सीटों पर होगा जहां बीजेपी हार गई थी। प्रधानमंत्री मोदी सबके नेता हैं। कोई राजनीतिक मंशा नहीं है, बल्कि सबका विकास की बात है। उनका संदेश मुसलमानों तक और उनकी भाषा में भी पहुंचना चाहिए।
बीजेपी की विचारधारा ही मुस्लिम विरोधी
हालांकि विपक्ष अब मुस्लिम समुदाय को खुश करने के लिए सरकार पर निशाना साध रहा है। समाजवादी पार्टी के प्रवक्ता राजीव राय ने कहा कि भाजपा की विचारधारा पिछड़े समुदाय और मुस्लिम विरोधी है। पीएम मोदी की सोच भी यही है। आज तक कोई पूर्णकालिक केंद्रीय अल्पसंख्यक मंत्री नहीं है। उन्होंने मुसलमानों को भिखारी का कटोरा देने का काम किया। पार्टी ने धर्म के आधार पर भेदभाव किया और बुलडोजर कार्रवाई केवल यूपी में दलितों और मुसलमानों पर की गई।
पीएम मोदी के वादों का क्या हुआ?
राय ने कहा कि पीएम ने कहा था कि एक मुसलमान के हाथ में कुरान और लैपटॉप होगा, लेकिन कुछ नहीं हुआ। भाजपा और आरएसएस मुसलमानों को डराने और अपने हिंदुत्व के साथ वोट हासिल करने की कोशिश कर रहे हैं। यह देश जितना हिन्दुओं का है उतना ही मुसलमानों का भी है। इस किताब को बांटने से कुछ नहीं होगा। भाषण देने से इन लोगों की किस्मत नहीं बदल जाती है।
अनुवाद चाहे उर्दू में हो या फ्रेंच में यह आम आदमी के काम की नहीं
कांग्रेस प्रवक्ता अंशु अवस्थी ने पुस्तक विमोचन पर सवाल उठाते हुए कहा कि पीएम मोदी भले ही 'मन की बात' की बात करते हों, लेकिन वह कभी लोगों, किसानों, युवाओं, महंगाई या चीन की बात नहीं करते। मोदी-अडानी भाई कभी बात नहीं करते। अब वह बात करना चाहता है कि उसके दिमाग में क्या है। चाहे इसका अनुवाद उर्दू में हो या फ्रेंच में, यह लोगों के काम नहीं आता। उन्हें बताना होगा कि पिछले 10 साल में क्या किया गया है।
कथनी और करनी में फर्क नहीं होना चाहिए
राजनीतिक विज्ञान के पूर्व प्रोफेसर दानिश खान कहते हैं कि, कोई भी पार्टी मुसलमानों के करीब आ सकती है, लेकिन उनकी कथनी और करनी में कोई फर्क नहीं होना चाहिए। अगर किसी पार्टी के नेता मुसलमानों तक अपनी बात पहुंचाना चाहते हैं तो ले सकते हैं लेकिन ऐसे लोगों को भी पार्टी से प्रतिबंधित किया जाना चाहिए जो अपने नफरत भरे भाषणों से मुस्लिम समुदाय के बीच जहर फैलाने की कोशिश करते हैं। मुस्लिम कल्याण को लेकर पार्टी को अपने इरादे स्पष्ट करने चाहिए।
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