Mainpuri loksabha by Election में समाजवादी पार्टी को धूल चटाने की तैयारी में BJP, ये रहा गेम प्लान
Mainpuri loksabha by Election : उत्तर प्रदेश में मैनपुरी चुनाव को लेकर एक तरफ जहां समाजवादी कुनबा पूरी ताकत लगाए हुए है वहीं दूसरी ओर बीजेपी भी सधी हुई रणनीति पर आगे बढ़ रही है। बीजेपी का पूरा फोकस मैनपुरी के दलित वोट बैंक और शाक्य वोट बैंक पर है। बीजेपी के रणनीतिकारों को लगता है कि यदि इन दोनों समुदायों को साधने में बीजेपी कामयाब हो गई तो निश्चित तौर पर वह जीत के काफी करीब पहुंच जाएगी। बीजेपी के सूत्रों की माने तो चुनावी मैदान से बसपा की मुखिया मायावती के न लड़ने की वजह से भाजपा ने उपचुनाव के लिए मैनपुरी में दलित मतदाताओं तक पहुंचने के लिए तीन दिवसीय अभियान चलाने की योजना बनाई है।

24 नवंबर से बीजेपी दलित बस्तियों में चलाएगी अभियान
बीजेपी के एक वरिष्ठ नेता ने बताया कि मैनपुरी में दलितों के बीच 24 नवंबर से शुरू होने वाला यह अभियान अनिवार्य रूप से भाजपा के 'बस्ती संपर्क अभियान' का हिस्सा होगा, जिसमें दलित मतदाताओं से मुलाकात और उनकी बुनियादी जरूरतों को पूरा करने की कोशिश की जाएगी। विशेषज्ञों का कहना है कि मैनपुरी में दलित मतदाताओं का 6% हिस्सा भाजपा और सपा दोनों के लिए चुनावी रूप से महत्वपूर्ण होगा, जिन्होंने बसपा के साथ गठबंधन में 2019 का लोकसभा चुनाव लड़ा था।

मैनपुरी लोकसभा में हैं लगभग 350 दलित बस्तियां
यूपी बीजेपी एससी एवं एसटी मोर्चा के प्रमुख राम चंद्र कन्नौजिया ने कहा कि अभियान मुख्य रूप से ब्रज क्षेत्र के लिए होगा जिसमें मैनपुरी भी शामिल है। पश्चिम यूपी क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली रामपुर और खतौली विधानसभा सीटों पर पहले ही अभियान चलाया जा चुका है। दरअसल एक अनुमान के मुताबिक, मैनपुरी में करीब 350 बस्तियां हैं जहां दलितों की अच्छी खासी आबादी है। किशनी विधानसभा क्षेत्र, जो एक आरक्षित विधानसभा सीट है, में इस तरह की सबसे अधिक बस्तियां हैं। दलितों की जसवंत नगर निर्वाचन क्षेत्र में भी बड़ी उपस्थिति है, जो पहले इटावा संसदीय सीट का हिस्सा होता था। इटावा का प्रतिनिधित्व भाजपा के दलित नेता राम शंकर कठेरिया करते हैं।

मैनपुरी के अलावा ब्रज के सभी 19 जिलों में चलेगा यह अभियान
कनौजिया कहते हैं कि, "हमारी पार्टी दलितों के बीच काम कर रही है। कन्नौजिया ने टीओआई से बात करते हुए कहा, हमें बस इतना करना है कि उन्हें और मजबूत करना है। भाजपा अनुसूचित जाति एवं जनजाति के राष्ट्रीय अध्यक्ष लाल सिंह आर्य की उपस्थिति में आगरा से ब्रज क्षेत्र के सभी 19 जिलों में औपचारिक रूप से अभियान की शुरुआत की जाएगी।" मैनपुरी में इस अभियान का नेतृत्व करने वाले कनौजिया ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ता केंद्र और राज्य की भाजपा सरकारों द्वारा शुरू की गई विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं के बारे में लोगों को बताने की कोशिश कर रहे हैं।

पिछली बार घट गया था मुलायम की जीत का अंतर
दरअसल सपा ने जहां पार्टी अध्यक्ष अखिलेश यादव की पत्नी डिंपल को मैदान में उतारा है, वहीं भाजपा ने सपा से पाला बदलकर आए रघुराज सिंह शाक्य पर दांव लगाया है। जानकारों का कहना है कि उपचुनाव से पहले अखिलेश और उनसे अलग रह रहे उनके चाचा शिवपाल यादव के बीच निकटताने बीजेपी की टेंशन बढ़ा दी है। भाजपा के एक वरिष्ठ नेता ने कहा कि मुलायम की जीत का अंतर 2014 में 2.6 लाख से घटकर 2019 में केवल 94,000 से अधिक हो गया था। तब सपा और बसपा के बीच गठबंधन था और मायावती मुलायम के लिए प्रचार करने आई थीं।"

मायावती के न लड़ने का फायदा उठाने की कोशिश
मैनपुरी लोकसभा उपचुनाव में बीजेपी दलितों पर फोकस करने का एजेंडा अपना रही है। बीजेपी को पता है कि मैनपुरी जीतना है तो दलितों को साधना ही होगा। मैनपुरी सीट पर करीब डेढ़ लाख दलित वोटर हैं और बसपा के चनुाव न लड़ने से ये वोट बैंक किस करवट बैठेगा यह कहना मुश्किल है। बीजेपी की कोशिश है कि मायावती के न लड़ने का लाभ उठाया जाए जिससे सपा को मात दी जा सके।












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