कानपुर विकास प्राधिकरण में महाघोटाला, अधिकारियों ने अरबों की सरकारी जमीन बेची

यूपी के कानपुर विकास प्राधिकरण में अरबों का महाघोटाला सामने आया है। विभाग के अधिकारियों ने दलालों से मिलकर अरबो की सरकारी जमीन बेच दी। केडीए उपाध्यक्ष ने इस मामले में जांच के आदेश दिए है।

कानपुर। जब से उत्तर प्रदेश में बीजेपी सरकार आई है पूर्व की सरकारों में हुए घोटाले लगातार खुलते जा रहे हैं। एक ऐसा ही खुलासा हुआ है कानपुर विकास प्राधिकरण में जंहा सरकारी अफसरों ने दलालो से मिलीभगत करके अरबो की जमीन फर्जी दस्तावेजों के माध्यम से बेच दी। कानपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष ने इस महा घोटाले पर जांच बैठा दी है।

कानपुर विकास प्राधिकरण में घोटाला, अरबों की सरकारी जमीन बेची

कानपुर विकास प्राधिकरण में सन 2002 से लेकर 2015 तक में सरकारी अफसरों ने महाघोटाला कर दिया। सरकारी अफसरों ने दलालों से मिलीभगत करके अरबों की जमीन बेच डाली। कानपुर के योजना संख्या जूही कला, ब्लॉक डब्लू -2 में अरबों की जमीन को बेच डाला गया और केडीए में उसका एक भी पैसा जमा नहीं हुआ। केडीए के अभिलेखों में इस योजना संख्या की जमीन अभी भी केडीए की है। जब इन दस्तावेजों को लेकर मौके पर पहुंचकर हकीकत जानी तो चौंकाने वाली तस्वीरें सामने आई। जूही कला योजना में भूखंड संख्या 120, कानपुर देहात की रहने वाली विध्यादेवी को बेचकर प्लाट की फर्जी रजिस्ट्री करा दी गयी। इसके बाद विध्यादेवी ने अपने प्लाट को फर्जी रजिस्ट्री पर त्रिपाठी फैमली को बेच दिया। यह केवल एक प्लाट की बात नहीं है ऐसे करीब 500 प्लाटों में सरकारी अफसरों ने हेर फेर करके बेच दिया। एक समाजसेवी ने केडीए उपाध्यक्ष से मिलकर जब इसकी शिकायत की तो उन्होंने जांच करने के बाद कार्यवाही करने की बात कही। शिकायतकर्ता ने बताया की करीब 500 प्लाट केडीए के कर्मचारियों ने मिलीभगत करके बेच दिया। प्लाटों के बेचने के बाद उनकी फर्जी रजिस्ट्रियां कर दी गयी और उसका पैसा केडीए में जमा नहीं किया गया। इसकी शिकायत उप मुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य और केडीए उपाध्यक्ष को दी जा चुकी है।

अब आपको बताते है की केडीए के बाबुओ ने किस तरह से प्लाटो को फर्जी बेचा। इस योजना संख्या में 100 प्लाटो में 80 प्लाट तो एक नंबर में बेचे और बाकी 20 प्लाटो को फर्जी तरीके से बेचे गए। उप मुख्यमंत्री ने जांच होने की बात कही थी लेकिन अभी तक कुछ नहीं हुआ। शिकायतकर्ता का कहना है की इस महा घोटाले में केडीए अधिकारियो की मिलीभगत है।

शिकायतकर्ता ने केडीए उपाध्यक्ष से मिलकर जब उनको जानकारी दी तो उन्होंने इस महाघोटाले जांच बैठा दी। केडीए उपाध्यक्ष का कहना है कि केडीए की योजना के प्लाट यंहा के कर्मचारी आपस में मिलकर बेच रहे है। 11 बैनामा की कापियां मिली है सचिव के माध्यम से समिति बनाकर जांच करवाई जा रही है। अगर जांच में सही पाया जाएगा तो मुकदमा दर्ज करवाया जाएगा और जो कर्मचारी इसमें लिप्त होंगे उनको बर्खास्त किया जाएगा।

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