कुछ की चुनावी मैदान में तो कुछ की मैदान के बाहर साख दांव पर
छठे चरण में बड़े दिग्गज नेताओं की साख लगी है दांव पर, मुलायम सिंह, योगी आदित्यनाथ जैसे नेताओं पर बेहतर प्रदर्शन का दबाव
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चुनाव तकरीबन अपने अंतिम पड़ाव पर पहुंच चुका है, पांच चरणों के मतदान हो चुके हैं और शनिवार को प्रदेश में छठे चरण का मतदान होना है। इस चरण में तमाम दलों के दिग्गज नेताओं की साख दांव पर है। एक तरफ जहां सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव के संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ में इस चरण में मतदान होना है तो वहीं केंद्रीय मंत्री कलराज मिश्रा के संसदीय क्षेत्र देवरिया में भी इस चरण में मतदान होना है। भाजपा के फायर ब्रांड नेता योगी आदित्यनाथ की भी साख देवरिया में दांव पर है, उनके संसदीय क्षेत्र में माना जा रहा है कि भाजपा का वर्चस्व है। एक तरफ जहां योगी आदित्यनाथ के संसदीय क्षेत्र गोरखपुर में मतदान होगा तो दूसरी तरफ डॉन मुख्तार अंसारी के भाग्य का फैसला भी मऊ की जनता करेगी।

जेल में बंद अंसारी की साथ दांव पर
मुख्तार अंसारी मौजूदा समय में पूर्व भाजपा विधायक की हत्या के आरोप में लखनऊ जेल में बंद है, लेकिन जेल के भीतर से भी वह चुनावी मैदान में हैं। इस बार बसपा के टिकट पर वह मऊ से चुनाव लड़ रहे हैं, वहीं अंसारी का बेटा अब्बास अंसारी और दो भाई अफजाल अंसारी और सिब्बेतुल्लाह अंसारी भी चुनावी मैदान में हैं। अंसारी के भाई अफजाल अंसारी का दावा है कि उनका चार जिलों की 28 सीटों पर प्रभाव है, ऐसे में यह देखना दिलचस्प होगा कि मऊ की जनता अंसारी को पसंद करती है या नहीं।

बसपा से भाजपा में शामिल होने वाले मौर्या भी मैदान में
किसी जमाने में बसपा के सबसे कद्दावर नेता के तौर पर जाने जाने वाले स्वामी प्रसाद मौर्या भी इस बार अपना पाला बदल चुके हैं और भाजपा के टिकट पर अपनी किस्मत आजमा रहे हैं। वह कुशीनगर की पडरौना सीट से मैदान में हैं। मौर्या को पूर्वांचल का बड़ा नेता माना जाता है, ऐसे में कुशीनगर की 7 सीटों पर भाजपा को उनसे काफी उम्मीदे हैं। वर्ष 2012 के चुनाव नतीजों पर नजर डालें तो यहां सपा के खाते में 3, कांग्रेस के खाते में 2, बसपा के खाते में 2 और भाजपा के खाते में सिर्फ एक ही सीट आई थी।

कांग्रेस के लिए आरपीएन सिंह का सहारा
उत्तर प्रदेश के मैदान में कांग्रेस अपनी पूरी ताकत झोंक रही है और इसी कड़ी में पार्टी में पहली बार सपा के साथ गठबंधन किया है। पूर्व केंद्रीय मंत्री आरपीएन सिंह का वास्ता कुशीनगर से ही है और वह पार्टी के बड़े नेता के तौर पर देखे जाते हैं। पडरौना आऱपीएन सिंह का संसदीय क्षेत्र रहा है, इस बार यहां से कांग्रेस दो सीटों पर चुनाव लड़ रही है, ऐसे में सपा के साथ गठबंधन के बाद पार्टी को उम्मीद है कि वह बेहतर प्रदर्शन करेगी।

परिवार के विवाद के बीच मुलायम के प्रभाव की परीक्षा
यूं तो समाजवादी पार्टी में विवाद के बाद मुलायम सिंह यादव ने खुद को प्रचार अभियान से दूर कर लिया है और छठे चरण तक उन्होंने महज दो रैलियों को संबोधित किया है, लेकिन उनके संसदीय क्षेत्र आजमगढ़ से सपा को काफी उम्मीदे हैं। पार्टी को उम्मीद है कि आजमगढ़ की 10 सीटों पर वह बेहतर प्रदर्शन करेगी। पिछले चुनाव में आजमगढ़ से सपा ने 10 में से 9 सीटे अपने नाम की थी।

क्या चलेंगा फायरब्रांड योगी आदित्यनाथ का जादू
पूर्वांचल में भाजपा के लिए सबसे बड़ा चेहरा योगी आदित्यनाथ हैं और काफी हद तक पार्टी उनपर निर्भर है। योगी आदित्यनाथ के यहां प्रभाव का इस बात से अंदाजा लगाया जा सकता है कि वह जिस नेता को टिकट देने की मांग करते हैं पार्टी उन्हें टिकट देती है। हालांकि 2012 में गोरखपुर की 9 में से भाजपा को सिर्फ 3 सीटें हासिल हुई थी, लेकिन इस बार पार्टी को उम्मीद है कि पार्टी इस बार यहां सबसे ज्यादा सीटें जीतेगी।

कलराज मिश्रा के लिए पीएम की अपेक्षा पर खरा उतरने की चुनौती
कलराज मिश्रा देवरिया से भाजपा सांसद हैं और केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं, देवरिया में ब्राह्मण वोटों को पार्टी की ओर खींचने के लिए उन्हें मंत्रीमंडल में शामिल किया गया है। ऐसे में पार्टी को उम्मीद है कि उसे देवरिया की 7 सीटों पर बेहतर परिणाम देखने को मिलेंगे। मौजूदा समय में यहां सपा के पास 5 सीटें हैं जबकि भाजपा के पास सिर्फ एक ही सीट है। ऐसे में कलराज मिश्रा के सामने बड़ी चुनौती है कि वह पीएम मोदी की अपेक्षा पर खरे उतरे।












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