चंद्रशेखर हुए डिस्चार्ज! भारी पुलिस बल के साथ घर के लिए रवाना, भीड़ ने एम्बुलेंस को लौटा दिया था वापस
भीम आर्मी चीफ चंद्रशेखर आजाद के काफिले पर बुधवार शाम सहारनपुर में कार सवार बदमाशों ने ताबड़तोड़ फायरिंग कर दी थी। जिसके बाद उन्हें तत्काल अस्पताल ले जाया गया। फिलहाल वह खतरे से बाहर हैं और उन्हें अस्पताल से डिस्चार्ज कर दिया गया है। लेकिन कार्यकर्ताओं की भीड़ ने मंगाई गई एम्बुलेंस को वापस लौट दिया था। हालाँकि, चंद्रशेखर के समझाने के बाद कार्यकर्ता शांत हुए और फिर भारी फोर्स के साथ वो घर के लिए रवाना हो गए हैं।
कारकर्ताओं ने मंगाई गई एम्बुलेंस को लौटाया
आपको बता दें कि भीम आर्मी संस्थापक चंद्रशेखर के डिस्चार्ज करने पर भीम आर्मी कार्यकर्ता भड़क गए। उन्होंने अस्पताल और प्रशासन द्वारा मंगाई गई एंबुलेंस को वापस भेजने का प्रयास किया। सैकड़ों की संख्या में मौजूद कार्यकर्ता ने अस्पताल के बाहर इखट्टे होकर सरकार के खिलाफ नारेबाजी करना शुरू कर दी। उनका कहना है कि पहले अपराधियों की गिरफ्तारी की जाए बाद में चंद्रशेखर को डिस्चार्ज किया जाए।

हमलावरों की गिरफ्तारी की जाए फिर डिस्चार्ज: कार्यकर्ता
कार्यकर्ता ने मीडिया से बात करते हुए कहा, "हमने अभी तक एक भी कार्यक्रम नहीं किया है। हमरे नेता ने कहा कि शांति बनाए रखें, तो शांति बनाई गई है। नहीं तो चंद्रशेखर पर गोली चलने का मतलब है एक-एक कार्यकर्ता पर गोली चलना। पूरी व्यवस्था बंद की जानी चाहिए थी। लेकिन जिस तरह प्रशासन कार्यवाही कर रहा है वो भी बर्दाश्त नहीं किया जाएगा। इसलिए पहले हमलावरों की गिरफ्तारी की जाए फिर डिस्चार्ज।"

भीम आर्मी चीफ ने सरकार पर साधा निशाना
उधर चंद्रशेखर आजाद ने अपने कार्यकर्ताओं को शांति बनाए रखें की अपील की। इसके बाद मीडिया से मुखातिब होते हुए उन्होंने हमले को लेकर सरकार पर निशाना साधा और कहा, "ये बिना सत्ता के सरंक्षण के नहीं हो सकता। सरकार की घोर लापरवाही है। मुख्यमंत्री का इस घटना पर बिल्कुल न बोलना स्पष्ट करता है कि वे अपराधियों को सरंक्षण दे रहे हैं। बल्कि उनके संरक्षण में अपराधी पल रहे हैं। और ये कानून व्यवस्था के लिए, लोगों का कानून व्यवस्था पर विश्वास के लिए बेहद ही खतरनाक है।"

पुलिस की कार्यवाही पर भी खड़े किये सवाल
साथ ही उन्होंने पुलिस की कार्यवाही पर भी सवालिया निशान खड़े किये है। उन्होंने कहा, "क्या इंटेलिजेंस है पुलिस की, क्या इनफार्मेशन है हमलावरों को लेकर, पुलिस के बड़े-बड़े सूत्र यहां क्यों काम नहीं आ रहे। अभी तक असली अपराधी क्यों नहीं पकडे गए हैं। उन्होंने यह भी कहा कि गाड़ी भी इसलिए बरामद हुई है क्योंकि किसी ने शिकायत की की कोई अंजान हमारी जगह पर गाड़ी खड़ी कर के गया है।

अधिकारीयों के कुत्ते तो 4-5 घंटों में तलाश लेती है पुलिस: चंद्रशेखर
उन्होंने पुलिस पर तंज कस्ते हुए कहा कि "ये वंचितों का बेटा है, अगर मर भी जाएगा तो क्या फर्क पड़ेगा, लोग भूल भी जाएंगे! यही अगर किसी रानी का बेटा नहीं है या किसी बड़े अधिकारी से जुड़ा मामला नहीं है कि 4-5 घंटे में कुत्ता बरामद हो जाएगा।" गौरतलब है कि बीते दिनों मेरठ में एक बड़ी अधिकारी के कुत्ते को ढूंढ़ने में पूरे इलाके की पुलिस लग गई थी। इस दौरान पुलिसकर्मी डोर-टू-डोर जाकर कुत्ते की खोज कर रहे थे।












Click it and Unblock the Notifications