UP News: बरेली में अचानक ड्रोन से क्यों हो रही घरों के ऊपर तलाशी? पुलिस ने 12 घंटे का दिया अल्टीमेटम

Bareilly Police: उत्तर प्रदेश (UP) के बरेली (Bareilly) में होली के पावन पर्व पर निकलने वाली पारंपरिक 'राम बारात' को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न कराने के लिए पुलिस ने कमर कस ली है। शुक्रवार को पुलिस प्रशासन ने अतिसंवेदनशील इलाकों में ड्रोन उड़ाकर छतों की सघन तलाशी ली। इस दौरान कुछ घरों की छतों पर ईंट-पत्थर जमा मिले, जिसे देख अधिकारियों के कान खड़े हो गए।

सीओ सिटी आशुतोष शिवम के नेतृत्व में पुलिस बल ने कोहाड़ापीर और बानखाना जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में फ्लैग मार्च किया। इस दौरान ड्रोन कैमरों की मदद से ऊंची इमारतों की छतों की जांच की गई। सुर्खा-बानखाना रोड पर दो मकानों की छतों पर भारी मात्रा में पत्थर और ईंट के टुकड़े पाए गए।

Police personnel PTI Photo

पुलिस ने 12 घंटे का दिया अल्टीमेटम

पुलिस ने तत्काल कार्रवाई करते हुए गृहस्वामियों को 12 घंटे का अल्टीमेटम दिया है कि वे छतें साफ करें, वरना उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई की जाएगी।

राम बारात का रूट और अभेद्य सुरक्षा

राम बारात नृसिंह मंदिर से शुरू होकर बरेली के प्रमुख चौराहों जैसे कुतुबखाना, घंटाघर, कालीबाड़ी और श्यामगंज से होते हुए वापस मंदिर पर संपन्न होगी। इस पूरे रूट की स्मार्ट सिटी कंट्रोल रूम से लाइव मॉनिटरिंग की जाएगी। सुरक्षा के लिए अतिरिक्त पुलिस बल की मांग की गई है और रूट पर अस्थाई सीसीटीवी कैमरे भी लगाए जा रहे हैं।

अग्निशमन विभाग की सख्त एडवाइजरी

होली और होलिका दहन के दौरान होने वाली अग्नि दुर्घटनाओं को रोकने के लिए मुख्य अग्निशमन अधिकारी ने गाइडलाइंस जारी की हैं। बिजली और टेलीफोन के तारों के नीचे होलिका दहन करने पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है। लोगों से अपील की गई है कि वे किसी भी आपात स्थिति में तत्काल कंट्रोल रूम को सूचित करें।

बरेली की 'राम बारात' का गौरवशाली इतिहास

बरेली की 'राम बारात' का अपना एक अलग और गौरवशाली इतिहास है। जहां पूरे देश में राम बारात शारदीय नवरात्र या दशहरे के आसपास निकलती है, वहीं बरेली इकलौता ऐसा शहर है जहां भगवान राम की यह भव्य शोभायात्रा 'होली' के पावन अवसर पर निकाली जाती है। 160 से अधिक वर्षों से चली आ रही यह परंपरा आज भी उतनी ही जीवंत है।

होली पर निकलने का अनोखा कारण

मान्यता है कि करीब 160 साल पहले बरेली में होली के दौरान दो समुदायों के बीच कुछ विवाद हुआ था। तब आपसी भाईचारे और शांति को बहाल करने के लिए बुजुर्गों और तत्कालीन प्रशासन ने मिलकर होली के दिन राम बारात निकालने का निर्णय लिया। इसका मकसद खुशियों के रंगों के जरिए समाज को जोड़ना था। तब से लेकर आज तक यह परंपरा अटूट है।

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