यूपी में लव मैरेज का परिणाम: इंस्पेक्टर ने उखाड़ी मूंछें, पिलाई पेशाब, थाने में हत्या
बदायूं (बीपी गौतम)। उत्तर प्रदेश के बदायूं में दिल दहला देने वाली वारदात सामने आई है। जिस पुलिस को प्रेमी-प्रेमिका और उनके शुभचिंतकों की रक्षा करनी थी, उसी पुलिस ने पहले प्रेमी के ताऊ की गाँव में सरेआम बेरहमी से पिटाई की, उनकी मूंछें उखाड़ी और प्रेमिका के परिजनों की पेशाब पिलाई। पुलिस की दरिंदगी यहीं नहीं रुकी, मनमानी पर उतारू बेख़ौफ़ पुलिस ने प्रेमी के निर्दोष भाई को भी हवालात में बंद करके इतना पीटा कि उसकी मौके पर ही मौत हो गई।
दिल को झगझोर देने वाली यह घटना जनपद बदायूं में स्थित थाना हजरतपुर क्षेत्र में 7 सितंबर की है। हजरतपुर थाना क्षेत्र के गाँव बघौरा निवासी 25 वर्षीय गुड्डू (नाम बदला हुआ) और बहेलिया जाति की युवती बबली (नाम बदला हुआ) आपस में प्रेम करते हैं और दोनों शादी करना चाहते थे, पर लड़की के परिजन दबंग हैं, जिनके रहते गाँव में विवाह कर पाना संभव नहीं था, इसलिए करीब तीन माह पहले गुड्डू और बबली घर छोड़कर चले गये और शादी कर ली।

बबली के परिजनों ने गुड्डू के विरुद्ध मुकदमा दर्ज करा दिया, लेकिन दोनों हाईकोर्ट की शरण में चले गए और खुद को बालिग बताते हुए शादी का प्रमाण पत्र न्यायालय के समक्ष रख दिया, जिस पर न्यायालय ने पुलिस को मुकदमा खत्म कर प्रेमी-प्रेमिका को सुरक्षा देने का आदेश दिया। गुड्डू-बबली को लगा कि अब सब ठीक हो जायेगा। लेकिन उन्हें यह नहीं मालूम था कि जिस यूपी पुलिस को उनकी रक्षा करने के आदेश दिये गये थे, वही उनके लिये भक्षक का काम करेंगे।
पुलिस को पहुंचाया पैसा
बबली के घर वालों ने हजरतपुर पुलिस थाने में रिश्वत के रूप में पैसा पहुंचा दिया। बस फिर क्या था पुलिस ने बबली के परिजनों के दबाव में आकर गुड्डू के परिजनों और रिश्तेदारों का उत्पीड़न शुरू कर दिया। पुलिस वाले हर रोग गुड्डू के घर का दरवाजा खटखटाते और दोनों का पता पूछते साथ ही दोनों को गाँव वापस बुलाने का दबाव बनाते। यह सिलसिला कई हफ्तों तक चलता रहा।
जब गुड्डू-बबली नहीं आये तो थानाध्यक्ष हरचरण सिंह यादव ने गुड्डू के घर में जबरन घुसकर उसके ताऊ को बाहर निकाला। गाँव में सरेआम बेरहमी से पीटा। फिर उसकी मूंछें उखाड़ ली। दर्द से करहा रहे गुड्डू के ताऊ पर बेरहमी की हद तब पार हो गई जब इंस्पेक्टर हरचरण ने बबली के घर वालों से कहा कि वो एक गिलास में अपना पेशाब लेकर आयें। इंस्पेक्टर के कहने पर बबली के चाचा गिलास में पेशाब लाये और गुड्डू के ताऊ को सबके सामने पिलाई।
थमी नहीं हैवानियत
पुलिस की हैवानियत यहां पर थम जाती, तब भी ठीक था, लेकिन हरचरण के सिर पर उस समय खून सवार था। ताऊ को बचाने के लिये आगे आये गुड्डू के भाई प्रवेश गिरी और बहनोई को घसीट कर जीप में डाला और थाने ले गया। दोनों की जमकर पिटाई की। फिर बहनोई को रिहा कर दिया, लेकिन प्रवेश की पिटाई जारी रखी। देर रात तक प्रवेश गिरी की हालत इतनी गंभीर हो गई, कि उसने हवालात में ही दम तोड़ दिया।
गुड्डू के बहनोई ने बताया कि जिस समय सिपाही प्रवेश को पीट रहे थे, उस समय इंस्पेक्टर हरचरण सिंह यादव थाने में अपनी सीट पर बैठा था, हाथ में शराब का गिलास और मेज पर बोतलें रखी थीं। उसके लिये शराब का इंतजाम भी बबली के घर वालों ने किया था। देर रात जब प्रवेश ने थाने में दम तोड़ दिया, तो इंस्पेक्टर समेत सभी पुलिसकर्मी थाना छोड़कर फरार हो गये। लाश सुबह तक हवालात में पड़ी रही। अगले दिन सुबह मूसाझाग, अलापुर और दातागंज कोतवाली की पुलिस तैनात की गई।
पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी खुलासा हुआ है कि प्रवेश की मौत पुलिस की पिटाई से ही हुई है, साथ ही थानाध्यक्ष हरचरण सिंह यादव को निलंबित करते हुए उसके साथ सब-इन्स्पेक्टर बलवीर सिंह और लड़की के परिजनों सहित दस लोगों के विरुद्ध हत्या करने और हत्या के बाद साक्ष्य मिटाने का मुकदमा दर्ज कराया गया है। एसपी सिटी मानपाल सिंह चौहान को वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक दलवीर सिंह यादव ने पूरे प्रकरण की जांच सौंपी है।
भाई के अंतिम संस्कार तक में नहीं आ सका गुड्डू
इस दर्दनाक घटना के बाद बबली और गुड्डू इतना डरे हुए हैं कि अपने भाई के अंतिम संस्कार तक में नहीं आ सके। उन्हें डर है कि गुड्डू को भी मौत के घाट उतार दिया जायेगा। मृतक के परिवार गाँव छोड़ चुके हैं। गुड्डू के अलावा और कोई सगा नहीं है, जिसका लाभ अभियुक्त उठा सकते हैं। मृतक के चचेरे भाई पटे गिरी को प्रवेश की हत्या के मुकदमे का वादी बनाया गया है, जिसे पुलिस कभी भी तोड़ सकती है। पुलिस और लड़की के परिजनों के विरुद्ध लिखे गए इस मुकदमे का दुखद अंत होने की ही संभावना है, क्योंकि अभी तक एक भी गिरफ्तारी नहीं हुई है, जबकि अभियुक्त खुलेआम घूम रहे हैं। दर्दनाक घटना होने के बावजूद पुलिस की कार्यप्रणाली में कोई परिवर्तन नहीं आया है।
असलियत तो यह है कि प्रेमी युवक गुड्डू जिस जाति का है, उनकी संख्या क्षेत्र में कम है और आर्थिक स्थिति भी अच्छी नहीं है, जबकि लड़की बहेलिया जाति की है, जिनकी संख्या ज्यादा है और अधिकांश दबंग भी हैं और उन्हें नेताओं का भी सरंक्षण प्राप्त है। पुलिस की भूमिका सही रही होती, तो बालिग प्रेमी गाँव से भागते ही नहीं। प्रेमियों का निर्णय अब सही लगता है, क्योंकि खुद हत्या करने वाली पुलिस से कोई मदद की आशा कैसे कर सकता है?
यह है इलाके की सच्चाई
इलाके का आलम यह है कि कटरी क्षेत्र में स्थित हजरतपुर थाने में अफसर सिर्फ तैनात किये जाते हैं, इलाके में आते नहीं हैं। वार्षिक मुआयने के अलावा अफसर पूरी-पूरी साल यहाँ देखने तक नहीं जाते, जिससे इस थाने में तैनात पुलिस पूरी तरह लापरवाह हो ही जाती है और जमकर मनमानी करती है। बदमाश बनने वाले अधिकांश लड़के इसी क्षेत्र के होते हैं, जो पुलिस की बर्बरता के चलते ही हथियार उठाने को मजबूर हो जाते हैं।
इस इलाके में शराब के सरकारी ठेके चल ही नहीं पाते, क्योंकि खुलेआम कच्ची शराब का कारोबार होता है। सूत्र का कहना है कि लड़की के परिजनों के साथ पुलिस ने घटना वाली रात कच्ची शराब पी थी और नशा चढ़ने पर लड़की के परिजनों के सामने ही प्रवेश की बेरहमी से पीटा था। सूत्र का यह भी कहना है कि लड़की के घर वालों ने दो दिन पूर्व जमीन बेची है और पुलिस को खूब पैसा खिला रहे हैं।












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