Azam Khan को जिस केस में मिली 3 साल की कैद, जानिए क्या था वो पूरा मामला
Azam Khan news: समाजवादी पार्टी के सबसे बड़े मुस्लिम नेता आजम खान को भड़काऊ बयान के मामले में यूपी की रामपुर की एक एमपी-एमएलए कोर्ट ने तीन साल की सजा सुनाई है और उनपर दो हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। इस फैसले के साथ ही उनकी विधायकी जानी तय मानी जा रही है। उनपर 2019 के आम चुनावों के दौरान मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ नफरत फैलाने वाली टिप्पणी के आरोप लगे थे। उनपर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रामपुर के तत्कालीन कलेक्टर आंजनेय कुमार सिंह पर भी आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप लगे थे। आजम खान पिछले मई में ही सुप्रीम कोर्ट की दखल के बाद जेल से बाहर निकले हैं।

आजम खान को किस मामले में मिली सजा
समाजवादी पार्टी के नेता आजम खान को उत्तर प्रदेश की रामपुर कोर्ट ने गुरुवार को हेट स्पीच केस में दोषी करार देते हुए उन्हें तीन साल कैद की सजा सुनाई है। एमपी-एमएलए कोर्ट ने उनपर 2 हजार रुपए का जुर्माना भी लगाया है। उनके खिलाफ हेट स्पीच का यह केस यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ भड़काऊ और आपत्तिजनक टिप्पणी करने से जुड़ा था। तब आजम ने कथित रूप से कहा था, 'यूपी की कुर्सी पर बैठा व्यक्ति 302 का मुजरिम है...... कॉन्स्टेबल का हत्यारा है....' इस मामले में अप्रैल 2019 में रामपुर में ही उनके खिलाफ मामला दर्ज किया गया था। उनपर तब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और रामपुर के तत्कालीन डीएम आंजनेय कुमार सिंह के खिलाफ भी आपत्तिजनक टिप्पणी करने के आरोप लगाए गए थे। यह मामला 2019 के लोकसभा चुनाव अभियान के दौरान का है।

आजम खान की विधायकी जानी लगभग तय
आजम खान ने तब प्रधानमंत्री मोदी पर ऐसा माहौल बनाने का आरोप लगाया था, जिससे देश में मुसलमानों का रहना मुश्किल हो जाए। इसके साथ ही उन्होंने आईएएस अधिकारी और रामपुर के तत्कालीन डीएम आंजनेय कुमार सिंह के बारे में कहा था, 'कलेक्टर-फलेक्टर से मत डरो....ये तनखैए हैं। अल्लाह ने चाहा तो चुनाव के बाद इन्हीं से जूते साफ करवाऊंगा।' लेकिन, अब उनकी यही बदजुबानी भारी पड़ गई है और उनकी विधायकी जानी लगभग तय है। क्योंकि,दो साल से ज्यादा की सजा होने पर एमपी-एमएलए की सदस्यता छिने जाने का प्रावधान है। आजम ने रामगढ़ से लोकसभा सदस्यता छोड़कर इसी साल विधायकी का चुनाव जीता था।

करीब दो साल जेल में गुजार चुके हैं आजम
समाजवादी पार्टी कार्यकाल के दौरान कैबिनेट मंत्री रहे आजम खान जमीन हड़पने के मामले में लगभग दो साल तक जेल में भी रह चुके हैं। उन्हें सुप्रीम कोर्ट से जमानत मिली थी, जिसने जमानत के लिए कठिन शर्तें लगाने पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की आलोचना भी की थी। हालांकि, उससे पहले हाई कोर्ट ने ही सपा नेता की गिरफ्तारी पर रोक भी लगाई थी और यूपी सरकार से जवाब भी मांगा था। अखिलेश यादव की सरकार के दौरान वह एक तरह से सरकार में नंबर दो के पद पर थे। रामपुर और पश्चिमी यूपी के बड़े हिस्से में उनका रुतबा तब प्रदेश के मुख्यमंत्री से कम नहीं आंका जाता था।

सपा के सबसे बड़े मुस्लिम चेहरा हैं आजम खान
समाजवादी पार्टी के सबसे बड़े मुस्लिम चेहरे और रामपुर सदर से मौजूदा विधायक आजम खान के खिलाफ भ्रष्टाचार और चोरी समेत करीब 90 केस दर्ज हैं। इनमें से ज्यादातर मामले 2017 के मार्च में भारतीय जनता पार्टी के उत्तर प्रदेश में सत्ता में आने के बाद के हैं। योगी सरकार के कार्यकाल में उनके खिलाफ जांच भी तेजी से हुई है और उसके नतीजे भी सामने आए हैं।

हेट स्पीच के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का भी रुख सख्त है
रामपुर की अदालत ने आजम खान के खिलाफ कानून का डंडा ऐसे समय में चलाया है, जब हाल ही में सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार के अलावा, दिल्ली, उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सरकारों से कहा है कि हेट स्पीच के मामले में कड़ी कार्रवाई करें। अदालत ने यह भी कहा है इस मामले में कार्रवाई में हुई देरी अदालत को अवमानना की कार्यवाही आरंभ करने का मजबूर कर सकता है।












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