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Milkipur by-poll: अयोध्या की इस सीट पर फाइट है टाइट! बागी नेताओं ने उड़ाई नींद, बीजेपी- सपा के छूट रहे पसीने

Milkipur Bypolls 2025: मिल्कीपुर में होने वाला उपचुनाव बेहद दिलचस्प होता जा रहा है, यह मुकाबला न सिर्फ भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला है, बल्कि दोनों दलों के भीतर चल रही अंदरूनी कलह का भी मैदान है। एक तरफ भाजपा अपने बागी नेताओं को मनाने में जुटी है, वहीं दूसरी तरफ सपा से आए एक नेता ने अजीत प्रसाद की मुश्किलें बढ़ा दी हैं।

मिल्कीपुर उपचुनाव के लिए सपा द्वारा अपना उम्मीदवार घोषित किए जाने के बाद, सूरज चौधरी पिछले कई वर्षों से विधानसभा सीट जीतने का दावा कर रहे थे, उन्होंने पार्टी से बगावत कर ली। अजीत की उम्मीदवारी की आधिकारिक घोषणा के बाद, चौधरी ने अपने सैकड़ों समर्थकों के साथ सपा से इस्तीफा दे दिया और आजाद पार्टी के बैनर तले निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में उपचुनाव लड़ने का फैसला किया। यह दलबदल क्षेत्र की राजनीतिक गतिशीलता में एक महत्वपूर्ण बदलाव का संकेत है।

Milkipur By-Election News

इस बीच, भाजपा को अपनी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। नामांकन के पहले दिन से ही पार्टी की अंदरूनी कलह साफ दिखाई देने लगी थी, जिससे कुंदरकी में भाजपा के लिए अप्रत्याशित चुनाव परिणाम मिल्कीपुर में भी दोहराए जाने का खतरा पैदा हो गया था। अब राज्य नेतृत्व के सामने पार्टी कार्यकर्ताओं और टिकट चाहने वालों के बीच पैदा हुई कड़वाहट को दूर करने की बड़ी चुनौती है। इन घटनाक्रमों के मद्देनजर असंतुष्ट नेताओं को मनाने की कोशिशें जारी हैं।

सपा में पारिवारिक राजनीति से विवाद
फैजाबाद अयोध्या लोकसभा सीट पर अप्रत्याशित जीत के बाद सपा में अवधेश प्रसाद का कद बढ़ने से उनके बेटे अजीत प्रसाद को मिल्कीपुर विधानसभा सीट के लिए उम्मीदवार घोषित किए जाने की संभावना है। इस कदम से पार्टी के भीतर भाई-भतीजावाद के आरोप लगे हैं और अंदरूनी बगावत की स्थिति पैदा हो गई है। परिवार केंद्रित राजनीति विवाद का विषय बन गई है, जो महत्वपूर्ण चुनाव से पहले पार्टी के अंदरूनी मतभेदों को उजागर करती है।

2017 में गोरखनाथ बाबा मिल्कीपुर से भाजपा के टिकट पर विधायक चुने गए थे, लेकिन 2022 के विधानसभा चुनाव में अवधेश से हार गए। तब से गोरखनाथ बाबा मिल्कीपुर विधानसभा क्षेत्र में सक्रिय रहे और आगामी उपचुनाव में खुद को भाजपा का उम्मीदवार मान रहे थे। हालांकि, क्षेत्र से मिली प्रतिक्रिया ने आखिरकार उनके नामांकन की उम्मीदों पर पानी फेर दिया।

बीजेपी में मान मनौव्वल का दौर जारी
मिल्कीपुर विधानसभा उपचुनाव के लिए चंद्रभान पासवान को उम्मीदवार बनाने के भाजपा के फैसले से पार्टी कार्यकर्ताओं में असंतोष साफ देखा जा रहा है। गौर करने वाली बात यह है कि पासवान के नामांकन समारोह में गोरखनाथ बाबा मंच पर नहीं दिखे, जबकि इस समारोह में जिला और प्रदेश स्तर के भाजपा नेता मौजूद रहे। जिले के प्रभारी मंत्री और अन्य स्थानीय नेताओं ने केंद्रीय नेतृत्व के निर्देश का हवाला देते हुए गोरखनाथ बाबा को मनाने की कोशिश की। वहीं राधेश्याम त्यागी का रुख अब तक क्लियर नहीं हो पाया है।

मिल्कीपुर उपचुनाव न केवल भाजपा और सपा के बीच सीधा मुकाबला है, बल्कि दोनों दलों के सामने आने वाली आंतरिक चुनौतियों भी हैं। ऐसे में दलबदल और आंतरिक असंतोष से लेकर भाई-भतीजावाद के आरोपों तक, ये घटनाक्रम चुनाव के नतीजों को प्रभावित करने की संभावना रखते हैं। मिल्कीपुर में राजनीतिक परिदृश्य विकसित होता जा रहा है, दोनों दलों की अपने आंतरिक संघर्षों को प्रबंधित करने की क्षमता इस उपचुनाव में उनकी किस्मत का निर्धारण कर सकती है।

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