अयोध्या के जरिए राज ठाकरे को उद्धव के खिलाफ इस्तेमाल करेगी BJP, जानिए इसके पीछे की सियासत
लखनऊ, 6 मई: उत्तर प्रदेश से महाराष्ट्र तक इस समय अयोध्या एक बार सियासत के केंद्र में है। हालांकि ऐसा माना जा रहा है कि अयोध्या में अगले दो महीनों में मुंबई के ठाकरे परिवार के दो सदस्यों की मेजबानी करने की संभावना है। राज ठाकरे और आदित्य ठाकरे इस समय भगवान राम के प्रति अपनी श्रद्धा दिखाने के लिए एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करते दिखाई दे रहे हैं। एक तरह से देखा जाए तो अयोध्या शिवसेना प्रमुख और महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे और उनके चचेरे भाई महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) के प्रमुख राज ठाकरे के बीच राजनीतिक विवाद का अब एक नया युद्धक्षेत्र बन गया है।

राज ठाकरे की पहली अयोध्या यात्रा पांच जून को
राज ठाकरे ने 5 जून को अपनी अयोध्या यात्रा की घोषणा की है, जो मंदिर शहर में उनकी पहली यात्रा है। अयोध्या में राज ठाकरे के उतरने से पहले, उनके भतीजे आदित्य ठाकरे के मंदिर शहर जाने की संभावना है। महाराष्ट्र के सीएम के बेटे और महा विकास अघाड़ी सरकार में पर्यटन और पर्यावरण मंत्री आदित्य ठाकरे के मई में भगवान राम को श्रद्धांजलि देने के लिए अयोध्या जाने की संभावना है। शिवसेना की ओर से अभी तक उनकी अयोध्या यात्रा की कोई आधिकारिक तारीख की घोषणा नहीं की गई है।
आदित्य भी बना रहे अयोध्या आने का प्लाान
आदित्य की घोषणा उनके चाचा और मनसे प्रमुख राज ठाकरे के कहने के बाद हुई कि वह भगवान राम का आशीर्वाद लेने के लिए अयोध्या जाएंगे। आदित्य ठाकरे का यह तीसरा अयोध्या दौरा होगा। वह अपने पिता उद्धव ठाकरे के साथ दो मौकों- 24 नवंबर, 2018 और 7 मार्च, 2020 को अयोध्या गए थे। अयोध्या में संत समुदाय भाजपा और शिवसेना के बीच बदले हुए संबंधों के कारण राज ठाकरे का स्वागत करने के लिए अधिक इच्छुक है।
शिवसेना ने बाला साहब की विचारधारा को त्याग दिया है
अयोध्या में हनुमान गढ़ी मंदिर के मुख्य पुजारी रमेश दास ने कहा कि शिवसेना ने पार्टी के संस्थापक दिवंगत बालासाहेब ठाकरे की विचारधारा को त्याग दिया है। यह अब हिंदुत्व का समर्थक नहीं है। इसके बजाय, पार्टी मुस्लिम तुष्टिकरण की नीति अपना रही है। उन्होंने कहा कि अयोध्या में संत समुदाय आदित्य ठाकरे की अयोध्या यात्रा का इंतजार नहीं कर रहा है। विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्रीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि हाल ही में, राज ठाकरे ने अपनी राजनीति बदल दी है। उनकी राजनीति अब उत्तर भारतीय विरोधी बयानबाजी पर आधारित नहीं रही। वह महाराष्ट्र की राजनीति में शिवसेना द्वारा खाली छोड़े गए राजनीतिक स्थान पर कब्जा कर रहे हैं।
सांसद ब्रजभूषण शरण ने दी है राज ठाकरे को चुनौती
राज ठाकरे ने भले ही अब हिंदुत्व की राजनीति का चोला पहन लिया हो लेकिन उनका पुराना हथकंडा अब उन्हीं के रास्ते पर रोड़ा हो गया है। यूपी के बीजेपी सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने राज ठाकरे के अयोध्या दौरे का विरोध किया है। सांसद बृजभूषण शरण सिंह ने कहा है कि अगर राज ठाकरे उत्तर भारतीयों से माफी मांगे बिना अयोध्या आते हैं तो उन्हें अयोध्या में नहीं घुसने देंगे।
विश्व हिंदू परिषद के क्षेत्रीय प्रवक्ता शरद शर्मा ने कहा कि अयोध्या में सभी का स्वागत है। आदित्य ठाकरे का भी स्वागत है। लेकिन शिवसेना अब वैसी नहीं रही, जैसी वह दिवंगत बालासाहेब ठाकरे के समय हुआ करती थी। अयोध्या में राम मंदिर निर्माण के लिए शिवसेना ने ₹1 करोड़ का दान दिया है।












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