अयोध्या के भव्य मंदिर में राम लला जल्द होंगे विराजमान, पर्यटकों की बढ़ती संख्या से रोजगार को मिल रहे नए आयाम
राम मंदिर के उद्घाटन की तैयारियां जोर-शोर से चल रही हैं। स्थानीय लोग मंदिर बनने के बाद आय के नए रास्ते खुलने से खुश हैं। देश-विदेश से आने वाले पर्यटकों और श्रद्धालुओं को दी गई सेवाओं के बदले मिलने वाले दान उनके लिए इनकम का एक नया जरिया है।
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी 22 जनवरी, 2024 को अयोध्या के राम मंदिर में भगवान राम की मूर्ति स्थापना के उत्सव में शामिल होने वाले हैं। इसके मद्देनजर शहर की पौराणिक इमारतों और मंदिरों का नवीनीकरण किया जा रहा है। राम लला की मूर्ति के स्थापना का दिन जैसे-जैसे नजदीक आ रहा है, अयोध्या में पर्यटकों की संख्या भी लगातार बढ़ रही है।

इकोनॉमिक्स टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार अयोध्या के एक स्थानीय निवासी का कहना है, "हम पिछले 8 महीनों से पर्यटकों के माथे पर तिलक लगा रहे हैं। तिलक में भगवान राम का नाम लिखा जाता है। पर्यटक अपनी इच्छा के आधार पर दान देते हैं। शहर में बहुत सारे विकास कार्य चल रहे हैं। पहले, हम सिटी गाइड के रूप में काम करते थे। हम पर्यटकों को शहर के मुख्य मंदिरों के बारे में जानकारी देते थे।"
पर्यटकों से प्राप्त दान लोगों के आय का अतिरिक्त स्रोत है
पर्यटकों की बढ़ती आवाजाही से अयोध्या के लोगों में खुशी की लहर है। स्थानीय लोगों को रोजगार के नए अवसर भी मिल रहे हैं। स्थानीय निवासियों ने पर्यटकों के स्वागत के लिए चंदन का तिलक लगाना शुरू कर दिया है, जिसमें भगवान राम का नाम लिखा जाता है। चन्दन लगाने के बदले पर्यटक दान के रूप में कुछ रुपए दे देते हैं जो उनके आय का एक नया साधन है।
देश के विभिन्न शहरों से आये पर्यटकों का कहना है कि अयोध्या विकास के चरम पर है और ये विकास कार्य उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा कराए जा रहे हैं। यहां के स्थानीय लोगों में खुशी का माहौल है।
योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली यूपी सरकार जनवरी में भव्य राम मंदिर में राम लला को विराजमान करने की तैयारी कर रही है। 22 जनवरी 2024 को यह कार्यक्रम होना है। इस आयोजन में पीएम नरेंद्र मोदी मुख्य अथिति एक रूप में मौजूद रहेंगे।
रामोत्सव समारोह के माध्यम से सरकार का लक्ष्य वर्तमान के साथ-साथ आने वाली पीढ़ियों को भगवान श्री राम के आदर्शों और मूल्यों से रूबरू कराना है। यूपी सरकार 500 वर्षों के अंतराल के बाद इस आयोजन के माध्यम से दुनिया के सामने नई अयोध्या की सांस्कृतिक और आध्यात्मिक महिमा को उसके प्राचीन रूप में प्रस्तुत करने की कोशिश में है।












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