अयोध्या विवाद: निर्मोही अखाड़ा के महंत भास्कर दास का निधन
अयोध्या। अयोध्या विवाद मामले में निर्मोही अखाड़ा के महंत भाष्कर दास का निधन हो गया है। उनका निधन आज सुबह 3 बजे हुआ है, उनकी उम्र 88 वर्ष थी। वह रामजन्मभूमि के प्रमुख पक्षकार थे। महंद भास्कर दास काफी लंबे समय से बीमार चल रहे थे, उन्हें सांस लेने में तकलीफ हो रही थी। मंगलवार को जब ब्रेन अटैक पड़ा तो निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था।
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दुकानों को बंद किया गया
महंत भास्कर दास का अंतिम संस्कार आज अयोध्या के तुलसीघाट पर होगा। उनके उत्तराधिकारी पुजारी राम दास ने बताया कि महंतजी की तबियत काफी खराब थी, जिसके चलते उन्हें मंगलवार को भर्ती कराया गया था। महंत भास्कर दास के निधन की खबर सुनते ही बड़ी संख्या में उन्हें देखने के लिए लोग जमा हो गए हैं। यही नहीं तमाम दुकानों को अयोध्या में बंद कर दिया गया है। शुक्रवार से ही महंत जी को देखने और मिलने वालों का तांता लगा हुआ था।

हर समुदाय के लोग मिलने के लिए पहुंचे
महंत भास्कर दास से मिलने ना सिर्फ हिन्दू समुदाय के लोग बल्कि शिया वक्फ बोर्ड के चेयरमैन वसीम रिजवी, सदस्य अशफाक हुसैन जिया भी पहुंचे थे। इसके अलावा भाजपा की प्रदेश कार्यसमिति के सदस्य अभिषेक मिश्र, ज्ञान केसरवानी व कई अन्य लोग महंत भास्कर दास से मिलने के लिए गए थे।

16 वर्ष की आयु में आ गए थे अयोध्या
आपको बता दें कि महंत भास्कर दास गोरखपुर के निवासी थे, वह 16 वर्ष की आयु में ही अयोध्या के हनुमान गढ़ी चले गए थे और यहां वह महंद बलदेव दास के सानिध्य में निर्मोही अखाड़ा के शिष्य बन गए थे। यहां पर उनकी शिक्षा दीक्षा हुई, जिसके बाद उन्हें राम चबूतरे पर बैठाया गया और बतौर पुजारी नियुक्त किया गया था। वर्ष 1986 में जब भास्कर दास के गुरु बजरंग दास का निधन हुआ था तो भास्कर दास को हनुमान गढ़ी का महंत बना दिया गया था।

हाशिम अंसारी से थे बेहतर संबंध
गौरतलब है कि इससे पहले बाबरी मस्जिद के सबसे बुजुर्ग पैरोकार हाशिम अंसारी का निधन हो गया था। उनका निधन 20 जुलाई 2016 को 96 वर्ष की आयु में हुआ था। उन्होंने अयोध्या में राम मंदिर और मस्जिद अलग-अलग बनवाने की बात कही थी। हाशिम अंसारी और महंत भास्कर दास के बीच बेहतर संबंध थे और दोनों ही चाहते थे कि इस विवाद का जल्द से जल्द अंत हो।












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