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अयोध्या विवाद: मौलाना का सुझाव, शिफ्ट कर सकते हैं मस्जिद

लखनऊ। अयोध्या विवाद को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई करते हुए मामले को जमीन विवाद करार देते हुए निर्देश दिया कि दो हफ्तों के भीतर दस्तावेजों का अनुवाद दाखिल किया जाए। कोर्ट के आदेश के बीच इस विवाद को सुलझाने के लिए ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सदस्यों ने आध्यात्मिक गुरु श्री श्री रविशंकर से मुलाकात की, इस दौरान मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड की ओर से कार्यकारी सदस्य सैयद सलमान हुसैन नदवी ने सुझाव दिया कि विवाद को सुलझाने के लिए मस्जिद को शिफ्ट किया जा सकता है।

ayodhya

बैठक के दौरान मौलाना नदवी ने सुझाव दिया का हम विवादित जगह से मस्जिद को हटाकर शान से एक शानदार मस्जिद का निर्माण कर सकते हैं, उन्होंने कहा कि हम लोग मिल-जुलकर रहेंगे तो हर समस्या को सुलझाया जा सकता है। इस दौरान उन्होंने कहा कि इस पूरे विवाद को खत्म करने के लिए सभी पक्षों की सहमति जरूरी है। बैठक मे शिया और सुन्नी समुदाय के कई लोग मौजूद थे, जानकारी के अनुसार इस मुद्दे पर अगली बैठक अयोध्या मे मार्च में होगी।

गौरतलब है कि इस पूरे विवाद पर सुनवाई करते हुए कहा था कि सभी पक्षों को अपने दस्तावेज तैयार करने के लिए दो हफ्ते का समय दिया जाता है, इस मामले की अगली सुनवाई 14 मार्च को होगी। वहीं इस मामले की पहले हुई सुनवाई के दौरान मुस्लिम पक्ष की पैरवी करते हुए कपिल सिब्बल ने कहा था कि इस मामले में जल्दी फैसला नहीं देना चाहिए और इसकी सुनवाई को अगले वर्ष जून 2019 के बाद करना चाहिए। उन्होंने कहा था कि यह मामले का राजनीतिक असर पड़ेगा। सिब्बल के तर्क के खिलाफ हिंदू पक्षकार हरीश साल्वे ने कहा कि कोर्ट को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ना चाहिए कोर्ट के बाहर क्या हो रहा।

इसे भी पढ़ें- 14 मार्च को अयोध्या मामले की सुनवाई, 2 हफ्ते के भीतर दस्तावेज जमा करने का निर्देश

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