क्षेत्रीय पार्टी का दर्जा मिलते ही अनुप्रिया पटेल के अपना दल ने पकड़ी तेजी, जानिए क्या मिलेंगे फायदे?
लखनऊ, 05 अगस्त: केंद्रीय मंत्री अनुप्रिया पटेल (Anupriya Patel) को विधानसभा चुनाव में अपनी सीटों की संख्या और मत प्रतिशत बढ़ाने का लाभ मिला है। चुनाव आयोग (ECI) ने अपना दल (सेकुलर) को एक क्षेत्रीय दल के रूप में मान्यता दे दी है। इसके साथ ही अब यूपी में क्षेत्रिय दलों की संख्या तीन हो गई है। इससे पहले समाजवादी पार्टी (SP) और राष्ट्रीय लोकदल (RLD)को यूपी में क्षेत्रीय दल का दर्जा प्राप्त है। अनुप्रिया ने अपनी पार्टी को क्षेत्रीय दल का दर्जा मिलने के साथ ही यूपी के सभी 18 मंडलों में अपनी इकाइयों के गठन का सिलसिला तेज कर दिया है। अपना दल ने तय किया है कि सभी मंडलों में सदस्यता अभियान चलाया जाएगा। इसके लिए जिलाध्यक्षों को टास्क पकड़ा दिया गया है।

पिछले दो लोकसभा और 2 विधानसभा चुनाव में अच्छा रहा प्रदर्शन
अपना दल (सेकुलर) अध्यक्ष और केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि, "यह पार्टी के लिए एक ऐतिहासिक दिन है।" यूपी में पार्टी के पास दो लोकसभा सांसद, 12 विधायक और एक एमएलसी है। अनुप्रिया पटेल खुद मिर्जापुर से सांसद हैं जबकि रॉबर्ट्सगंज से पकोरी लाल कोल हैं। लोकसभा चुनाव 2014 और 2019 में पार्टी का प्रदर्शन अच्छा रहा। वहीं, 2017 और 2022 के विधानसभा चुनाव में अपना दल (एस) को मजबूत होते देखा गया है। इसी वजह से उनके राज्य स्तरीय राजनीतिक दल का दावा मजबूत हुआ है। अनुप्रिया पटेल ने चुनाव आयोग के फैसले को पार्टी कार्यकर्ताओं की मेहनत का नतीजा बताया है।

कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत से मिला यह मुकाम
पटेल ने कहा कि पार्टी कार्यकर्ताओं की कड़ी मेहनत के कारण ही पार्टी को आगे बढ़ने में मदद मिली। उन्होंने भगवान बुद्ध, और छत्रपति शाहूजी महाराज, महात्मा ज्योतिबा फुले और बीआर अंबेडकर जैसे दलित प्रतीकों को सामाजिक रूप से उत्पीड़ित वर्गों के बीच काम करने के लिए पार्टी के लिए प्रेरणा के प्रमुख स्रोत के रूप में शामिल किया। अनुप्रिया ने स्पष्ट रूप से सरदार वल्लभभाई पटेल को एक प्रमुख सामाजिक-राजनीतिक व्यक्ति के रूप में श्रेय दिया जिसने पार्टी के आंदोलन को उत्प्रेरित किया।

क्षेत्रिय पार्टी का दर्जा हासिल करने के लिए होती हैं ये शर्तें
दरअसल किसी राजनीतिक दल को क्षेत्रिय दल के तौर पर मान्यता लेने के लिए आयोग के मानक पूरे करने पड़ते हैं। किसी भी पार्टी को क्षेत्रिय दल का दर्जा तभी मिलता है जब राज्य के विधानसभा चुनाव में कुल सीटों का 3% या 3 सीटें जो भी अधिक हो हासिल की हो। इसके साथ ही लोकसभा के आम चुनाव में पार्टी ने राज्य के लिए निर्धारित प्रत्येक 25 लोकसभा सीटों में से 1 सीट जीतनी जरूरी होती है। लोकसभा या विधानसभा चुनावों में डाले गए कुल वैध वोटों का 6% हासिल होना चाहिए। इसी तरह उस दल को लोकसभा की एक या दो विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की होती है।

चुनाव आयोग का मानक पूरा करने पर मिली सफलता
अपना दल (एस) ने 2022 के यूपी विधानसभा चुनाव में 17 सीटों पर चुनाव लड़ा और 12 पर जीत हासिल की। वहीं, पार्टी के उम्मीदवार 5 सीटों पर दूसरे नंबर पर रही। इसका फायदा पार्टी को मिला है। अब राज्य स्तरीय पार्टी बनने के बाद अपना दल (एस) को स्थायी चुनाव चिन्ह चुनने का विकल्प मिलेगा। पार्टी आयोग की वेबसाइट पर उपलब्ध चुनाव सिंबलों में से अपना सिंबल चुन सकती है। इसके अलावा पार्टी की तरफ से तीन डिजाइनों का प्रस्ताव आयोग को विचार करने के लिए भेज सकती है।

क्षेत्रिय दल की मान्यता के बाद मिलते हैं ये लाभ
क्षेत्रिय दल के तौर पर मान्यता मिलने पर राज्य में अपने उम्मीदवारों को पार्टी के लिए आरक्षित चुनाव चिह्न आवंटित करने का विशेषाधिकार प्राप्त हो जाता है। राज्य स्तर के उम्मीदवारों के लिए नामांकन पत्र दाखिल करते समय केवल एक प्रस्तावक की आवश्यकता होती है। उन्हें मतदाता सूची में संशोधन के समय मतदाता सूची के दो सेट नि:शुल्क प्राप्त करने का अधिकार है। आम चुनाव के दौरान अपने स्टार प्रचारकों को नामित करने की सुविधा मिलती है। एक मान्यता प्राप्त पार्टी में अधिकतम 40 स्टार प्रचारक हो सकते हैं जबकि एक गैर-मान्यता प्राप्त पार्टी में अधिकतम 20 स्टार प्रचारक हो सकते हैं।












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