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    अल्पसंख्यक संस्थाओं में मृतक आश्रित को नियुक्ति का हक : इलाहाबाद HC

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    इलाहाबाद। अल्पसंख्यक संस्थाओं में अब मृतक आश्रितों को नियुक्ति मिल सकेगी। संविधान में मिले अधिकारों का बहाना बताकर अब अल्पसंख्यक संस्थाएं मृतक आश्रितों को दरकिनार नहीं कर सकेंगी। इस दिशा में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक ऐतिहासिक फैसला सुनाया है और स्पष्ट कहा है कि अल्पसंख्यक संस्थाओं में मृतक आश्रित नियुक्ति पाने के हकदार हैं। अल्पसंख्यक संस्थाओं के विशेषाधिकार होने के बावजूद भी अधिनियम के कुछ उपबंध अल्पसंख्यक संस्था पर लागू होंते हैं, मृतक आश्रितों को नियुक्ति देना उसी उपबंध का हिस्सा है ।

    Allahabad HC gave Right to appoint deceased dependent in minority institutions

    क्या है मामला
    यूपी के बागपत में बरौत स्थित दिगंबर जैन इंटर कालेज में प्रतीक जैन को मृतक आश्रित कोटे के तहत नियुक्ति मिलनी थी। जिला विद्यालय निरीक्षक ने बाकायदा इसके लिए आदेश भी जारी कर दिया। इसी आदेश को कॉलेज ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में चैलेंज किया और प्रतीक जैन को नियुक्ति देने से इंकार कर दिया। कालेज ने संविधान के अनुच्छेद 289 और 30(1) का हवाला दिया और जिला विद्यालय निरीक्षक के फैसले कोट रद्द करने की मांग की। जबकि प्रतीक ने भी कालेज द्वारा नियुक्ति से इन्कार पर हाईकोर्ट की शरण ली और नियुक्ति देने की मांग की।

    ऐतिहासिक रहा फैसला
    मामले की सुनवाई न्यायमूर्ति पीकेएस बघेल ने शुरू की और बहस के दौरान कालेज प्रबंध समिति की ओर से दलील दी गई कि संविधान के अनुच्छेद 289 और 30(1) के तहत उनको विशेषाधिकार प्राप्त हैं। डीआईओएस का आदेश अल्पसंख्यक संस्था के प्रबंधकीय अधिकार में हस्तक्षेप है, जो सही नहीं है। हाईकोर्ट ने कालेज की दलील पर कहा कि सरकारी ग्रांट ले रहे अल्पसंख्यक कालेज पर रेगुलेशन के कुछ उपबंध लागू होंगे और मृतक आश्रितों को नियुक्ति उसी उपबंध के दायरे में है। फिलहाल हाईकोर्ट ने कालेज की याचिका खारिज कर दी है और प्रतीक जैन की याचिका स्वीकार करते हुए उनके पक्ष में फैसला सुनाया है।

    होगा बड़ा बदलाव
    इस फैसले के बाद अब बड़ा बदलाव भी देखने को मिलेगा। हजारों की संख्या में अल्पसंख्यक संस्था में मृतक आश्रित के मामले लंबित है, जिन्हे नियुक्ति का लाभ देने से इन्कार कर दिया गया है, लेकिन अब इस आदेश को आधार बनाकर मृतक आश्रित नियुक्ति पा सकेंगे। चूंकि अदालत ने अपने निर्णय में विशेषाधिकार को स्पष्ट करते हुए नियुक्ति की बात कही है, ऐसे में आगे फिर से कोर्ट में मामला जाने पर भी संविधान के अनुच्छेद 289 और 30(1) का अवलोकन होगा, जिससे फैसला को और अधिक बल ही मिलेगा।

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    English summary
    Allahabad HC gave Right to appoint deceased dependent in minority institutions
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