उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 : पढ़िए सबकुछ जो आपके लिए जानना है जरूरी

उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव 2017 : पढ़िए सबकुछ जो आपके लिए जानना है जरूरी, यूपी में कुल 403 विधानसभा सीटें हैं जबकि एक सदस्य को राज्यपाल मनोनीत करते हैं।

लखनऊ। उत्तर प्रदेश में चुनाव का बिगुल बज चुका है, चुनाव आयोग आज चुनावों की तारीख का ऐलान कर सकता है। इस घोषणा के साथ ही प्रदेश में तमाम राजनीतिक दल पूरे दमखम के साथ चुनावी मैदान में उतरने को तैयार है। प्रदेश में इस बार का चुनाव काफी अहम होने वाला है, पहली बार प्रदेश में ऐसी स्थिति उत्पन्न हो गई है जब सत्तारूढ़ दल चुनाव की तैयारी की बजाए अपने परिवार के विवाद में उलझा हुआ है। लेकिन बावजूद इसके कोई भी दल हाल फिलहाल पूर्ण बहुमत की ओर बढ़ता दिखाई नहीं दे रहा है। प्रदेश में मौजूदा समय की स्थिति पर नजर डालें तो सपा, बसपा, भाजपा और कांग्रेस चार सबसे बड़ी पार्टी हैं।

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उत्तर प्रदेश आबादी के लिहाज से देश का सबसे बड़ा राज्य हैं और यहां विधानसभा की कुल 403 सीटें हैं, इसके साथ ही लोकसभा की 80 सीटें हैं। देश का इतना बड़ा राज्य होने की लिहाज से इसकी अहमियत काफी बढ़ जाती है। यूपी के चुनाव ना सिर्फ राज्य का भविष्य बल्कि केंद्र की राजनीति पर भी बड़ा असर करती है। आइए डालते हैं यूपी के सियासी तानेबाने पर एक नजर

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2012 के विधानसभा चुनाव के नतीजे
इस चुनाव में कुल 59.5 फीसदी मतदाताओं ने अपने मत के अधिकार का प्रयोग किया था, जिसमें सपा को भारी जीत हासिल हुई थी और अखिलेश यादव प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। यह सोलहवीं विधानसभा है।

सपा- 232 सीट(सपा को 135 सीटों का लाभ हुआ था)
बसपा 80 सीट(बसपा को 126 सीटों का नुकसान हुआ था)
भाजपा 47 सीट(भाजपा को 4 सीटों का नुकसान हुआ था)
कांग्रेस+आरएलडी+एनसीपी- 38 सीट(पांच सीटों का लाभ)
निर्दलीय- 14 सीट

2014 लोकसभा चुनाव
लोकसभा चुनाव में प्रदेश की 80 सीटों में से 71 सीटों पर भारतीय जनता प्रीट ने अपनना कब्जा किया था, जबकि सपा के खाते में पांच, कांग्रेस के खाते में 2 व अपना दल के खाते में 2 सीटें आई थी। इस चुनाव में भाजपा को कुल 42.30 फीसदी वोट मिले थे, जबकि सपा को 22.20 फीसदी वोट। वहीं बसपा को 19.60, कांग्रेस को 7.50 फीसदी वोट मिले थे। लेकिन सिर्फ एक फीसदी वोट हासिल करके अपना दल दो सीटें हासिल करने में सफल हुई थी।

यूपी में कुल मतदाता
2014 के लोकसभा चुनाव के आंकड़ों के अनुसार प्रदेश में कुल मतदाताओं की संख्या 134,351,297 है।

यूपी विधानसभा का इतिहास
उत्तर प्रदेश में विधानसभा की कुल 404 सीटें हैं जिसमें से एक मनोनीत सदस्य एंग्लो इंडियन होता है जिसका चुनाव राज्यपाल करते हैं। 1967 तक उत्तर प्रदेश में विधानसभा में कुल 431 सीटें थी, जिसमें एक एंग्लो इंडियन सदस्य था। लेकिन परिसीमन आयोग की संस्तुति के बाद इसकी संख्या 426 हो गई। परिसीमन आयोग का गठन हर जनगणना के बाद होता है। वर्ष 2000 में उत्तराखंड के निर्माण के बाद प्रदेश में कुल 404 सदस्य ही रह गए। यूपी विधानसभा का कार्यकाल कुल पांच वर्ष का होता है, बशर्ते इसे भंग नहीं किया जाए। यूपी में चुनाव का मुख्य आधार होता है एक वयस्क एक वोट डाल सकता है।

पहली विधानसभा
उत्तर प्रदेश में पहली विधानसभा के सदस्य चुनकर 19 मई 1952 को सदन पहुंचे थे। 20 मई 1952 को आत्मा राम गोविंद खेर को विधानसभा का स्पीकर चुना गया था। 1951 में हुए पहले चुनाव में आईएनसी को 388, सपा को 20, बीजेएस को 2, एचएमएस को 1, केएमपीपी को 1, आरआरपी को 1, यूपीपीपी को 1, यूपीआरएसपी को 1, आईएनटी को एक सीट मिली थी। में पहली बार कांग्रेस की सरकार बनी थी और प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री गोविंद बल्लभ पंत थे।

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