कानपुर अधिवक्ता मामले में Akhilesh Yadav ने BJP सरकार को घेरा, बुलडोजर नीति पर साधा निशाना
Akhilesh Yadav news: लखनऊ में रविवार को आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में सपा प्रमुख और पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने योगी सरकार को घेरने का कोई मौका नहीं छोड़ा। उन्होंने आरोप लगाया कि बीजेपी से जुड़े लोगों पर प्रशासन कभी कठोर कार्रवाई नहीं करता।
उन्होंने कहा कि बुलडोजर का इस्तेमाल केवल विपक्ष और कमजोर तबकों पर किया जाता है। लेकिन जैसे ही मामला सत्ताधारी दल से जुड़े नेताओं या उनके करीबी लोगों से जुड़ता है सरकारी एजेंसियां चुप्पी साध लेती हैं।

पूर्व सीएम ने कानपुर के अधिवक्ता अखिलेश दुबे का जिक्र करते हुए कहा कि इतने बड़े स्तर पर अवैध कब्जे और हेराफेरी के आरोपों के बावजूद कार्रवाई रुकी हुई है। उन्होंने तंज किया कि बीजेपी के नजदीकी होने का यही असर है।
अरबों की जमीन पर कब्जे का आरोप
कानपुर में हाल ही में गिरफ्तार किए गए अधिवक्ता अखिलेश दुबे पर सरकारी जमीन हड़पने के गंभीर आरोप लगे हैं। जांच में सामने आया है कि उसने करीब ढाई हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों पर अवैध कब्जा किया।
बताया गया कि इन जमीनों पर गेस्ट हाउस, मॉल और निजी संस्थान खड़े किए गए। कई स्कूल भी उन्हीं विवादित भूखंडों पर चल रहे हैं। यह सब लंबे समय से सत्ता के संरक्षण में हुआ, लेकिन अब मामला सुर्खियों में आने पर चर्चा तेज है।
जांच में निकले चौंकाने वाले तथ्य
एसआईटी की जांच रिपोर्ट में सामने आया कि दुबे और उसके नेटवर्क ने फर्जी मुकदमों के जरिए लोगों से वसूली की। आरोप है कि झूठे मामलों में फंसाकर जमीनों का सौदा कराया गया और करोड़ों रुपये ऐंठे गए।
इतना ही नहीं, बेगुनाह लोगों पर दबाव बनाने के लिए गंभीर धाराओं का सहारा लिया गया। 54 झूठे मामलों का सिलसिला सामने आने के बाद पुलिस पर सवाल उठने लगे हैं कि अब तक ठोस कार्रवाई क्यों नहीं हुई।
नई तहरीरों के बावजूद चुप्पी
गिरफ्तारी के बाद पुलिस के पास 32 नई तहरीरें पहुंची हैं। इनमें अवैध कब्जे, रंगदारी और दबंगई के आरोप दर्ज हैं। इनमें से 9 मामलों की जांच पूरी होने के बावजूद एफआईआर दर्ज नहीं हो पाई।
शहर में चर्चा है कि राजनीतिक दबाव के कारण आगे की कार्रवाई टाल दी गई है। लोगों का कहना है कि दुबे की नजदीकी कई बड़े नेताओं और अफसरों से रही है, यही वजह है कि पुलिस हाथ बांधे बैठी है।
अखिलेश यादव ने सवाल उठाया कि आखिर सरकार इस मामले में चुप क्यों है। उन्होंने कहा कि विपक्षी नेताओं पर बुलडोजर चलाने वाली सरकार को अपने करीबियों पर भी वही नीति अपनानी चाहिए।
उन्होंने कहा कि अगर निष्पक्ष कार्रवाई नहीं हुई तो जनता इसका जवाब देगी। अब सबकी नजर इस पर है कि कानपुर प्रशासन और पुलिस आगे कौन-सा कदम उठाते हैं।












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