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हरेंद्र मलिक के दांव से अखिलेश ने कैसे बढाई जयंत चौधरी की टेंशन? पढ़िए पर्दे के पीछे की कहानी

Muzaffarnagar seat, उत्तर प्रदेश प्रमुख विपक्षी पार्टी समाजवादी पार्टी ने लोकसभा चुनाव 2024 की तैयारियां शुरू कर दी हैं।सपा के ओर से अभी तक दो लिस्टों में 80 सीटों में से 27 सीटों पर उम्मीदवारों का ऐलान किया जा चुका है।

सपा की ओर से पहली सूची में 16 उम्मीदवारों का ऐलान किया गया था। जबकि दूसरी सूची में 11 उम्मीदवारों के नाम का ऐलान किया गया है। सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने जयंत चौधरी परिवार के गढ़ कहे जाने वाली मुजफ्फरनगर सीट पर अपने उम्मीदवार का ऐलान इस लिस्ट में कर दिया है।

 Akhilesh Yadav increased trouble of Jayant Chaudhary by making Harendra Malik a candidate on Muzaffarnagar seat

समाजवादी पार्टी ने चौधरी परिवार की पारंपरिक सीट मुजफ्फरनगर से दिग्गज नेता हरेंद्र मलिक को प्रत्याशी घोषित किया है। सपा के इस ऐलान के बाद जयंत चौधरी की मुश्किलें बढ़ गई हैं। जयंत और अखिलेश के बीच इसी सीट को लेकर पेंच भी फंसा था। इस सीट को जयंत चौधरी अपने लिए मांग रहे थे। जिसके पीछे जयंत चौधरी की ओर से यह तर्क दिया गया था कि, 2019 के लोकसभा चुनाव में मोदी लहर के बावजूद उनके पिता अजीत सिंह सिर्फ 6 हजार मतों से हारे थे।

जिसके बाद अखिलेश यादव इस बात पर सहमत हुए थे, कि यह सीट उन्हें दे दी जाएगी, लेकिन नल के निशान पर चुनाव सपा नेता हरेंद्र मलिक लड़ेंगे। जिस बात से जयंत चौधरी नाराज थे। हालांकि अब सपा और रालोद का गठबंधन टूट चुका है। जयंत जल्द ही एनडीए में शामिल हो सकते हैं। हालांकि अभी तक इसका अधिकारिक ऐलान नहीं हुआ है। लेकिन सपा द्वारा हरेंद्र मलिक को कैंडिडेट बनाने के बाद जयंत की मुश्किलें फिर बढ़ गई हैं।

बीजेपी के साथ जाकर जयंत चौधरी को लग रहा था कि, मुजफ्फरनगर सीट मिल उन्हें जाएगी, लेकिन हरेंद्र मलिक के मैदान में उतरने के बाद इस सीट पर समीकरण फिर बदल गए हैं। यहीं नहीं मलिक के नाम के ऐलान के बाद जयंत की दावेदारी भी कमजोर हो गई है।

इसके पीछे की वजह इस सीट का जातीय समीकरण है। हरेंद्र मलिक एक जाट नेता है। वह इस सीट पर आरएलडी के वोट बैंक में ही सेंधमारी करेंगे। ऐसे में बीजेपी चाहेगी कि, वह इस सीट को अपने पास ही रखे। उसकी इस सीट पर पकड़ भी मजबूत है।

बीते दो चुनावों के दौरान बीजेपी ने इस सीट पर अपना दबदबा बना रखा है। दोनों चुनावों में बीजेपी के टिकट पर संजीव बाल्यान चुनाव जीते हैं, जो अभी केंद्र सरकार में मंत्री भी हैं। ऐसे में हरेंद्र मलिक का नाम सामने आने के बाद बीजेपी इस सीट पर अपना दावा ठोंक रही है। माना जा रहा है कि, इसी सीट के चलते एनडीए के साथ जयंत चौधरी की बात फाइनल नहीं हो पाई है।

पश्चिम यूपी में समाजवादी पार्टी ने जाट राजनीति में मजबूत पकड़ रखने वाले हरेंद्र मलिक का इस इलाके में काफी बड़ा जनाधार है। जिसके एक बानगी चरथावल में हुए विधानसभा चुनाव में देखने को मिली। 2022 में भाजपा के प्रभाव वाली चरथावल विधानसभा सीट पर बेटे पंकज मलिक को जिताकर मलिक ने सपा के शीर्ष नेतृत्व को अपनी मजबूती का अहसास भी कराया था। चरथावल सीट मजुफ्फरनगर लोकसभा क्षेत्र में आती है।

रालोद के अलग हो जाने के बावजूद सपा को अपने समीकरण पर भरोसा है। जाट, मुस्लिम व अन्य मतों के गणित के सहारे ही सपा ने उन्हें मैदान में उतारा है। पूर्व सांसद की पकड़ प्रत्येक वर्ग में है। यही नहीं बीजेपी से नाराज जाट वोट भी हरेंद्र मलिक का पाले में आने की उम्मीद है।

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