पत्थरबाजों के बचाव में ही उतर आए अखिलेश, योगी सरकार को घेरा, EVM की फॉरेंसिंक जांच की मांग
उत्तर प्रदेश के संभल में स्थित शाही जामा मस्जिद का सर्वे करने गई एएसआई की टीम पर आज सुबह लोगों ने हमला बोल दिया। बड़ी संख्या में लोगों ने सर्वे टीम और पुलिसवालों पर पत्थरबाजी की। जिसके बाद पुलिस बल ने यहां टियर गैस का इस्तेमाल किया ताकि भीड़ को तितर-बितर किया जा सके। इस पूरी घटना पर पूर्व मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने योगी सरकार पर ही निशाना साधा। उन्होंने इस पूरी घटना को सुनियोजित साजिश बता डाला। इस पूरी घटना पर अखिलेश योगी सरकार को घेरते नजर आए लेकिन उन्होंने पत्थरबाजों पर एक भी शब्द नहीं कहा।
अखिलेश यादव ने कहा कि संभल में सर्वे हो चुका था, चुनाव की चर्चा ना हो पाए, इसलिए जानबूझकर सर्वे के लिए टीम भेजी गई, जिससे माहौल खराब हो जाए। कोई चुनाव पर चर्चा ना कर सके। जो जानकारी मिल रही है, उसके अनुसार कई लोगों को चोट पहुंची है, कई लोग घायल हैं, एक नौजवान नईम की जान चली गई है।

दोबारा सर्वे पर सवाल
जब मस्जिद का सर्वे हो चुका था तो दोबारा सर्वे क्यों करा रही है यह सरकार और वो भी सुबह व बिना तैयारी के। मैं कानूनी और कोर्ट के प्रोसीजर पर नहीं जाना चाहता हूं। दूसरे पक्ष की कोई सुनवाई नहीं है, उनकी कोई सुनने वाला नहीं है। यह जानबूझकर इसलिए किया है ताकि आज किस बात पर चर्चा हो, किस इमोशन पर चर्चा हो ये लोग तय करें।
लोकतंत्र में हो रहा तंत्र का इस्तेमाल
भाजपा सरकार, प्रशासन ने मिलकर यह कराया है, जिससे चुनाव की धांधली, चुनाव की बेइमानी पर चर्चा ना हो सके। लोकतंत्र में सच्ची जीत लोक से होती है, तंत्र से नहीं होती है। लेकिन यह नया लोकतंत्र जो भाजपा ने बनाया है, उसमे ये लोगों को वोट नहीं डालने दे रहे हैं, अपने तंत्र को आगे कर दे रहे हैं।
भाजपा की छल-कपट की जीत
जब भी निष्पक्ष जांच होगी, बूथ की तमाम वीडियो और रिकॉर्डिंग की जांच होगी तो सच सामने आएगा। बूथ में किसने वोट डाला किसी को जानकारी नहीं है। जिस जीत के पीछे छल होता है, वह दिखावटी झूठ का दिखावा होता है। ये पूरा नाटक भाजपा ने रचा है, ये जश्न मनाना, ये सब नाटक था। ऐसी जीत जीतने वालों को कमजोर करती है।
नैतिक रूप से उनके जमीर को मार देती है। बिना जमीर के जीने वाले लोग खोखले होते हैं। ऐसे लोग सबके सामने अपने आपको ताकतवर दिखाने की कोशिश करते हैं,लेकिन अकेले में आइने में अपना मुंह देखने से भी डरते हैं।
चुनाव में खुलकर धांधली
भाजपा का हारने का डर तो उसी दिन साबित हो गया था जिस दिन उसने पीडीए के अधिकारी, कर्मचारियों को चुनाव से हटा दिया ताकि ये लोग अपने लोगों को सेट कर सकें। हमने इसका विरोध किया था। लेकिन जब शासन-प्रशासन ही दुशासन बन जाए तो लोकतंत्र के चीरहरण को कौन रोक सकता है। चुनाव में धांधली को हम सबने कैमरे में देखा है।
इनकी धांधली चंडीगढ़ में कैमरे में पकड़ी गई थी। जिनकी उंगलियों पर किसी के निशान नहीं हैं, लेकिन उनका वोट पड़ गया है। चुनाव आयोग अपने कागजों में देखे कि जिनका नाम दर्ज है वो बूथ पर पहुंचे कि नहीं। जब यह जांच होगी तो तो दूध का दूध पानी का पानी हो जाएगा।
EVM की फॉरेंसिक जांच हो
अगर ईवीएम की कोई फॉरेंसिक जांच संभव हो तो एक ही उंगली से कितनी बार बटन दबाया गया है पता चल जाएगा। सुनने में यहां तक आया है कि जो लोग बाहर थे, उन्हें पहले ही इन लोगों ने चिह्नित कर लिया था और उनके वोट भी इन लोगों ने डाल दिए।
ये नए जमाने की इलेक्ट्रॉनिक बूथ कैप्चरिंग हैं। जो कोर्ट की निगरानी में होने वाले चुनाव में हेराफेरी कर सकते हैं, वो बंद बूथ में क्या-क्या कर सकते हैं।












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