सपा की नई सूची में शिवपाल-अखिलेश के झगड़े के ये रहे सबूत

समाजवादी पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने 23 उम्मीदवारों की सूची जारी की है, इस सूची ने अखिलेश और शिवपाल की लड़ाई को फिर सामने ला दिया है।

लखनऊ। प्रदेश अध्यक्ष शिवपाल यादव ने शनिवार को लखनऊ में 23 प्रत्याशियों के नाम की घोषणा की है। साथ ही पहले घोषित सात उम्मीदवारों के टिकट काट दिए गए हैं। इस सूची में शिवपाल ने जहां अपने चहेतों के टिकट दिए हैं, वहीं अखिलेश समर्थित उम्मीदवारों के टिकट काटे गए हैं।

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उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव के लिए जारी की गई इस लिस्ट में शिवपाल ने 15 अपने चहेतों को टिकट दिया, जबकि आठ अखिलेश समर्थकों के टिकट काटे हैं। नई सूची एक बार फिर चाचा-भतीजे में झगड़े का कारण बन सकती हैं, ऐसा कहने की कई खास वजह हैं।

उम्मीदवारों की जो नई सूची जारी की गई है, उसमें मुख्तार अंसारी के बड़े भाई सिबतुल्लाह अंसारी को मोहम्मदाबाद से प्रत्याशी बनाया गया है। कुछ समय पहले मुख्तार अंसारी के भाई अफजाल अंसारी ने अपनी पार्टी कौमी एकता दल का विलय सपा में किया था।

आपको बता दें कि अखिलेश कौमी एकता दल के विलय के पक्ष में नहीं थे। कौमी एकता दल के विलय को लेकर अखिलेश यादव ने चाचा शिवपाल और पिता मुलायम के खिलाफ ही मोर्चा खोल दिया था। यहां तक कि अखिलेश ने सार्वजनिक मंच से भी कौमी एकता दल के विलय का विरोध किया था।

बाद में लंबी खींचतान के बाद कौमी एकता दल का विलय सपा में हो गया था। अब मुख्तार के भाई को टिकट दिए जाने से फिर से अखिलेश की नाराजगी सामने आ सकती है।

अखिलेश ने जिसे धकियाया, शिवपाल ने प्रत्याशी बनाया

इस सूची में हत्या जैसे गंभीर मामलों के आरोपी अतीक अहमद का भी नाम है। कानपुर कैंट से हाजी परवेज का टिकट काटकर अतीक को प्रत्याशी बनाया है।

अतीक से अखिलेश की नाराजगी कुछ समय पहले एक कार्यक्रम में सामने आई थी, जब उन्होंने बराबर में खड़े अतीक को धकिया कर मंच से पीछे कर दिया था। अब उनको प्रत्याशी बनाकर शिवपाल ने अखिलेश को झटका दिया है।

सूची में और दो नाम ध्यान खींचते हैं, उनमें बसपा के राष्ट्रीय महासचिव नसीमुद्दीन सिद्दीकी के भाई हसनुद्दीन भी शामिल हैं। बसपा नेता के भाई हसनुद्दीन सिद्दीकी को बांदा से उम्मीदवार बनाया गया है।

सपा के सीनियर नेता आजम खान के छोटे बेटे अब्दुल्ला आजम को रामपुर की स्वार सीट से उम्मीदवार बनाया गया है। इंजीनयरिंग की पढ़ाई करने वाले अब्दुल्ला 2014 लोकसभा चुनाव के वक्त पहली बार सार्वजनिक मंच पर दिखे थे।

प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद शिवपाल चहेतों को दे रहे टिकट

प्रदेश अध्यक्ष बनने के बाद शिवपाल लगातार अखिलेश के करीबी नेताओं के टिकट काट रहे हैं। शिवपाल ने इससे पहले अखिलेश की नाराजगी के बावजूद महाराजगंज से पत्नी की हत्या के दोषी अमनमणि त्रिपाठी का टिकट घोषित किया है।

वहीं शुक्रवार को अखिलेश ने भी जावेद आब्दी को सिंचाई विभाग में सलाहकार बनाकर दर्जा प्राप्त मंत्री बनाया है। आब्दी को पिछले महीनें ही शिवपाल ने समाजवादी पार्टी के मंच से धक्का देकर उतार दिया था।

एक महीने पहले जिस तरह से चाता-भतीजा भिड़े थे, उसे देखकर पार्टी के टूटने की भी बात होने लगी थी लेकिन फिर सब सामान्य दिखने लगा। अब पिछले दो-तीन में जो हुआ है, वो फिर से यादव परिवार में हलचल के संकेत दे रहा है।

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