सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद लखनऊ में केक काटकर LGBT सदस्यों ने मनाया जश्न
लखनऊ। आज सुप्रीम कोर्ट ने अहम फैसला सुनाते हुए समलैंगिकता को अपराध की श्रेणी से बाहर कर दिया। सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि समलैंगिकता अपराध नहीं है। चीफ जस्टिस की अगुवाई वाली सुप्रीम कोर्ट की पांच जजों की बेंच ने जैसे ही ये फैसला सुनाया LGBT समुदाय के लोगों ने खुशी मनाना शुरू कर दिया और सड़कों पर उतर कर जश्न मनाने लगे।

लखनऊ के हजरतगंज में LGBT समुदाय के लोग ने इकट्ठा होकर इस फैसले पर में जश्न मनाया। समुदाय के लोगों ने केक काटा कर और एक दूसरे को गले लगा कर बधाइयां दीं। सदस्यों ने कहा कि अब चुकी फैसला आ गया है इसलिए अब हमें समाज मे किसी से मुंह नहीं छुपाना पड़ेगा। साथ ही ये भी कहा कि अब हमारी लड़ाई और बढ़ जाएगी। क्योंकि अभी तो हम कानून अधिकार पाने के लिए लड़ रहे थे अब जब कानूनी अधिकर मिला गया है तो हमारे सामने अब समाज मे जा कर अपनी बात रखने की चुनौती है। हमे लोगों की कॉउंसलिंग करनी पड़ेगी खास कर ऐसा लोगों की जिनके बच्चे समलैंगिक हैं। उन्हें समझना पड़ेगा कि अब ये कानूनी हक है इसमें किसी शर्म की जरूरत नहीं है।

बात दें कि 10-17 जुलाई के बीच चार दिन की सुनवाई के बाद उच्चतम न्यायालय ने इस मामले पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया था। सर्वोच्च न्यायालय की संविधान पीठ में चीफ जस्टिस दीपक मिश्र की अध्यक्षता वाली बेंच ने ये फैसला सुनाया। करीब एक घंटे में सुनाए पाने फैसले में धारा 377 को रद्द कर दिया गया है। कोर्ट ने कहा कि यौन प्राथमिकता प्राकृतिक और बाईलोजिकल है। किसी से यौन संबंध बनाना निजी चॉइस है इसे अपराध की श्रेणी में नही रखा जा सकता है।












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