लखनऊ किसान महापंचायत के बाद BJP में नई रणनीति पर मंथन, पश्चिम एवं तराई क्षेत्र की 150 सीटों पर होगा फोकस

लखनऊ, 23 नवंबर: उत्तर प्रदेश में सियासत का दौर जारी है और सभी दल एक दूसरे को शह और मात देने के खेल में जुटे हुए हैं। ऐसा माना जा रहा था कि पीएम मोदी के ऐलान के बाद किसान आंदोलन ठंडा पड़ जाएगा लेकिन लखनऊ में जिस तरह से किसानों ने अपनी महापंचायत में योगी और मोदी सरकार पर तीखे हमले किए उससे बीजेपी को सोचने पर मजबूर कर दिया है। बीजेपी इस बात का आंकलन करने में जुटी है कि यदि किसान आंदोलन की आग ठंडी नहीं हुई तो पश्चिम और तराई बेल्ट की कितनी सीटों पर इसका असर पड़ेगा। जेपी नड्‌डा ने इस रणनीति को लेकर सोमवार को लखनऊ में बीजेपी की कोर कमेटी के साथ मंथन किया था और उन इलाकों में ज्यादा फोकस करने की सलाह दी है जहां चुनाव प्रभावित होने की गुंजाइश ज्यादा है।

नई चुनौतियों को लेकर एक कार्ययोजना तैयार करेगी बीजेपी

नई चुनौतियों को लेकर एक कार्ययोजना तैयार करेगी बीजेपी

उत्तर प्रदेश में आगामी विधानसभा चुनाव में जीत सुनिश्चित करने के लिए भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) युद्धस्तर पर काम कर रही है। प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की घोषणा ने पार्टी के लिए अपनी रणनीति को नए सिरे से परिभाषित करने के लिए एक नया ढांचा तैयार किया है। राष्ट्रीय अध्यक्ष जेपी नड्डा के नेतृत्व में कई भाजपा नेताओं ने चुनौतियों की पहचान करने के लिए एक कार्य योजना तैयार करने और उन्हें संबोधित करने की रणनीति तैयार करने पर जोर दिया।

बीजेपी ने नई रणनीति पर मंथन शुरू किया

बीजेपी ने नई रणनीति पर मंथन शुरू किया

बीजेपी सूत्रों के अनुसार, ''रविवार शाम गोरखपुर से लखनऊ पहुंचे नड्डा ने कोर कमेटी के सदस्यों के साथ बैठक की थी। भाजपा महासचिव (संगठन) बीएल संतोष और राज्य चुनाव प्रभारी धर्मेंद्र प्रधान भी दिल्ली से चुनाव को लेकर मंथन सत्र के लिए पहुंचे। तीन कृषि कानूनों को वापस लेने की पीएम मोदी की घोषणा से उत्तर प्रदेश के पश्चिमी और तराई क्षेत्रों की लगभग 150 सीटों पर चुनाव प्रभावित होने की उम्मीद है। नड्डा की बैठक के साथ ही बीजेपी ने इन सीटों के लिए नई रणनीति पर मंथन शुरू कर दिया है।''

पीएम के ऐलान के बाद नड्‌डा ने उसके असर का फीडबैक लिया

पीएम के ऐलान के बाद नड्‌डा ने उसके असर का फीडबैक लिया

इससे पहले, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह बैठकों के लिए लखनऊ में पार्टी मुख्यालय गए थे, जहां उन्होंने क्षेत्रवार समीक्षा की। बाद में उन्होंने वाराणसी में उत्तर प्रदेश भाजपा के क्षेत्र और जिला पदाधिकारियों के साथ बैठक की और फीडबैक लिया था। लखनऊ में नड्डा की कोर कमेटी की बैठक को पीएम नरेंद्र मोदी की घोषणा के बाद राज्य में राजनीतिक परिदृश्य में बदलाव को देखते हुए एक महत्वपूर्ण सत्र के रूप में देखा जा रहा है।

बूथ अध्यक्षों के सम्मेलन और सदस्यता अभियान पर भी हुई चर्चा

बूथ अध्यक्षों के सम्मेलन और सदस्यता अभियान पर भी हुई चर्चा

बैठक में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ, प्रदेश प्रभारी राधा मोहन सिंह, प्रदेश अध्यक्ष स्वतंत्र देव सिंह, उपमुख्यमंत्री केशव प्रसाद मौर्य, प्रदेश महासचिव (संगठन) सुनील बंसल और सह महासचिव (संगठन) कर्मवीर सिंह भी मौजूद थे। भाजपा सूत्रों ने बताया कि बैठक में विधानसभा चुनाव की तैयारियों, बूथ अध्यक्षों के सम्मेलन और सदस्यता अभियान समेत कई अन्य मुद्दों पर चर्चा हुई। भाजपा चुनाव के लिए जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को मजबूत करने के लिए बूथ प्रबंधन और बड़े पैमाने पर सदस्यता अभियान पर लगातार काम कर रही है।

क्या किसान महापंचायत से बढ़ी बीजेपी की टेंशन

क्या किसान महापंचायत से बढ़ी बीजेपी की टेंशन

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश के नाम संबोधन में तीन कृषि बिलों को वापस लेने का ऐलान किया था। इसके बावजूद किसान संगठन बीजेपी पर भरोसा करने को तैयार नहीं हैं। किसानों का आरोप है कि केंद्र सरकार ने पहले भी किसानों के साथ बहुत वादे किया लेकिन अभी तक उनको पूरा नहीं किया गया है। इसलिए जब तब संसद में कानून नहीं बन जाता तब तक आंदोलन जारी रहेगा। साथ ही किसानों ने कृषि बिल के अलावा अन्य मांगों पर भी विचार करने की बात कही है। किसानों का कहना था कि जब तक केंद्र सरकार किसानों के सभी विंदुओं पर सहमति नहीं जताएगी तब तक आंदोलन चलता रहेगा। यूं कहें कि एक तरह से लखनऊ की महापंचायत से किसानों ने यह संदेश दिया कि यह आंदोलन अभी आगे तक चलता रहेगा।

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