ताजमहल पर विवाद के बाद अब इसके जरिए निवेश बटोरने में जुटी योगी सरकार
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लखनऊ। उत्तर प्रदेश में सत्ता संभालते ही जिस तरह से योगी सरकार ताजमहल के विवाद में घिरी उसके बाद अब सरकार ताजमहल के जरिए निवेशको को लुभाने की कोशिश में जुट गई है। कुछ दिनों पहले यूपी सरकार की पर्यटन पुस्तिका से ताजमहल गायब था, जिसको लेकर काफी विवाद हुआ था, लेकिन अब सरकार ताजमहल के जरिए राजस्व जुटाने में जुट गई है। सरकार ने यूपी के निवेशकों के लिए जो पुस्तिका बनाई है उसमे ताज महल को जगह दी गई है, समिट 2018 के लिए तैयार की गई पुस्तिका में ताजमहल को जगह देकर सरकार आगरा को प्रदेश के तमाम एक्सप्रेसवे से जोड़ने की योजना बना रही है, लिहाजा इसके लिए लोगों को निवेश करने के लिए आमंत्रित कर रही है।

ताजमहल को बनाया हथियार
समिट 2018 के लिए जो पुस्तिका तैयार की गई है उसमे कहा गया है कि ताजमहल को देश का बेस्ट कल्चरल डेस्टिनेशन अवॉर्ड 2016-17 मिला है, यह अवार्ड प्लैनेट मैगजीन की ओर से दिया गया है। इस पुस्तिका में ताजमहल की काफी बड़ी तस्वीर को लगाया गया है। 22 पन्नों की इस पुस्तिका में ताज महल की तस्वीर को चार बार जगह दी गई है। पहले पेज को यूपी में इंफ्रास्ट्रक्चर के लिए समर्पित किया गया है, जिसमे सभी छह एक्सप्रेस वे को दिखाया गया है। इसके बारे में लिखा गया है आगरा से लखनऊ एक्सप्रेस वे जोकि 302 किलोमीटर लंबा है, यह लखनऊ को यूपी के अधिक से अधिक पर्यटन के जिलों से जोड़ता है। इसके बाद इसमे यमुना एक्सप्रेसवे का जिक्र किया गया है, इसके बारे में लिखा गया है कि यह 165 किलोमीटर लंबा है जोकि देश की राजधानी को यूपी के सबसे लोकप्रिय जगह ताजमहल को जोड़ता है।

डेयरी व टेक्सटाइल में निवेश के लिए आमंत्रण
पुस्तिका में लिखा है कि अलीगढ़-आगरा, कानपुर और इलाहाबाद में 2500 एकड़ का एक बड़ा मैनुफैक्चरिंग क्लस्टर प्रस्तावित है। इसके अलावा सरकार ने दो पेज डेयरी उद्योग को भी दिए हैं, जिसमे कहा गया है कि यूपी भारत में सबसे ज्यादा दूध उत्पादन करने वाला राज्य है, लिहाजा डेयरी उद्योग में निवेश की अपार संभावनाएं हैं, यहां प्रोसेसिंग, डेयरी फार्मिंग के उद्योग, कोल्ड चेन, स्टोरेज आदि में निवेश किया जा सकता है। साथ ही चारे की खेती, पशुओं में वीर्यारोपड़ आदि के क्षेत्र में भी निवेश की अपार संभावनाएं हैं।

200 करोड़ रुपए खर्च होंगे समिट में
इस पुस्तिका में कहा गया है कि उत्तर प्रदेश में देश की सबसे अधिक दुधारू जानवर हैं, यहां 2.54 करोड़ गाए व भैंस हैं, प्रदेश में हर वर्ष 3.5 लाख किलोग्राम दूध का उत्पादन होता है। डेयरी उद्योग और ताजहमल के अलावा सरकार ने वाराणसी को भी इसमे शामिल किया है और यहां के हथकरधा उद्योग को जगह दी है। राज्य सरकार चाहती है कि लोग यहां कपड़ो, टेक्सटाइल आदि के सेक्टर में निवेश करे। सरकार चाहती है कि मिर्जापुर भदोही के कार्पेट व वाराणसी के टेक्सटाइल में निवेश करें। सरकार ने इस समिट के लिए एक पीआर फर्म को हायर किया है, जिसे 200 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है, जोकि इस पूरे समिट का आयोजन करेगी, यह समिट 21 फरवरी व 22 फरवरी को होगी।
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