Abdullah’s disqualification as MLA: इस झटके से उबर पाएगा आजम का परिवार? BJP को मिला ये बड़ा मौका
अब्दुल्ला आजम के विधानसभा की सदस्यता खोने के बाद सत्तारूढ़ भाजपा को स्वार विधानसभा सीट जीतने का मौका मिलेगा। साथ ही उसने पिछले साल रामपुर लोकसभा और रामपुर सदर विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी।

Abdullah's disqualification as MLA: समाजवादी पार्टी (सपा) के वरिष्ठ नेता आज़म खान के बेटे और स्वार से विधायक अब्दुल्ला आज़म खान की विधानसभा की सदस्यता चली गई है। सोमवार को 15 साल पुराने एक मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद विधानसभा की ओर से एक आदेश जारी कर इसकी जानकारी दी गई है। इसके साथ ही देश में अब्दुल्ला आजम अकेले ऐसे विधायक हो गए हैं जिनकी दो बार सदस्यता जा चुकी है। अब्दुल्ला आजम की सदस्यता जाना आजम परिवार के लिए एक बड़ा झटका माना जा रहा है वहीं बीजेपी को एक बार फिर यह सीट जीतने का मौका मिलेगा। हाल ही में बीजेपी रामपुर सदर और रामपुर लोकसभा सीट पर हुए उपचुनाव जीत चुकी है। ऐसे में इस सीट को सपा बचा पाएगी या नहीं यह देखना दिलचस्प होगा।

रामपुर में हमेशा रहा आजम परिवार का रसूख
वर्ष 2002 से आजम खान के परिवार का कम से कम एक सदस्य सांसद रहा है। 2019 में एक छोटी अवधि के लिए, आज़म खान की पत्नी तज़ीन फ़ातिमा और उनके बेटे अब्दुल्ला आज़म खान विधायक थे। उस समय आजम खान रामपुर से लोकसभा सांसद थे जबकि उनकी पत्नी और बेटा दोनों उस जिले के रामपुर सदर और स्वार विधानसभा क्षेत्रों से विधायक थे। तज़ीन ने अपना कार्यकाल 2022 में रामपुर सदर विधायक के रूप में समाप्त होने के बाद कोई चुनाव नहीं लड़ा, जबकि आज़म खान ने अपनी सदस्यता खो दी क्योंकि उन्हें पिछले साल 2019 के अभद्र भाषा मामले में दोषी ठहराए जाने के बाद विधायक के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था। इसके बाद ही अब अब्दुल्ला ने भी अपनी सदस्यता खो दी है।
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दूसरी बार गई अब्दुल्ला आजम की सदस्यता
दरअसल पहली बार अब्दुल्ला आजम के द्वारा प्रस्तुत चुनावी हलफनामे में विसंगति के कारण उन्हें 16 दिसंबर, 2019 को इलाहाबाद उच्च न्यायालय द्वारा विधायक के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था। हालांकि, भारतीय जनता पार्टी के विक्रम सैनी को भी 2013 के मुजफ्फरनगर दंगों के एक मामले में 2022 में एक अदालत द्वारा दोषी ठहराए जाने के बाद खतौली सीट से विधायक के रूप में अयोग्य घोषित कर दिया गया था और उन्हें दो साल की जेल की सजा सुनाई गई थी।

बीजेपी को मिलेगा स्वार सीट जीतने का मौका
अब्दुल्ला आजम के विधानसभा की सदस्यता खोने के बाद सत्तारूढ़ भाजपा को स्वार विधानसभा सीट जीतने का मौका मिलेगा। साथ ही उसने पिछले साल रामपुर लोकसभा और रामपुर सदर विधानसभा सीटों पर जीत हासिल की थी। हालांकि, रामपुर लोकसभा और विधानसभा सीटों के विपरीत स्वार विधानसभा सीट वह सीट है जिसे भाजपा ने पहले जीता था। बीजेपी ने 1989 और 2002 के बीच लगातार चार बार यह सीट जीती। तत्कालीन भारतीय जनसंघ (बीजेपी की मूल पार्टी) ने 1969 में इसे जीता था।

एमपी-एमएलए कोर्ट के फैसले ने बढ़ाई सपा की टेंशन
परिदृश्य के बारे में पूछे जाने पर समाजवादी पार्टी के एक प्रवक्ता ने कहा कि, " हम इस मामले में कोई टिप्पणी नहीं करेंगे। इस पर आगे का फैसला जल्द ही पार्टी करेगी।" दरअसल मुरादाबाद जिले के छाजलेट इलाके में सड़क जाम करने के 15 साल पुराने मामले में मुरादाबाद की एमपी-एमएलए कोर्ट ने सोमवार को वरिष्ठ सपा नेता आजम खां और उनके बेटे अब्दुल्ला आजम को दो साल कैद की सजा सुनाई थी। उत्तर प्रदेश विधानसभा की ओर बुधवर को अब्दुला आजम की विधानसभा सदस्यता को रद्द करने का फैसला किया गया। इसको लेकर बुधवार को एक आदेश भी जारी कर दिया गया।

स्वार विधानसभा सीट पर जल्द होगा चुनाव
अब 15 साल पुराने छजलैट (Chhajlet) मामले में आजम खान और उनके बेटे अब्दुला को मुरादाबाद (Moradabad) की एमपी-एमएलए कोर्ट ने दोषी करार देते हुए 2 साल की सजा सुनाई है। इसी वजह से विधानसभा सचिवालय ने उनकी सदस्यता रद्द कर दी है। अब्दुला की विधायकी खत्म होने के बाद स्वार सीट खाली हो गई है, इसलिए वहां चुनाव की तैयारी भी शुरू की जाएगी। ठीक इसी तरह हेट स्पीच मामले में अब्दुल्ला आजम के पिता आजम खान की रामपुर से विधानसभा सदस्यता गई थी।












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